दिल्ली चुनाव भाजपा खातिर अतना जरूरी काहें बा? चुनाव हारे से अतना डर काहें बा?

दिवाकर राय
अतिथि स्तंभकार


दिल्ली चुनाव में हार से भाजपा अतना डेराईल काहें बिया? चुनाव में हार-जीत त लागल रहेला, चार राज्य में जीत मिलला के बाद अगर एक राज्य, राज्य कहल भी गलत बा, एगो शहर हाथ से निकल जाए त का हो जाई?

दिल्ली, कानूनी रूप एकदम असहाय जगह, अयीसन जगह जहां पुलिस के एगो सिपाही के डांटे के अधिकार मुख्यमंत्री भीरी नईखे, अयीसन जगह जवन अपना जमीन के फैसला खुद नईखे कर सकत, हर बड़ फैसला के अनुमति केंद्र सरकार से लेवे के होखेला, एकरा बावजूद भाजपा खातिर दिल्ली में हार, सिर्फ दिल्ली में हार ना होई, बालुक पूरा देश के राजनीति में एगो नया अध्याय होई।

भाजपा के पहिला बड़का चिंता विपक्ष से जुडल बा। लोकसभा चुनाव में बरियार जीत, ओकरा बाद लगातार तीन राज्य में सरकार अवुरी चउथा में एतिहासिक कामयाबी, ए सभके चलते विपक्ष के आवाज़ लगभग दब गईल।

लेकिन, दिल्ली में अगर अरविंद केजरीवाल के सरकार बनतिया त मोदी विरोधी सुर के बल मिली। उ विरोधी सुर जवन दोसरा पार्टी के अलावे खुद भाजपा में भी मौजूद बा।

एक समय मोदी जेकरा के 'AK-49' कह के संबोधित कईले, उहे आदमी 'मोदी लहर' के खिलाफ सबसे घातक हथियार साबित होखे लागल। संगही, अमित शाह के माथा से राजनीतिक के चाणक्य वाला ताज भी खतरा में पर गईल बा।

अरविंद केजरीवाल से सीधा-सीधा लड़ाई अवुरी इहाँ हार के स्थिति में भाजपा उत्तर प्रदेश अवुरी बिहार जईसन राज्य में कमजोर होई। पार्टी के हिम्मत कमजोर होई, मारक क्षमता प असर परी।

महाराष्ट्र, हरियाणा अवुरी झारखंड में भाजपा के प्रमुख लड़ाई काँग्रेस से रहे, जबकि दिल्ली में काँग्रेस नाममात्र के रह गईल बिया, बिहार-उत्तर प्रदेश में त नाम लेवे वाला भी खोजे के परी।

काँग्रेस के खिलाफ त भाजपा जीत रहल बिया लेकिन जहां काँग्रेस नईखे उहाँ पार्टी के परेशानी हो सकता। एही साल बिहार में विधानसभा चुनाव होखे के बा, उहाँ लड़ाई नीतीश अवुरी लालू के बरियार जातिगत गठबंधन से बाटे। अगर लालू-नीतीश लोकसभा चुनाव के समय भी संगे रहिते त शायद भाजपा के मिलल सीट के आंकड़ा कुछ अवुरी रहित।

बिहार के दुनो दल दिल्ली के नतीजा प नज़र राखता, दिल्ली में केजरीवाल के रणनीति प नज़र राखता। तय बा कि 10 तारीख के जवन नतीजा आई, उहे राजद-जदयू के अपना रणनीति में जगह पाई। ए सभके अलावे, दिल्ली में बिहार से आईल अवुरी बिहार से जुडल मतदाता के बहुत जादा संख्या बिहार में असर डाली।

आम आदमी पार्टी अगर दिल्ली में सरकार बनाई त सीधा मतलब निकली कि मोदी के नाक के नीचे, उ जनता जवन कि 8 महिना तक मोदी शासन में रहे, मोदी से खुश नईखे।

एगो अवुरी खतरा बा, एगो बरियार राजनीतिक विरोधी आपके नाक के नीचे सरकार चलाई। भाजपा अवुरी काँग्रेस के नेता निजी बातचीत में कबूल करतारे कि, अरविंद केजरीवाल के "धरना राजनीति" से ए लोग के डर लागेला। खतरा रहेला कि, एक मिनट में इ आदमी आपके बेनकाब या बदनाम क दिही।

ओने, नाया-नाया राजनीति में आईल अरविंद केजरीवाल अवुरी उनुका पार्टी के नेता अपना खेल के नियम अपने तय करेले, उ ओ राह प ना चलस जवना प अवुरी पार्टी चलेली। अरविंद केजरीवाल अवुरी उनुका पार्टी के ज़्यादातर नेता "तुनक मिजाजी" मतलब हबड़-तबड़ में फैसला करे वाला बाड़े। जेकरा से फैसला लेवे में देरी के संभावना कम रह जाता। नतीजा में फैसला जल्दी होई, निमन चाहे बाउर ओकर असर भी जल्दी होई।

भाजपा के एगो अवुरी बड़का डर बा कि अगर कवनो मुद्दा प अरविंद केजरीवाल के रोकल गईल त उ फिर से "धरना राजनीति" प उतर जईहे, जवन कि भाजपा फिलहाल नईखे चाहत।

अरविंद केजरीवाल के सरकार बनला के स्थिति में भाजपा के सबसे बड़ खतरा पार्टी के भीतर मोदी विरोधी सुर के बल मिलला के बा। पार्टी के कुछ नेता, जवन कि मोदी-शाह युग में किनारा खाड़ा बाड़े, फिर से हावी होखे लगिहे, एकजुट देखाई देवे वाली भाजपा फिर से छितराए लागि। मोदी लहर अवुरी सुनामी निहन शब्द खातिर भाजपा के राजनीति में जगह ना रह जाई।

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