1000+ भोजपुरी के कहाउत अवुरी मुहावरा: क्रमांक 901 से लेके 950 तक

901. सब धन शुकुल के, शुकुल के मोल कुकुर के।
902. सब रमायन बीत गइल, सियाजी के बिआह कब भइल, पते ना।
903. सबके दुलार महतारी के हँकार।
904. सर गल जइहें, गोतिया ना खइहें, गोतिया के खाइले अकारथ जइहें।
905. सरल गाय बाभन के दान।
906. सरसो गिरहस्थ के, निहाल भइले तेली।
907. सरसो तरहथी पर, पेरऽ तेल, तब देखऽ जवानी के खेल।
908. सराहल बहुरिया डोम घरे जाली।
909. सहर में गाली, गली में माँफी।
910. सहर सिखावे कोतवाल।

911. साँच के सोर पाताल में ।
912. साँच में आँच का?
913. साँझे गइली पराते अइली।
914. साँप ना खोने बिअर, कोइरी ना बसे दीअर।
915. साठा त पाठा।
916. सात बेर सतुअन, भतार के आगे दतुअन।
917. सात भतार सतबरता एक कइली गंड़गहता।
918. सात मूस खा के बिलाई भइली भगतिन।
919. सात सेर के सात पकवली, चौदह सेर के एके, उ मुंहझौसा सातो खइलऽस, हम कुलवंती एके।
920. सातू के पेट सोहारी से भरी? (सोहारी - नाश्ता)

921. साधु-सजन के फुटहा दुलम, बेसवा फारे साडी।
922. साल के दूसाल बांस कटाले।
923. सावन भादो से दूबर?
924. सावन सधे दूना लाभ।
925. सावाँ सोहले मूर्ख सरहले।
926. सास के डरे जुदा भइली, ननद परली बखरा।
927. सास जो बोलि त घींच मारेब मूसर।
928. सास ना ननद, घर आनंदे-आनन्द।
929. सास बाड़ी कूटत, पतोह बाड़ी सूतल।
930. सास भइली खुश त भूसी के लगवली लिट्टी।

931. सास मांगस पानी, ढंकेल द रुँखानी।
932. सास मोर अन्हरी, ससुर मोर अन्हरा, जेकरा बियाह भईल उहो चक्चोन्हरा, केकरा के देखाई हम आपन कजरा।
933. सास रुसस त करि का? लुगरी छोड़ के पहिरी का?
934. सासु से टेढ़ी पगहिया से मेरी।
935. सियरा के मन बसे कंकरी के खेत में।
936. सीता के दिन वियोगे में बीत गइल।
937. सील के लोढा करे बड़ाई, हमहूँ सभके भाई।
938. सुअर के लिद्द, लिपे के ना पोते के।
939. सुकवार बहुरिया के माझा ढील। (माझा - जांघ )
940. सुखला सावन भरला भादो।

941. सुघा के मुंह कुकुर चाटे।
942. सुधा बहुरिया के घुंघ तर साँप बिआले।
943. सुन ए माटी के लोला, कायथ, सोनार कहीं भगत होला?
944. सुनते साख ना पूछ्ल जाला।
945. सुरहा ताल के मछरी, तिनफेड़िया के आम, पकड़ी तर के बइठल, छोड़ देले राम।
946. सूई ना समाय तहाँ फार घुसिआय।
947. सूद के पैसा दोबर ना त गोबर।
948. सूप के पिटला से ऊँट भागी?
949. सेमर के फूल देखि सुगना लोभइले, मरले ठोर भुआ उड़ि गइले, सुगना हो! इ मन पछ्तइले।
950. सेर जागे, सवैया जागे छटंकी के छटपटी बरे।


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