प्रोफेसर अखौरी अच्युतानंद सिन्हा | जीनिका नाम प भारत अवुरी अमेरिका के छाती उतान हो जाला

करीब 55 साल से अमेरिका में रहेवला प्रोफेसर अखौरी अच्युतानंद सिन्हा के भोजपुरी अवुरी हिन्दी में बोलत देखल अपने आप में अद्भुत अनुभव बा।

करीब 55 साल से अमेरिका में रहेवला प्रोफेसर अखौरी अच्युतानंद सिन्हा के भोजपुरी अवुरी हिन्दी में बोलत देखल अपने आप में अद्भुत अनुभव बा।

अखौरी अच्युतानंद सिन्हा, एगो अयीसन नाम जीनिका प सभके नाज़ होई। देश के नाज़ होई, बिहार के नाज़ होई लेकिन भोजपुरी भाषा के बोले वाला हर आदमी के छाती गर्व से सबसे बेसी उतान होई।

शनिवार, 14 मार्च 2015 के पटना में श्री सिन्हा के सम्मानित कईल गईल। करीब 75 साल उमर के ए अमेरिकी वैज्ञानिक के नाम प अमेरिका एगो पहाड़ के नामकरण कईले बा।

पटना विश्वविद्यालय से 1956 में M Sc (जूलोजी) करेवाला श्री अखौरी अच्युतानंद सिन्हा पछिला 50 साल से अमेरिकी नागरिक हवे। ए सभके बावजूद अपना माटी के खुशबू सिन्हा के अजूओ भारत में खींच ले आवेला।

बिहार के बक्सर ज़िला के चूरामनपुर गाँव में जन्मल, प्रोफेसर अखौरी अच्युतानंद सिन्हा करीब 55 साल से अमेरिका में रहेले, लेकिन माटी अवुरी संस्कृति के लगाव अजूओ उनुका के भोजपुरी अवुरी हिन्दी भुलाए नईखे देले।

सिन्हा जी, खूब निमन से भोजपुरी अवुरी हिन्दी बोलेले, शायद हमनियों से निमन भोजपुरी बोलेले।

करीब 55 साल से अमेरिका में रहेवला प्रोफेसर अखौरी अच्युतानंद सिन्हा के भोजपुरी अवुरी हिन्दी में बोलत देखल अपने आप में अद्भुत अनुभव बा। प्रो॰ सिन्हा पछिला 50 साल से अमेरिकी नागरिक हवे।

सिन्हा जी अमेरिका के मिनेसोटा विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स विभाग में सेल बायोलॉजी अवुरी विकास के प्रोफेसर हवे। सिन्हा जी के अंटार्कटिका अभियान में योगदान के देखत करीब 990 मिटर उंच एगो पहाड़ के नामकारण इनिका नाम प भईल बा।

ए नामकरण के सिफ़ारिश 'अमेरिकी अंटार्कटिक नाम पर सलाहकार समिति' अवुरी अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संयुक्त रूप से कईले रहे।

अपना परिवार के बारे में बतावत प्रो॰ सिन्हा कहले – "हमनी के परिवार मूल रूप से दिल्ली के निवासी रहे, लेकीन 1739 में नादिर शाह के हमला के समय बक्सर चल आईल अवुरी इहें बस गईल।"

प्रो॰ सिन्हा कहले कि, "हम हर साल फरवरी महिना में अपना गाँव, चूरामनपुर आवेनी। ए समय आवे से एक त मिनेसोटा के सर्दी से जान बचेला दूसरा परिवार अवुरी हित-मित्र से भेट हो जाला।"

विद्यार्थी लोगन के सलाह देत प्रो॰ सिन्हा कहले कि, "आप लोग हमेशा बड़ लक्ष्य के ओर बढ़ी, अपना लक्ष्य प तत्पर रही। दुनिया के देखा दिही कि आपके भीतर क्षमता बा, अपना लक्ष्य के क्षेत्र में केहु से संपर्क करे से डेराए के ना चाही, जब अवसर के फायदा उठाईं।"

बक्सर के माटी में जन्म लेवेवाला, प्रो॰ सिन्हा के योगदान के आज पूरा विश्व मानता, पूरा विश्व उनुकर सम्मान करता, हमनी के हमान विभूति के सम्मान में बस अतने कहल चाहतानी कि – "जुग जुग जियसू ललनवा ........."

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