खरगोश के चतुराई से बाचल जान

एगो जंगल में हाथी के एगो झुंड रहत रहे। ओह झुंड में जवन सभले बूढ़ हाथी रहे, सभ हाथी ओकरा के आपन सरदार मानत रहसन। जब बुढ़वा ए झुंड के सरदार रहे त ओकर एगो अलगा से नाम भी होखे के चाहत रहे। एही से सभ के धन में राखत ओकर नाम ‘गजु पहलवान' धराईल रहे।

'गजु पहलवान' अपना झुंड के सभ हाथी से बाड़ा प्रेम करत रहे। सभकर सुख-दुख के बाड़ा ख्याल रखत रहे। उ हरमेसा इहे चाहत रहे कि, ओकरा झुंड के कवनों हाथी के कवनो दिक्कत भा कष्ट जन होखे। जब गजु पहलावन सभकर अतना ख्याल राखत रहे, त सभ हाथी अपना सरदार के बाड़ा इज्जत करत रहसन।

एक साल बुनी (वर्षा) ना परे से जंगल के सभ पेड़-पौधा सुखा गईल। नदी-नाला सभे सुख गईल। एह चलते जंगल में अकाल पड़ गईल। ना त खाए के कुछु बाचल रहे अवरू ना पिए के। कतहूँ पानी ताक ना रह गईल रहे। जंगल में हाहाकार मच गईल। जंगल के सभ जानवर, पशु-पक्षी जंगल छोड़ के दोसरा जगह चल गईले।

जंगल में के बाचल...... त जंगल में खाली बाच गईले गजु पहलवान अवरू उनकर झुंड के हाथी। अब भूखे-पियासे हाथी लोग के हालत खराब होखे लागल। हाथी के झुंड में से एक-आध गो हाथी मर गईले। इ सभ देख-जान के गजु पहलवान के बहुत चिंता होखे लागल।

उ सोचे लागल कि अईसन का करी, जवना से हमरा झुंड के हाथी सभ के जान बांच जाए। बहुत सोचला समझला के बाद एक दिन 'गजु पहलवान' सभ हाथी के बोला के कहलस - 'देख लोग अब एह जंगल में त खाए-पिए के कुछु बाचल नईखे एह से हम चाहतानी कि तू लोग चारों ओर जा अवरू देख लोग की कतही पिए के पानी बा की ना’।

अपना सरदार के बात सुन सभ हाथी चारों देने पानी के तलाश में निकल गईले। बहुते खोजला के बाद कतही दूर एगो हाथी के पानी लउकल। उ हाथी तुरंत दउर के गजु पहलवान के ए बात के जानकारी दिहलस।

हाथी कहलस कि, एक जगह पानी के बड़का झील बाटे अवरू ओह जंगल में पेड़-पौधा बाटे, उ सभ पेड़ फल से लदाईल बा।

हाथी के बात सुन गजु पहलवान के बहुत खुश भईल। उ कहलस कि, अब हमनी के बिना देरी कईले ओह जंगल के देने चले के चाही।

गजु आपन झुंड के संगे ओ जंगल में चल दिहले। ओह जंगल में पानी अवरू फल-फूल पाके हाथी सभ के मन खुशी से झूम उठल। हाथी सभ के त खाये-पिये के आराम भ गईल बाकि खरगोश सभ प त आफत आ गईल। काहे से कि, ओह जंगल में खरोश के एगो बस्ती रहे। ओह बस्ती में बहुते खरगोश रहत रहसन।

भाई हाथी त बहुते बड़का जानवर होखेला, ओकरा आगा त खरगोश चींटी के बराबर बा। अब हाथी ओह जंगल में चलिहसन त ओकनी गोड़ से दबा के खरगोश के त जाने नु जाई। ऐह तरे कुछ खरगोश के जान तक चल गईल।

खरगोश सभ में ए बात के चलते बहुत बड़ चिंता के विषय बन गईल। उ सोचे लगलसन कि ऐह तरे एक-एक क के त सभकर जान चल जाई। एह से जान बचावे खाती कुछ-ना कुछ त करही के पड़ी।

हाथी से जान कईसे बचावल जाय ऐह खाती खरगोश’वन के एगो सभा भईल। ओह सभा में जवन सभले बड़ खरगोश रहे उ कहलस कि, केकरा में अतना हिम्मत बा कि उ हाथीयन के अत्याचार के बंद करवा सके........?

अतना बात सुनते एगो खरगोश उठ के आगा आईल आ कहलस कि, हम जाईब गजु पहलवान के भीरी खरगोश देने से दूत बन के अवरू आपन समस्या उनुका के सुनाईब।

ओह खरगोश के बात सुन सभ खरगोश ओकरा बात से सहमत भईले अवरू गजु पहलवान के भीरी भेज देले। खरगोश, हाथी के झुंड में चल त गईल बाकि सोचे लागल कि, अब गजु पहलवान के भीरी कईसे पहुंची? अगर गजु पहलवान के भीरी जातानी, त बीचे में कहीं हमार काम तमाम मत हो जाए।

सही भी रहे, काहे से कि गजु के भीरी पहुंचे खाती ओकरा सभ हाथी के गोड़ के नीचे से जाये के पड़ी। इहे सोच खरगोश एगो बहुते बड़हन पहाड़ प चढ़ गईल।

पहाड़ प खाड़ा होके ज़ोर से चिलाए लागल..... 'गजु पलवान' हम चंद्रमा के भेजल दूत हई। हम चंद्रमा के एगो सेंदेश लेके आईल बानी।

चंद्रमा के नाम सुन 'गजु.........खरगोश के बात ध्यान से सुने लागल, उ कहलस कि का कहला ह, तू चंद्रमा के दूत हव......? तू चंद्रमा के संदेश लेके आईल बाड़.......?

खरगोश कहलस...... ह...ह हम चंद्रमा के दूत हई। उ तहरा खाती एगो संदेश भेजले बाड़े। तू उनकर संदेश के ध्यान से सुन......।

तू आ तहरा झुंड के सभ हाथी चंद्रमा के झील के पानी गंदा क देले बाड़े। तोहन लोग ना जाने केतना खरगोश के तक के जान ले लेले बाड़। तोहन लोग के शायद इ मालूम नईखे कि चंद्रमा खरगोश के केतना प्यार करेले। ऐह से तोहन लोग से चंद्रमा खिसिया गईल बाड़े। तू लोग अब सावधान हो जा, नाही त चंद्रमा तोहरा के अवरू तहरा झुंड के सभ हाथी के जान से मार दिहे।

खरगोश के एतना बात सुन सभ हाथी डेरा गईले। उ डेराते-डेरात कहले कि तू हमरा के चंद्रमा के भीरी ले चल। हम उनका से आपन कईल अपराध के क्षमा मांग लेब।

खरगोश इहे त चाहत रहे। खरगोश कहलस हम तोहरा के चंद्रमा के भीरी ले त चलब बाकि हमार एगो शर्त माने के पड़ी......शर्त के बात सुन 'गजु' कहलस का बा तहार शर्त जल्दी बताव......

खरगोश कहलस, हमार शर्त कवनों बड़ नईखे...... बस शर्त इहे बा कि चंद्रमा के भीरी तहरा अकेले चले के परी ......।

गजु के त डर सतावत रहे, अब शर्त ना मनीहे एकर त सवाले नईखे बनत..... उ झट से खरगोश के शर्त मान लिहलस........।

पुर्णिमा के रात रहे, ए रात में आकाश एकदम साफ होखेला, जवना चलते जमीन तक के सभ कुछ साफ-साफ लउकेला। ओह राती के खरगोश 'गजु' के झील के किनारा ले गईल। झील के देने इशारा करत खरगोश कहलस, 'गजु' ल मिल ल चंद्रमा से।

पानी में पुर्णिमा के चाँद के परछाई साफ दिखाई देत रहे। 'गजु' सचमुच के चंद्रमा जान के माफी मांगे खाती जईसही आपन लमहर सुढ पानी मे डललस त झील के पानी हिल गईल जवना चलते चंद्रमा के परछाई लउकल बंद भ गईल।

अब चंद्रमा के ना लउकला से 'गजु' चिहा (अचरज) के बोल उठल "आरे, चंद्रमा काहा चल गईले.......?

खरगोश कहलस, हम कहत रनिह नु कि चंद्रमा तोहरा प खिसियाइल बाड़े। तू लोग उनकर पानी त गंदा कईए देले बाड़, साथे-साथ केतना खरगोश के भी जान लेले बाड़। हमरा त लागता ऐही से तोहरा से चंद्रमा मिलल नईखन चाहत।

फिर 'गजु' खरगोश के बात के सांच मान लिहलस। उ डेरा के कहलस, एकर कवनो उपाय बा की ना? हम चंद्रमा के खुश कईल चाहतानी.......?

खरगोश कहलस...... ह उपाय बाटे नु। तोहरा एगो काम करे के पड़ी। तू काल्ह होत बिहान अपने आ अपना झुंड के संगे ए जंगल से दूर चल जा। तोहरा प चंद्रमा बहुते खुश हो जईहे।

गजु पहलवान.... होत बिहान ओ जंगल के छोड़, अपना झुंड के संगे दोसरा जगह चल गईल।

ऐही से कहल गईल बा - शरीर बड़ होखला से बुद्धि ना ढेर होखे। देखी ओतना बड़ हाथी जईसन जानवर के खरगोश जईसन छोट जीव अपना बुद्धि से कइसे हरा देलस अवरू जंगल छोड़ के जाए प मजबूर क देलस।

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