80,000 करोड़ से जादा रुपया अपना दावेदार के राह ताकता, लेकिन केहु के जरूरत नईखे!

नई दिल्ली – देश में हमेशा पईसा के कमी के रोना रोवल जाला लेकिन एकरे संगे बीमा कंपनी, बैंक, म्यूचुअल फंड्स अवुरी डाकघर में करीब 37,500 करोड़ रुपया अयीसन परल बा जवना के केहु लेवे वाला नईखे।

डाकघर, बैंक अवुरी तमाम सावर्जनिक बचत योजना में जमा रकम के संगे अगर कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के जोड़ दिहल जाए त करीब 64,000 करोड़ रुपया अयीसन बा जवना के केहु लेनदार नईखे।

फिलहाल कर्मचारी भविष्यनिधि में जमा करीब 26,497 करोड़ रुपया के केहु दावेदार नईखे। इहाँ ध्यान देवे के बा कि इ असल जमा राशि ह एकरा प अभी ब्याज नईखे जोड़ल।

एकरा अलावे अपुष्ट जानकारी के मुताबीक, सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) में भी करीब 22,000 करोड़ रुपया अयीसन बा जवन कि पछिला कई साल से अपना लेनदार के राह ताकता, माने एकरो के केहु पुछे वाला नईखे।

सूचना के अधिकार कानून के तहत मिलल जानकारी के मुताबीक, इन्दिरा विकास पत्र में समय सीमा पूरा भईला के बाद करीब 896 करोड़ रुपया प केहु दावेदारी करेवाला नईखे।

बैंक, डाकघर, बीमा कंपनी अवुरी भविष्य निधि निहन जगह बिना दावेदार के परल हजारों करोड़ के पाता लगावे खातिर तीन महिना पहिले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के अगुवाई में एगो कमेटी बनावल गईल। कमेटी से पुछल बा कि उ पाता लगावे के कतना पईसा बिना लेनदार के परल बाटे।

कमेटी 31 दिसम्बर तक आपन रिपोर्ट पेश क बताई कि देश के वित्तीय संस्थान में केतना पईसा अयीसन बा जवना के केहु लेवे वाला नईखे।

डाक घर के बाद बिना लेनदार के सबसे जादा पईसा बीमा कंपनी के भीरी बाटे। जाहाँ सरकारी कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम के भीरी 1,548 करोड़ रुपया बा त कुछ समय पहिले बीमा सेवा शुरू करेवाली रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस के भीरी 1,502 करोड़ रुपया बा। ए दुनो कंपनी समेत कुल 5,849 करोड़ रुपया बीमा क्षेत्र के कंपनी के भीरी बिना लेनदार के परल बाटे।

बीमा, अवुरी डाकघर के बाद तीसरा स्थान प बैंक बाड़े। सभ बैंक मिलाके कुल 5,125 करोड़ रुपया अयीसन बा जवन कि अपना लेनदार के राह ताकत-ताकत थाक गईल बा।

म्यूचुअल फ़ंड, शेयर डिविडेंड, डिबेंचर अवुरी कॉर्पोरेट जमा मिलाके कुल 4,200 करोड़ रुपया के केहु लेनदार नईखे।

अगर एक योजना के बात कईल जाए त सबसे जादा पईसा कर्मचारी भविष्य निधि में बिना दावेदार के बाटे। कर्मचारी भविष्य निधि के बंद खाता में करीब 26,496 करोड़ रुपया अयीसन बा जवना के 3 साल या एकरा जादा समय से केहु पुछत नईखे।

इहाँ इहों जानल रुचिकर होई कि 2011 में बनल एगो कानून के मुताबीक बैंक, डाकघर, कर्मचारी भविष्य निधि जईसन जगह प बंद भईल खाता में ब्याज ना जोड़ल जाए।

अब ए स्थिति में 8.5% वार्षिक दर से भी ब्याज के जोड़ल जाए त ए पईसा प हर साल करीब 5,500 करोड़ ब्याज के नुकसान होखता।

अगर आपके भी कवनो खाता अयीसन होखे जवना के सुध आप पछिला 3 साल में नईखी लेले त तुरंत संबंधित बैंक/डाकघर/बीमा कंपनी/ या अधिकारी से संपर्क क उचित दस्तवेज के संगे ओकरा के सक्रिय कराईं।

याद रखे बैंक खाता से पईसा निकलला प सक्रिय होखेला ना कि जामा कईला प।

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