दाल-भात, समोसा अवुरी जलेबी समेत सात व्यंजन भारत के ना ह, लेकिन भारत के लोग एकनी के खूब पसंद करेले

हमनी के दिन-रात में शामिल कुछ अति जरूरी व्यंजन भारतीय ना ह।

हमनी के दिन-रात में शामिल कुछ अति जरूरी व्यंजन भारतीय ना ह।

समोसा (सिंघाड़ा) अवुरी जलेबी अयीसन चीज़ ह जवन लगभग हरेक आदमी खईले होई। सीधा-सीधा कहल जाए त पूरा जीवन ए सभ चीज़ के खात-खात बीत गईल होई।

ए सभके बावजूद बहुत कम लोग के पाता होई कि समोसा-जलेबी जईसन बहुत चीज़ असल में भारतीय व्यंजन ना ह, पूरा तरीका से विदेशी ह। त चली अयीसने कुछ लोकप्रिय व्यंजन के बारे में जानल जाए -

समोसा/सिंघाड़ा
अयीसन शायदे केहु होई, जे ए तिकोना चीज़ के ना खईले होई। फूटपाथ से लेके तमाम बड़े-बड़े होटल/रेस्टुरेंट तक में एकरा के खूब चाव से खाईल जाला, एकरा बावजूद इ भारत के मूल व्यंजन ना ह। मध्यपूर्व एशिया से भारत पहुंचल ए व्यंजन के हमनी के इहाँ समोसा चाहें सिंघाड़ा कहल जाला।

जानकारी के मुताबिक 13वां-14वां सदी में भारत पहुंचल ए व्यंजन के मूल नाम "संबोसा" रहे। खैर, नाम अवुरी मूल स्थान कतहूँ होखे लेकिन एकर स्वाद असली भारतीय ह अवुरी सभके जीभ प बा।

गुलाब जामुन/करियवा रसगुल्ला
आहा! एकरा के देखते ढेर लोग के लार टपके लागेला। खोवा से बनेवाला इ व्यंजन देश में सगरो पसंद कईल जाला। लेकिन, भारत में हर खुशी के मौका प सबसे चाव से खाईल जाएवाला ए व्यंजन के जन्म फारस (पर्शिया) में भईल रहे। एकर मूल नाम "लुक़मात-अल-क़ादि" रहे।

चाय/चाह
आज भारत में चाय पिए वाला के कमी नईखे। सभकेहु आराम चाहे बेचैनी के क्षण में चाय पियल पसंद करेला। गरम चाय के एक कप ढेर लोग के जीवन के हिस्सा बा। चाय के जन्म ओइसे त चीन में भईल, लेकिन उहाँ एकर इस्तेमाल दवाई के रूप में होखत रहे। इहे चाय जब ब्रिटेन पहुंचल त अंग्रेज़ एकरा रंग अवुरी गुण से बहुत प्रभावीत भईले।

चाय के गुण से प्रभावीत अंग्रेज़ चाय के उत्पादन में चीन के पछाड़े के ठान लेले अवुरी इ चाय भारत पहुँच गईल। गुलाम भारत में अंग्रेज़ एकर खेती करे खातिर ट्रेनिंग देवे शुरू कईले, संगे-संगे जे केहु एकर खेती करे ओकरा के खास इनाम देत रहले।

लेकिन चाय के लोकप्रिय बनावे के सभ कोशिश के बावजूद अंग्रेजन के रहते भारत में चाय लोकप्रियता के शिखर तक ना पहुंचल। भारत में चाय के लोकप्रियता सन 1950 के बाद बहुत तेज़ी से बढ़ल अवुरी आज त इ हमनी के जीवन के हिस्सा हटे।

दाल भात
अब एकरा के ढेर लोग त कहिहें कि इ भोजपुरीहन के खाना हटे, अफसोस इहो विदेश से आईल बा। हालांकि खिचड़ी हमनिए के व्यंजन ह। एकरा बारे में ढेर बतावे के जरूरत नईखे, लेकिन इ मूल रूप से नेपाली व्यंजन ह, जवन कि बिहार अवुरी उत्तर प्रदेश के राह से पूरा देश में पसर गईल।

राजमा
दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर अवुरी हरियाणा में रहेवाला लगभग सभकेहु कवनो ना कवनो समय 'राजमा चावल' जरूर खईले होई। दक्षिण भारत में भी एकरा से खूब खाईल जाला। ए राजमा के बिया मध्य मेक्सिको अवुरी ग्वाटेमाला से भारत पहुंचल रहे। हालांकि, भारत अवुरी बाकी जगह में एकरा के बनावे अवुरी खाए के तरीका भिन्न बाटे।

नान
नान के ओइसे त दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर अवुरी हरियाणा में जादा प्रचलन में बा, लेकिन अब एकरा के पसंद करेवाला लोग हमनीयों के इहाँ हो गईल बाड़े। नान के भारत में ले आवे के श्रेय मुगल शासकन के जाला। नान के जड़ फारस अवुरी ईरान में बाटे, अवुरी मुसलमान शासन के दौरान भारत पहुंचल रहे।

जलेबी
अब जलेबी जे ना खईले होई उ त पक्का तौर प अपना के करम के हीन बुझ लेवे। मेला-ददरी से लेके बाज़ार के दोकान-ठेला प बेचाए वाला ए जलेबी के जड़ तक विदेश में बा। जलेबी के मूल नाम "जलाबिया" (अरबी) भा "जलिबिया" (फारसी) हटे। हालांकि एकर जन्म काहाँ भईल एकरा बारे में कवनो खास जानकारी नईखे, लेकिन भारत में एकरा के ले आवे के श्रेय फारस के लूटेरन के जाता।

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