गोधन के गीत | गोधन अईले अगुताईल हो

गोधन के गीत | गोधन अईले अगुताईल हो

गोधन अईले अगुताईल हो
का ले बईठे के दि
चन्दन काठ के पीढ़ईया नु हो
उहे ले बईठे के दि

साठी कुटी भात रिन्हब हो
तहि पर मूँगिया के रे दाल
मन भरि जेवहु गोधन हो
हिय भरि देहु आशीष

बथान रउआ बढावहूँ कवन बाबु हो
बहु तोर पुतवे जुड़ास
अन्न धन बढ़ो सम्पतिया नु हो
जुगे जुगे रह एहवात

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