सेवक के महानता के सोझा मालिक के माथा झुक गईल

आधा रात के राज केहु के रोवे के आवाज़ सुनले, ओकरा बाद जवन भईल, तवन राजा के सोचे प मजबूर क देलस।

आधा रात के राज केहु के रोवे के आवाज़ सुनले, ओकरा बाद जवन भईल, तवन राजा के सोचे प मजबूर क देलस।

कवनों नगर में शूद्रक नाम के एगो राजा रहले। एकबेर ओ राजा के राज्य में सुरवीर नाम के एगो राजकुमार अईले। सुरवीर, राजा के दरवाजा प जाके द्वारपाल से कहले, 'हम राजा के बेटा हई, हम नोकरी के तलाश में आईल बानी। हमरा राजा से मिले के बा।'

द्वारपाल राजा के जाके सुरवीर के दिहल जानकारी सुनवलस। राजा के आज्ञा से उ सुरवीर राजा से मिलले। राजा से मिलला प सुरवीर कहले कि, "महाराज हमरा के नौकरी प राख़ लीही।"

राजा - बाकी सब त ठीक बा लेकिन तू तहरा वेतन कतना चाहीं?
सुरवीर - रोज पाँच सौ मोहर हमरा के चाहीं।
राजा - तोहरा भीरी अयीसन का बा जेकरा चलते तहरा के एतना पईसा दिहल जाए?
सुरवीर - हमरा भीरी दु गो हाथ अवुरी तिसरका तलवार बाटे।
राजा - तब त बात ना बनी।

अतना सुन के सुरवीर उहाँ से उठ के चल गईले। सुरवीर के गईला के बाद राजा के मंत्री कहले, 'महाराज चार-पांच दिन तक रोज पाँच सौ मोहर देके नौकरी प राख़ लेबे के चाहत रहे। पता चल जाईत कि ए राजकुमार सुरवीर में कवन खूबी बा।'

मंत्री के बात सुनला के बाद राजा सुरवीर के बोलवले अवुरी पांच सौ मोहर देके नौकरी प राख़ लिहले। सुरवीर राजा के नोकरी करे लगले अवुरी राजा लुका के उनुका प नज़र राखे लगले।

राजा, सुरवीर के पांच सौ मोहर दैनिक वेतन के नौकरी प राख़ लिहले। सुरवीर राजा के नोकरी करे लगले अवुरी राजा लुका के उनुका प नज़र राखे लगले। राजा उनुका हर काम प नज़र राख़, जानल चाहत रहन कि, 'आखिर एकरा में कवन खूबी बा?'

सुरवीर, राजा से मिलेवाला मोहर में से कुछ हिस्सा भगवान के चढ़ावस, कुछ हिस्सा ब्राह्मण लोगन के दान में देस, कुछ हिस्सा गरीब-दुखिया में बांट देस, एकरा बाद जवन बाचे उहे अपना प खर्चा करस।

एक बेर कृष्णपक्ष के चौदस के दिन, रात के राजा के बहुत दर्द भरल रोवाई सुनाई देलस। राजा रोवाई के आवाज़ सुन, अपना पहरेदार के बोलवले। राजा के आदेश प सुरवीर उनुका भीरी पहुंचले।

राजा, सुरवीर के आदेश देले कि, 'पाता कर, के अतना दुखी होके रोवता?' राजा के आज्ञा प सुरवीर रोवेवाला के पता लगावे चल देले। एने सुरवीर रोवेवाला के पाता लगावे जात रहले, ओने राजा सोचत रहले – 'हम ए अन्हरिया में सुरवीर के भेज गलती क देले बानी, हमरा अयीसन ना करे के चाहत रहे।'

इहे सोच, राजा हाथ में तलवार लेले सुरवीर के पीछा-पीछा चल देले।

सुरवीर जब रोवाई के आवाज़ सुन ओ जगह प पहुंचले त देखले कि, एगो बहुत सुंदर नारी सज-सँवर, गहना-गुरिया पहीर के बईठल बिया। सुरवीर ओकरा से पुछले – 'तू के हऊ? काहें रोवत बाडु?'

सुरवीर के सवाल के जवाब देत उ औरत कहलस – 'हम ए राज्य के राजलक्ष्मी हई। बहुत दिन तक हम इहाँ सुख-आराम से रहत रहीं, लेकिन अब दोसरा जगह जाए के पडी।'

सुरवीर कहले, 'सवाल होखेला, त जवाब भी होखेला। तू इहें रह, एकरा खातिर का करे के पड़ी, उ बातव।'

राजलक्ष्मी कहली, 'हमरा के इहाँ राखे खातिर तहरा अपना बत्तीसो गुण संपन्न बेटा, शक्तिधर के सर्वमंगला देवी के सोझा बलि देवे के पड़ी।' अतने क़हत उ औरत उहाँ से गायब हो गइल।

औरत के गायब होखला के बाद सुरवीर अपना घरे पहुंचले। उ अपना पत्नी अवुरी बेटा के घटना के जानकारी देले, उनुकर बात सुनला के बाद उनुकर बेटा खुशी से बोललस, 'हमार पिता जेकर सेवक होखस, ओ राज्य अवुरी राजा के रक्षा क हम धन्य हो जाईब, एहसे हे पिता जी बिना देरी कईले, चलीं चलल जाए।'

शक्तिधर के महतारी अवुरी सुरवीर के पत्नी कहली, 'एक दिन त सभके मरे के बा, अगर कवनों नेक काम क के मरल जाई, त एकरा से निमन का होई?'

सुरवीर आपन पत्नी अवुरी बेटा के लेके सर्वमंगला देवी के स्थान प पहुँचले। उहाँ सर्वमंगला देवी के पूजा क सुरवीर कहले, 'हे देवी, खुश होखी, हमार ए भेंट के स्वीकार करीं।' अतने क़हत उ अपना बेटा के मुड़ी काट देले।

बेटा के बलि के बाद पुत्रमोह में व्याकुल सुरवीर आपन गर्दन भी अपने काट लेले। बेटा अवुरी पति के कटल मुड़ी देख, सुरवीर के पत्नी भी आपन सिर काट लिहली।

पूरा परिवार के राज्य खाती मुड़ी काटा देला के दृश्य देख राजा अचरज में पर गईले, सोचे लगले, 'हमरा निहन त बहुत आदमी ए संसार में बाड़े, बाकी एह तीनों निहन ना केहु भईल बा, ना केहु होई।'

राजा के ए घटना के बाद खुद अपना के अपराधी बुझे लगले, अवुरी उहें आपन गर्दन काट लेवे के ठान लेले। राजा जसहीं गर्दन काटे खातिर तलवार उठवले, तबहियें सर्वमंगला देवी राजा के हाथ रोक लिहली।

सर्वमंगला देवी कहली, राजा हम तहरा से बहुत प्रसन्न बानी। अतना साहस देख वरदान देतानी कि तहरा मरला के बादो तहार राज्य जस के तस रही।

तब राजा हाथ जोड़ प्रणाम करत बोलले, 'हे देवी, अगर आप हमरा प सचमुच खुश बानी, त वरदान दिही कि सुरवीर अवुरी उनुकर पत्नी-बेटा जिंदा हो जास। अगर अयीसन ना भईल त हम आपन सिर काट देब।'

देवी कहली, 'हे राजन, जा तहार जय होखे। हम वरदान देतानी - सुरवीर अवुरी उनुकर पत्नी-बेटा जिंदा हो जईहें।' अतना कह देवी अदृश्य हो गईली।

देवी के वरदान से सुरवीर परिवार सहित जिंदा हो गईले। उ अपना पत्नी-बेटा के पहुंचावे खातिर घरे चलले, एने राजा भी सुरवीर के नज़र बचा अपना महल में लवट अईले।

अपना पत्नी-बेटा के घरे पहुंचा जब सबेरे सुरवीर राजा के इहाँ पहुंचले, त राजा पुछले कि, 'रतिया के, के रोवत रहे?' सुरवीर कहले कि एगो औरत रोवत रहे लेकिन हमरा के देख के गायब हो गईल, एहसे पाता ना चलल कि रोवे वाली औरत के रहे अवुरी काहें रोवत रहे।

सुरवीर के जवाब से राजा मने-मने गदगद हो गईले। सोचे लगले – 'ए महान आदमी के महानता के हम कईसे बखान करीं, समझ में नईखे आवत।'

का आप राजा के ए मामला में मदद कर सकिले, अगर हाँ त कमेंट जरूर करीं।

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