ठेठ आ पारम्परिक गीत ना होई त हम नईखी गा सकत - शारदा सिन्हा

लीलार प लाल बिंदी, होठ पर लाल रंग के लिपस्टिक अवरू मुंह में पान, इहे असली रंग ह भोजपुरी के स्वर देवी गायिका शारदा सिन्हा जी के। शारदा जी भी खाली समय में घर के कुल काम करेली, घरे आईल मेहमान के चाय बनाके देवे से लेके खाना बनावे तक।

रांची में जनमल आ मैथली परिवेश मे पलाईल-पोसाईल शारदा जी के ख्याति आ सम्मान मिलल भोजपुरी से, लेकिन शारदा सिन्हा जी के खाली समय अजूओ आदिवासी गीत सुने मे बीतेला। सफलता के घमंड आ गरूर से कोसो दूर रहेवाली शारदा जी से मिलला के बाद कबो इ अहसास ना होई की इ उहे आदमी ह जेकरा के देखे सुने खाती हजार-लाख लोग के भीड़ खड़ा रहेला।

शारदा सिन्हा पहिले भी भोजपुरी के पारंपरिक लोकगीत ही गावत रहनी आजो उहाँ के उहे गावत बानी। शारदा जी से जब एह विषय मे पूछाईल त कहनी – “पारंपरिक आ ठेठ लोकगीत के गावे के पीछे एगो मकसद बा। मकसद बा की इ कुल गीत हमनी आवे वाला पीढ़ी खाती सुरक्षित रहे”।

आज लोकगीत मे टैलेंट शो आ भोजपूरी मे फिल्म निर्माण के बाढ़ आ गइल बा लेकिन एह सबसे अछूता शारदा जी के स्वर आ सुर, दुनों अभियो महेंद्र मिशिर के गीत मे बसेला। आज सभ केहु जल्दी से स्टार बन गइल चाहता, देखा देखि अश्लीलता परोसे के माहौल बन गइल बा, अइसना मे शारदा जी के मन तनिका सा विभोर हो जाता, आँख लोरियाए लागता।

शारदा जी से जब आज के वर्तमान समय के बारे मे पुछल गइल त कहली – “आज-काल्ह के जवन लईका-लईकी टैलेंट शो मे आवत बाड़े’सन ओकनी मे हमरा बहुत संभावना लउकता, बस डर एकही बाटे की इहो सभ बकिए लोगन के देखा देखि मत करे लागस। अश्लीलता के फॉर्मूला एह लोग के स्टार त बना दिही लेकिन काला के उमर कम क दिही”।

बातो ठीक बा, हमनी के आँख से सोझा पिछला पाँच-सात साल मे कतने गायक अईले आ गईले। नाम लिहल ठीक ना रही ना त आइसन बहुत लोग बाड़े जीनिकर पहिला एल्बम के बाद दुसरका एल्बम के पाता नईखे।

शारदा जी कहली की उ आज कम काम करत बाड़ी, लेकिन एकर मतलब इ नईखे की उ काम कईल छोड़ देले बाड़ी। शारदा जी कहली – “देखीं, हम कवनो फॉर्मूला भा भेड़चाल मे ना परी, हम काम अपना शर्त प करेनी। अगर गीत हामरा ना पसन पड़ी त हम उ गाना ना गाईब, हमरा के हमार समाज एगो जीमवारी देले बा, हम करोड़ो लोग के उम्मेद नईखी तुर सकत। अगर हमहू उहे सभ करब त लोग कहिहे के हमहू बहक गईनी। रहल बात भोजपुरी सिनेमा के त, इहाँ हम साफ कईल चाहब की हम आज के भोजपुरी सिनेमा से ताल नईखी बईठा पावत”।

शारदा जी कहली की आज के सभे निर्माता, गीतकार, संगीतकार, गायक आ श्रोता लोकगीत के ट्रक मे बाजे वाला संगीत के रूप दे देले बाड़े, मौलिकता खतम हो चलल बा, केहु के अब एकरा से मतलब नईखे।

अश्लीलता प बिहार कोकिला के कंठ से कुछ अइसन निकलल – “भोजपुरी संगीत के अश्लील बनावे मे कलाकार,बाजार,गीतकार, श्रोता समेत सभे केहु के हाथ बाटे। कुछ लोग के त हालत अइसन बा कि उ लोग गांव-जवार के पारंपरिक लोकगीत के भी आपना नाम दे देतारे। कुछ लोग अइसन बाड़े जे अइसन गीत लिखत बाड़े की सभे कुछ बाजारू हो जाता। हाँ, संगीत कंपनी के ओर से भी दबाव बा, कंपनी के चाह बा की कुछूओ गाव लेकिन उ हिट होखे के चाही। अइसना मे नाया गायक के हालत त हम समझ सकत बानी लेकिन श्रोता लोग भी अइसने चाहत बाड़े, ना त कवनो ना कवनो प्रतिक्रिया जरूर होइत”।

आज के हिन्दी सिनेमा मे लोकगीत के खास जगह मिलता लेकिन एकरा मे भी भोजपुरी पिछड़त बाटे। शारदा जी एह पिछड़ाव के भी कारण बतवली – “अगर भोजपुरी के लोकगीत के जरूरत भर सम्मान नईखे मिलत त एकर कारण भी हमनिए के बानी जा। आज जब हमनी के गायक हमनी के लोकगीत नईखे गावत त दोसर हमनी के गीत के बारे मे कईसे जानी”।

रांची मे जनमल आ मैथली परिवार से संबन्धित शारदा जी के ख्याति आ सम्मान मिलल भोजपुरी से, लेकिन उनुका सबसे प्रिय कवन भाषा लागेला? एह सवाल के जवाब मे शारदा जी कहनी – “देखीं, गीत-संगीत के स्तर प त हम आदिवासी लोकसंगीत आ झारखंड से ढेर नजदीक बानी। हमरा नागपुरी मे बोलल-बतियावल, गीत सुनल बहुत निक लागेला”।

शारदा जी के जनम से ही गायकी के क्षेत्र से लगाव रहे लेकिन पारिवारिक पाबंदी ओह कलाकार के उभरे ना देत रहे। हाल त तब अवरू खराब हो गइल जब इहाँ के बियाह भईल, बियाह क शारदा जी जब ससुराल अईली त पहिला झटका सास देली, शारदा जी के सास कहली की इ गाना गावल छोड़, इ काम ठीक नईखे, लेकिन बाद मे उहे सास जब शारदा जी के गावत सुनली त अपने से गीत खोज खोज के इनिका से गवा के सुने लगली।

आज शारदा सिन्हा जी के हमनी के बिहार कोकिला, बिहार के लता मंगेशकर, मिथिला के बेगम अख्तर, बिहार के सांस्कृतिक प्रहरी, लोक कोयल अवरू ना जाने कतने नाम से जानेनी’जा, इहाँ के स्वर जब गुंजेला त आत्मा तृप्त आ चित प्रसन्न हो जाला।

लेकिन शारदा जी केकरा से सुनेनी? एह सवाल के जवाब मे शारदा जी कहनी – “हम बचपन से लता जी के सुनत आवतानी, हम बचपन से बड़ होखे तक ना जाने कतने चिट्ठी लता जी के लिखले होखब, का पता उ चिट्ठी लता जी के मिलतो रहे की ना। लता जी के अलावे पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, गुलाम अली खां साहब, बेगम अख्तर के गीत-संगीत हमरा निक लागेला। एह लोग के अलावे शोभा गुर्टू के भी हम बहुत बड़ प्रशंसक बानी, इहाँ के संगे त हम शो भी कईले बानी, लेकिन उ मुलाक़ात अभी अधूरा बाटे”।

शारदा जी के सपना बा की उ एगो संगीत के स्कूल खोलस, अइसन स्कूल जहां छोट-छोट लईकन के उ पढ़ा सकस। शारदा जी के इच्छा बा की स्कूल अइसन होखे जवना से निकलेवाला बच्चा भेड़चाल आ केहु के बहकावा के बचल रहे आ ओकरा आपना माटी से लगाव होखे।

स्कूल के अलावे शारदा जी के लता जी से आमने सामने भेंट करे के भी बा, शारदा जी के इच्छा बा की जीवन मे एक बेर लता जी से मुलाकात हो जाईत आ उनुका से पूछ लेती की हमार चिट्ठी उनुका मिलत रहे की ना

अब शारदा जी के लता जी से भेंट करे के इच्छा पूरा कईल त हमनी के बस मे नईखे लेकिन ऊपर बइठल ईश्वर से इ कामना जरूर बा की शारदा जी के स्कूल जरूर खुले।

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