प्राकृतिक सुन्दरता के बीच अध्यात्म अवुरू आस्था के अनुभव लेवे खाती वाल्मीकि नगर चलीं

वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना वाल्मीकिनगर के आकर्षक बनावेला, जबकि पौराणिक महत्व आस्था जगावेला।

वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना वाल्मीकिनगर के आकर्षक बनावेला, जबकि पौराणिक महत्व आस्था जगावेला।

गर्मी में प्राकृतिक सुन्दरता के आनंद खाती बिहार के वाल्मीकि नगर एगो खास जगह हो सकता। बिहार में पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकि नगर वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना समेत जंगली जीव के मन मोह लेवे वाला दृश्य आ जैव पर्यटन खातिर मशहूर बा अवुरी एकरा चलते इहाँ पर्यटक खूब आवेले।

उत्तर प्रदेश, नेपाल अवरू बिहार के सीमा के नजदीक बसल वाल्मीकिनगर जिला मुख्यालय - बेतिया से 120 किलोमीटर दूर बा। अईसे त इहाँ सालो भर पर्यटक आवेले, लेकिन गर्मी में पर्यटक के संख्या बढ़ जाला।

पर्यटक इहाँ के सूर्योदय अवरू सूर्यास्त के देखे खातिर लालाइल रहेले। पहाड़, नदी, झरना के अलावे दुर्लभ जंगली जीव से भरपूर ए इलाका के प्रकृतिक सुंदरता के शब्द में बतावल मुश्किल बा। बड़ शहर से आवे वाला पर्यटक खातिर इहाँ के जंगल में विचरत जानवर के देखल अद्भुत अनुभव होखेला।

बिहार के 'वाल्मीकि नगर व्याघ्र परियोजना' क्षेत्र अवरू नेपाल के चितवन पार्क अगल-बगल में बा। जादे सही इ होई कि दुनु एकही जंगल के 2 हिस्सा ह अवरू दुगो देश के बंटा गइला से अलग-अलग नाम से मशहूर बा। हालांकि इहाँ आवे वाला पर्यटक ए दुनु पार्क के आनंद लेवेले।

पटना से करीब 270 किलोमीटर दूर वाल्मीकि नगर में रहे खातिर वन विभाग के रेस्ट हाउस अवरू इको हट बा। करीब 880 वर्ग किलोमीटर में पसरल वाल्मीकि वन क्षेत्र के 530 वर्ग किलोमीटर जमीन के व्याघ्र परियोजना घोषित कइल बा। इहाँ एक ओर बड़े-बड़े पहाड़ देखाई देवेला त दोसरा ओर झरना अवुरी नदी बाटे।

वाल्मीकि नगर के नजदीकी रेलवे स्टेशन बगहा बा, जवन कि मुजफरपुर-गोरखपुर रेल लाइन के एगो प्रमुख रेलवे स्टेशन ह। बगहा से वाल्मीकि नगर जाये खातिर बस अवरू प्राइवेट टैक्सी हरदम मिलेला। हालांकि टैक्सी चाहे निजी गाड़ी से ए इलाका के भ्रमण कईल अलग अनुभव दिही आ सड़क प बंदर के उछलत-कूदत झुंड के नजदीक से देखे के मिली।

एकरे से सटल नेपाल के चितवन पार्क के एकदम घना जंगल बाटे अवुरी एकरे में महर्षि वाल्मीकि के आश्रम बा। मानल जाला कि लंका से अईला के बाद जब सीता मईया अयोध्या के छोड़ली त एही जंगल में रहत रहली अवरू लव-कुश के जन्म एहिजे भईल रहे।

नेपाली वास्तुकला से परिपूर्ण माता जानकी अवरू वाल्मीकि ऋषि के आश्रम देख के लोग मंत्रमुग्ध हो जाले। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना अवुरी चितवन पार्क के के अलावे इहाँ के दोन, गोवर्धना, सोमेश्वर पहाड़ी, भिखना ठोढ़ी जइसन जगह भी निहारे लायक बा। बस जरूरत बा कि एक बेर व्यस्त जीनिगी से छुटकारा लिही, ठंडा हवा अवरू पेड़-पहाड़ के बीच छुट्टी के बीतवे के आनंद के अनुभव करी।

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