तोरा लउकत नईखे कि हम नामाज पढ़तानी? आन्हर भईल बाड़े का

तोरा लउकत नईखे कि हम नामाज पढ़तानी? आन्हर भईल बाड़े का

बचपन से लेके अभी तक अकबर-बीरबल के कहानी त बहुत बेर सुने के मिलल होई, लेकिन ए कहानी के खूबी बा की एकरा में अकेले अकबर बाड़े, बीरबल नईखन। एक बेर अकबर के जंगल घुमे के मन कइलस अवुरु उ अकेले महल से निकल गईले।

जंगल में चलत-चलत नामाज पढ़े के समय भ गईल। अकबर के लगे एगो दरी रहे, जवना के उ तुरंत जंगल में बिछा के नमाज पढ़े लगले। अकबर नमाज पढ़त रहले कि कुछ दोसर काम करत रहले, इ त कहानी में पता आगे चली, फिलहाल मान लिही की नमाज पढ़त रहले।

बादशाह अकबर अभी नमाज पढ़ते रहले कि उहाँ एगो औरत अपना पति के खोजत आ गईल। उ औरत अपना पति के लेके अतना चिंतित रहे कि ओकर ध्यान अकबर के दरी प ना गईल आ उ अकबर के दरी प गोड़ धरत आगे बढ़ गईल।

अकबर जब औरत के अपना दरी प गोड़ धरत देखेले त गरमा गईले अवुरी ज़ोर से चिलइले –'तोरा लउकत नईखे कि हम नामाज पढ़तानी? आन्हर भईल बाड़े का? लउकत नईखे कि हम खुदा के बंदगी करतानी आ तू हमरा दरी प गोड़ ध के चल गईले।'

बादशाह अकबर के बात सुनके उ औरत एगो दोहा पढ़लस – 'नर राची सूझी नहीं, तुम कस लख्यों सुजान। पढि कुरान बौरे भयो, नहीं राच्यौ रहमान।'

औरत कहलस – 'हम त अपना पति के खोजे में बेहाल हो चुकल बानी अवुरी एहीसे हमार ध्यान रउआ दरी प ना गईल ह बाकी रउआ कईसन नमाज पढ़तानी कि खुदा के छोड़ दरी के चिंता कईले बानी?'

उ आगे कहलस, 'ई देखला से त बुझाता कि राउर ध्यान खुदा में कम, दरी प ढ़ेर रहे'। औरत के बात सुनला के बाद अकबर के अपना गलती के जानकारी मिलल अवुरी उ कहले कि अब से नमाज पढ़त घरी हमार समूचा ध्यान खुदा में रही।

ए कहानी के सार बस अतने बा कि जवन काम करी उ पूरा मन लगा के करी। चाहे पूजा-पाठ होखे भा दोसर कवनो काम।

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