भोजपुर के रितिका मातृभूमि के सेवा करे खाती 32 लाख के वेतन के ठोकर मार देली

आरा – बिहार के भोजपुर (आरा) जिला हरमेसा से अईसन लोग के जन्मस्थली रहल बा जे अपना मातृभूमि के सेवा के आगे दुनिया के सभ सुख अवरू आराम के ठोकर मार सकता। बीर कुँवर सिंह, वशिष्ठ नारायण सिंह अवरू अब एहमे एगो अवरू नाया नाम बा रीतिका सिंह।

रीतिका मातृभूमि से जुड़े खाती सिंगापूर के एगो कंपनी के 32 लाख सालाना वेतन वाला नौकरी छोड़ देली। सिंगापूर के एगो कंपनी में कानून विशेषज्ञ के तौर प काम करेवाली रीतिका अब बिहार सरकार के व्यापार कर विभाग में आपन सेवा दिहे।

कुछ समय पहिले भईल बीपीएससी के परीक्षा में 29 साल के रीतिका पूरा राज्य भर में 16वा स्थान प आइल बाड़ी। राष्ट्रीय छात्रवृति प्राप्त रीतिका सिंगापूर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से LLM के पढ़ाई कईले बाड़ी।

भोजपुर जिला के अगियाव गाँव के रहेवाली रीतिका से सिंगापूर में फोन प भईल ख़ास बातचीत में कहली – “चुकी सिंगापूर में विदेशी मूल के लोग के वकालत करे के अधिकार नईखे एहसे हम एगो कंपनी में कानून अवरू बाजार विशेषज्ञ के नौकरी करे लगनी, लेकिन हमार मन हरमेस बिहार में लागल रहे। बिहार लवटे के हमार फैसला ओह लोगन के श्रद्धांजली होई जे हमरा के जाने अंजाने में अपना लोग खाती काम करे के प्रति उत्साहित कईले।”

रीतिका खाती बिहार लवटे के फैसला कईल आसान ना रहे, अपना फैसला के बारे में रीतिका कहली – “हमार बिहार लवटे के फैसला के बाद हमरा अपना पति से अलगा रहे के पड़ी, हमार पति भी हमरे कंपनी में नौकरी करेले। लेकिन सभके बाद हमनी के, दुनों आदमी बिहार अवरू बिहार के लोग के सेवा करे के इच्छा राखेला”।

सीबीआई से अवकास प्राप्त रवीद्र नाथ सिंह के बेटी रीतिका सिंह के बियाह साल 2011 में बीआईटी (मेसरा) से पढल मनीष प्रकाश के संगे भईल बा।

पटना के बेली रोड स्थित केन्द्रीय विद्यालय से बारह तक के पढ़ाई करेवाली रीतिका बीएचयू से भूगोल में स्नातक कईली अवरू इहें साल 2006 में इनिका राष्ट्रीय छात्रवृति मिलल।

रीतिका कहली – “छात्रवृति के बाद हम अवरू कठोर परिश्रम करे खाती प्रोत्साहित भईनी, जेकरा नतीजा में हम पीजी के सभ प्रवेश परीक्षा बहुत आराम से पास क गईनी। हम जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में 14वा स्थान, दिल्ली स्कूल ऑफ इक्नोमिक्स में 12वा अवरू बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के परीक्षा में 24वा स्थान पवनी”।

बिहार सरकार के अंतर्गत सेव करे खाती तयार रीतिका के कहनाम बा – “हमरा माई-बाबूजी, गुरु अवरू समाज से जवन शिक्षा मिलल बा ओकरा से हम आज इ कहे के स्थिति में हम आपन जीमवारी के पूरा ईमानदारी अवरू कर्तव्यनिष्ठा से निभा पाईब”।

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