होलिका पुजा के विधि अवूरी सावधानी, ना त हो सकेला नुकसान

होलिका पुजा के विधि अवूरी सावधानी, ना त हो सकेला नुकसान

होलिका दहन के मुहूर्त बाकी कवनो त्यौहार के मुहूर्त से जादे महवपूर्ण आ जरूरी बाटे। बाकी कवनो त्योहार में सही समय प पुजा ना कईला प ओ पुजा के लाभ ना मिले, लेकिन होलिका दहन सही मुहूर्त प ना कईला प फायदा से उल्टा नुकसान हो सकेला।

शास्त्र मे कहल बा की होलिका दहन फाल्गुन पुर्णिमा के दिन प्रदोष काल मे भद्रारहित समय मे करे के चाही, अयीसना मे बड़ा दुविधा हो जाला, समस्या होखेला की आखिरकार होलिका दहन कब होखे के चाही।

हिन्दू परंपरा के आगे बढ़ावेवाला एगो ग्रंथ 'धर्मसिंधु' मे एह समस्या के हल बतावल बा। एह ग्रंथ के मुताबिक भद्रा के चढ़ती मे कवनो कीमत प होलिका दहन ना करे के चाही, लेकिन जब भद्रा के उतरन होखे तब होलिका दहन कईला से भद्रा के दोष ना लागे।

शास्त्र मे मुताबिक भद्रा मे होलिका दहन कईला से प्रकृतिक आपदा अऊरी कष्ट आ सकेला, एहसे एकरा से बचे के चाही। भद्रा से बचे खाती पुजा से पहिले पंचांग के मदद लेवे के चाही अऊरी होलिका दहन के सही समय जाने के चाही।

होलिका दहन पूजन-विधि

हमनी के समाज मे होलिका दहन से पहिले पूजा करे के विधान बाटे। होलिका के पूजा करे के समय, पूजा करेवाला के पुरुब भा उत्तर दिशा मे मुंह क के बइठे के चाही। होलिका के पुजा मे फल-फूल, जल, मौली, अबीर अऊरी गुड़ आदि से प्रयोग होखेला। गोबर से बनल पिंडी अऊरी माला भी होलिका पूजन में इस्तेमाल होखेला।

होलिका पूजन मे एगो माला पितर के नाम के, दूसरकी माला हनुमान जी के नाम के, तीसरकी माला शीतला माता के नाम के आ चौथकी माला अपना घर-परिवार के नाम के होखेला। होलिका के कच्चा सुता से चारों ओर 3 से 7 बार परिक्रमा क के लपेटल जाला। सुता से लपेटला के बाद गंगा जल अवरू पुजा खाती आईल सभे समान के एक-एक क के होलिका के समर्पित क दिहल जाला।

होलिका दहन होखला के बाद होलिका में कच्चा आम, नारियल, मकई, सात तरह के धान/अनाज, गेहु के आहुती दिहल जाला। एह तरीका से बाउर ग्रह के शांति खाती नवग्रह के लकड़ी के मंत्रोच्चारण करत होलिका में अर्पण क दिहल जाला।

होलिका दहन मे गेहूं के बाल भूँजे भा सेके के चलन बाटे, अइसन मानल जाला की होलिका मे सेकल भा भुंजल बाल के घर मे छीट देवे से धन के बढ़ोतरी होखेला।

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