बिहार के 18 ज़िला के पानी पिये लायक नईखे, लेकिन केंद्र सरकार अवुरी राज्य सरकार अबहुओं सुस्त

आर्सेनिक - जानलेवा जहर, अब पानी के चलते हमनी के खाना तक पहुंचे लागल बा।

आर्सेनिक - जानलेवा जहर, अब पानी के चलते हमनी के खाना तक पहुंचे लागल बा।

भारत सरकार देश में खेती अवुरी उपज में क्रांति ले आवल चाहतिया, अगर इ क्रांति आईल, त संभव बा कि आपके थाली में 'आर्सेनिक' निहन खतरनाक रसायन परोसल जाए।

बिहार, बंगाल, असम, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड अवुरी छत्तीसगढ़ के कम से कम 38 ज़िला आर्सेनिक के बरियार असर में बा। इहे उ इलाका ह जाहाँ देश में चावल के पैदावार सबसे ढ़ेर होखेला, त चावल संगे 'आर्सेनिक' भी आपके थाली तक पहुँच सकता।

धान, पानी से आर्सेनिक के मात्रा के आसानी से सोख लेला, जवन कि चावल के संगे आपके पेट में जाई, नतीजा? नतीजा में घेंघा, कुष्ठरोग अवुरी कैंसर निहन बेमारी।

एगो रिपोर्ट के मुताबिक, आर्सेनिक नाम के इ जहर अभी तक 1 लाख से जादा लोग के जान ले चुकल बा। भाजपा नेता अवुरी सांसद मुरली मनोहर जोशी के अध्यक्षता में बनल एगो संसदीय कमेटी के रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल 2 से 3 लाख लोग आर्सेनिक के चलते बेमार बाड़े, जबकि एकर असर 60 लाख से 1 करोड़ तक के आबादी प बाटे।

ए सभके बावजूद, अभी तक सिर्फ 3,500 करोड़ रुपया के ए मद में खर्च भईल बा। अब चौंका देवे वाला जानकारी इ बा कि, बिहार के 15 ज़िला अवुरी बंगाल के 8 ज़िला, जवना के केंद्र सरकार "हरी क्रांति-2" खातिर चुनले बिया, सभके सभ आर्सेनिक नाम के जहर के प्रभाव में बाटे। इ हाल ओ इलाका के बा, जाहां देश के 54% चावल के उत्पादन होखेला।

सबसे पहिले जून 2002 मे भोजपुर जिला के शाहपुर पट्टी थाना क्षेत्र के ओझा पट्टी सेमरिया गाँव मे पानी मे आर्सेनिक मिलला के खबर आइल, ओझा पट्टी सेमरिया से शुरू भईल पानी के जांच के रिपोर्ट के अनुसार जहर अब अपना खतरनाक स्तर के पार पहुँच गइल बाटे।

भू-जल विशेषज्ञ लोगन के मुताबिक गंगा के किनारे बसल लगभग सभे गाँव के पानी मे आर्सेनिक मिलला के खबर बा, जांच के अनुसार बिहार के 18 जिला के पानी मे विश्व स्वास्थ संगठन (डबल्यूएचओ) के मानक स्तर से कई गुना ज्यादा आर्सेनिक बाटे। मतलब? मतलब कि बिहार के 18 जिला के पानी इंसान का जानवर तक के पिए लायक नईखे।

संगठन (डबल्यूएचओ) के अनुसार अगर पानी के 1 करोड़ हिस्सा मे 10 अंश तक आर्सेनिक होखे त ओकरा के सुरक्षित मानल जाला, लेकिन बिहार मे कही-कही त एकर मात्रा 700 अंश से भी उपर बाटे।

पटना के एएन कॉलेज के जल अवरू पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष एके घोष बिहार के 36,000 चपाकल अवरू कुवां के पानी के जांच कईले, एह 36,000 मे से 30% से अधिक सैम्पल मे आर्सेनिक के मात्रा खतरा के स्तर के ऊपर मिलल।

घोष के मुताबिक सबसे ज्यादा आर्सेनिक भोजपुर ज़िला के पांडेयटोला गाँव मे मिलल, इहाँ के पानी मे आर्सेनिक के मात्रा 1861 अंश रहे, उहें पटना ज़िला के मनेर में एकर मात्रा 724 अंश, भागलपुर के पानी मे 608 अंश त वैशाली के बिदुपुर के पानी मे 360 अंश आर्सेनिक रहे।

हालांकि पटना शहर के पानी मे त आर्सेनिक ना मिलल लेकिन जिला के दानापुर, मनेर अवरू फतुहा के पानी मे आर्सेनिक काफी खतरनाक स्तर तक बाटे। पटना के अलावा बिहार मे आर्सेनिक से जादा प्रभावित जिला में बेगुसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर, समस्तीपुर, सारण, वैशाली, सुपौल, पश्चिमी चंपारण, किशनगंज, पूर्णिया अवरू मधुबनी बाटे।

रिपोर्ट के मुताबिक आर्सेनिक सिर्फ पानी तक सीमित नईखे, अब इ जहर आनाज में शामिल हो गइल बा। सबसे खतरनाक हालत भोजपुर के बाटे, इहाँ के पानी में आर्सेनिक होखला के चलते जिला के प्रमुख फसल, चावल तक आर्सेनिक से प्रभावीत बाटे।

भोजपुर ज़िला के चावल मे प्रति ग्राम आर्सेनिक के मात्रा 36 माइक्रो ग्राम बाटे, उहें भागलपुर के ऊख (गन्ना) मे आर्सेनिक के मात्रा 22 माइक्रो ग्राम बा। आर्सेनिक से जुड़ल ए आंकड़ा के देखला के बाद भविष्य के कल्पना से डर पैदा होखे लागता।

आर्सेनिक मिलल पानी के पियला से चर्मरोग (कुष्ठ), अवुरी कैंसर जईसन बीमारी होखेला, एकरे नतीजा बा कि जाहां-जाहां के पानी मे आर्सेनिक के मात्रा जादा बा उहाँ-उहाँ कैंसर अवुरी तमाम रोग से परेशान लोगन के संख्या रोज बढ़ल जाता।

हालांकि, सरकार देर से ही सही आर्सेनिक के रोकथाम के कोशिश त शुरू कईलस, लेकिन एकरो नतीजा कुछ ना भईल। रोकथाम के कोशिश में सरकार सामुदायिक स्तर प पिएवाला पानी के साफ करे के योजना बनवलस। लेकिन योजना मे ढ़ीलाही अवरू लापरवाही के चलते शुरू भईला के कुछुए दिन बाद बंद हो गइल, आ करोड़ो रुपया के लागत से पानी साफ करे खाती लगावल प्लांट बरबाद हो गईले।

एह योजना के दूसरा कमी रहे की पानी साफ कईला के बाद प्लांट से निकलल गंदगी (अवशेष) के जेने-तेने फ़ेक दिहल गइल, ओकर समुचित इंतजाम ना कईल गइल। जेकरा से चलते, पानी में निकलल आर्सेनिक फिर जमीन अवुरी पानी में पहुँच गईल। नतीजा? नतीजा प्लांट वाला जगह प आर्सेनिक के मात्रा पहिले से कई गुना बढ़ गईल।

सरकार चेतल अवुरी फिर नाया शुरुवात कईलस। बक्सर ज़िला के चुरमानपुर समेत कई गाँव में पानी के जांच क 'लाल' अवुरी 'हरियर' रंग के निशान लगावल गईल। हरियार रंग के मतलब बा कि, इ पानी पिए लायक बा, जबकि लाल रंग के मतलब बा कि, एकरा के पियला प बेमारी हो सकता। लेकिन सिंचाई खातिर अबहियों लाल निशान वाला पानी के ही इस्तेमाल होखता।

चूरामनपुर के अवधेश कहले – "हमनी के तालाब, पोखरा अवुरी कुंआ प लाल रंग वाला बोर्ड लागल बा, इहे हाल सभ गाँव के बाटे। हमनी के मालूम बा कि लाल निशान वाला पानी से बेमारी हो सकता, एकरा बावजूद एही पानी से अपना खेत में पटवन (सिंचाई) करे के परेला, दोसर कवनो उपाय नईखे।"

एहिबीच बिहार सरकार राज्य के कुछ प्रभावित जिला में पिए खातिर गंगा जल के सप्लाइ शुरू कईले बिया, सवाल बा गंगा के पानी काहें?

अब एकरा के भगवान के प्रताप कहीं, चाहे कुछू अवरू, गंगा के किनारा प बसल सभे गाँव के पानी मे आर्सेनिक बाटे लेकिन बिहार मे बहेवाली गंगा के पानी मे कतहूँ आर्सेनिक नईखे मिलल।

राज्य सरकार अब इहे गंगा जल के भोजपुर आ बक्सर मे कुछ जगह सप्लाइ करतियाया आ आगे एकरा के वैशाली समेत गंगा के किनारे के अवरू जिला मे लागू करे के योजना बाटे।

लगभग सभ राज्य के सरकार एही प्रकार के कोशिश में बा, लेकिन इ कोशिश फिलहाल पिए वाला पानी तक सीमित बाटे। आर्सेनिक से जवन बड़ चिंता बा ओकरा प केहु के ध्यान नईखे।

आर्सेनिक वाला पानी त सिर्फ उहे पी सकता, जे उहाँ बाटे, लेकिन आर्सेनिक मिलल चावल अवुरी अनाज देश के हरेक हिस्सा में पहुंचेला, एकरा के उपजावे वाला भी एही अनाज से पेट भरेला, अयीसना में खेती खातिर बिना आर्सेनिक के पानी काहाँ से अवुरी कईसे आई?

अगर खेती में सिंचाई खातिर आर्सेनिक वाला पानी के इस्तेमाल होई, त इ जहर अगिला दु-चार साल में पूरा देश तक पहुँच जाई, ओकरा खातिर कवन उपाय बा?

बिहार अवुरी उत्तर प्रदेश के प्रमुख आर्सेनिक प्रभावीत इलाका

  • बिहार
    • भोजपुर
      • बड़हरा
      • शाहपुर
      • कोइलवर
      • आरा
      • बिहियाँ
      • उदवंतनगर
    • पटना
      • मनेर
      • दानापुर
      • बख्तियारपुर
      • बाढ़
    • बेगुसराय
      • मटिहानी
      • बेगुसराय
      • बरौनी
      • बलिया
      • साबेपुरकमाल
      • बचवारा
    • खगड़िया
      • खगड़िया
      • मानसी
      • गोगरी
      • पर्बता
    • समस्तीपुर
      • मोहिनूद्दीन नगर,
      • मोहनपुर
      • पटौरी
      • विद्यापतिनगर
    • भागलपुर
      • जगदीशपुर
      • सुलतानगंज
      • नाथनगर
    • सारन
      • दिगवाड़ा
      • छपरा
      • रेबेलगंज
      • सोनपुर
    • मुंगेर
      • जमालपुर
      • धरेहरा
      • बरियारपुर
      • मुंगेर
    • कटीहार
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      • पंडारी कृपाल
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    • मथुरा
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    • मुरादाबाद
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* स्थान के संकेतक

  • राज्य
    • ज़िला
      • ब्लॉक (प्रखंड)
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