जय जय होला माई मंदिरवा कि पुरुब के ओरिया

जय जय होला माई मंदिरवा कि पुरुब के ओरिया
शंख गूँजे घंटी गूँजे माई मंदिरवा कि पुरुब के ओरिया ।

अड़हुल फुलवा से सजेला दुअरिया
अछत चंदन से भरल थरियवा
गम-गम गमकेला माई मंदिरवा कि पुरुब के ओरिया।

निमिया के डढ़िया प लागल माई के असनवा
मीठी-मीठी बहेला पूरबी बयरिया
उतरेली धीरे से माई हमरो अंगनवा कि पुरुब के ओरिया।

माई के भावे ला रोजे अड़हुल फुलवा
भक्त करेले कर जोरि के पुजनवा
होखेला भजन रोजे माई मंदिरवा कि पुरब के ओरिया।

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