प्रधानमंत्री ना त भविष्य के राह देखवले, ना नाकामी प अफसोस जतवले

मोदी जी के भाषण के सुनला के बाद लागल कि उ अजूओ कवनो चुनावी रैली के संबोधित करत रहन। इशारा-इशारा में विपक्ष प हमला, अपना सफलता के गुणगान जईसन सभ 'मसाला' उनुका भाषण में रहे, ना रहे त सिर्फ भविष्य के योजना, नाकामी प अफसोस, वादा अवुरी सच्चाई के फर्क।

मोदी जी के भाषण के सुनला के बाद लागल कि उ अजूओ कवनो चुनावी रैली के संबोधित करत रहन। इशारा-इशारा में विपक्ष प हमला, अपना सफलता के गुणगान जईसन सभ 'मसाला' उनुका भाषण में रहे, ना रहे त सिर्फ भविष्य के योजना, नाकामी प अफसोस, वादा अवुरी सच्चाई के फर्क।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शनिवार के लाल किला से अपना सरकार के कामकाज के बखान त खूब कईले, लेकिन उनुका ए भाषण में ना त भविष्य खाती कवनो महत्वपूर्ण योजना रहे, ना पछिला एक साल के अपना नाकामी प कवनो अफसोस के भाव।

पछिला साल देश के बदल देवे के भरोसा के संगे सत्ता में आईल नरेंद्र मोदी के संगे आज कामयाबी कम अवुरी नाकामी जादा जुड़ल बा। आज उ 'प्रधानमंत्री जनधन योजना' के चर्चा करत कहले कि करीब 17 करोड़ बैंक खाता ए योजना के तहत खुलल, जवना में आज 17,000 करोड़ से जादा रुपया जामा बा।

प्रधानमंत्री एकरा के 'गरीबों कि अमीरी' करार देत आपन पीठ अपने थपथपा लेले। लेकिन सच्चाई बा कि मोदी के दावा वाला 17 करोड़ खाता में से आधा से अधिका खाता में आज एको रुपया नईखे। बिना रुपया के खाता से देश में कवन बड़ बदलाव होई इ समझे के बात बा।

कांग्रेस पार्टी के शासन के समय भ्रष्टाचार अवुरी घोटाला से तंग भारत के जनता नरेंद्र मोदी के बड़े-बड़े वादा अवुरी बड़े-बड़े बात प भरोसा करत सत्ता सउंपले रहे। सबसे बड़ भरोसा नीचे मुंहे बढ़त भारतीय अर्थव्यवस्था के आगे मुंहे चलावे के रहे।

आर्थिक सुधार के मुद्दा प बात कईल जाए त आज मोदी समेत पूरा देश 'वस्तु एवं सेवा कर' (जीएसटी) बिल से बहुत आस लगवले बा, लेकिन लोकसभा में भारी बहुमत वाली मोदी सरकार एकरा के राज्य सभा से अभी तक नईखे पास करावे सकल।

एही कड़ी में पेश मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल के व्यापार जगत बहुत उत्साह से देखत रहे, लेकिन तमाम बदनामी के अपना गले लगवला के बाद अब सरकार एकरा के वापस लेवे के लगभग मन बना चुकल बिया।

मोदी जी के भाषण के सुनला के बाद लागल कि उ अजूओ कवनो चुनावी रैली के संबोधित करत रहन। इशारा-इशारा में विपक्ष प हमला, अपना सफलता के गुणगान जईसन सभ 'मसाला' उनुका भाषण में रहे, ना रहे त सिर्फ भविष्य के योजना, नाकामी प अफसोस, वादा अवुरी सच्चाई के फर्क।

पछिला साल जब मोदी लाल किला से प्रधानमंत्री के रूप में पहिला बेर बोलले त देश के लागल कि – 'हाँ अयीसने नेता के जरूरत रहल हा।' तब मोदी के भाषण के केंद्र में महिला सुरक्षा, स्वच्छता अवुरी 'मेक इन इंडिया' निहन मुद्दा रहे। मोदी देश के निर्माण क्षेत्र के एगो बड़ शक्ति के रूप में विकसित करे के वादा कईले रहन।

आज मोदी जी अपना सरकार के छोट-छोट उपलब्धि के बहुत बढ़ा-चढ़ा के बतवले लेकिन एको बेर इ ना कहले कि 'मेक इन इंडिया', 'स्किल्ड इंडिया', 'स्वच्छता अभियान' अवुरी महिला सुरक्षा प उनुकर सरकार का कईले बिया अवुरी का करतिया।

केंद्र सरकार अभी तक त 'मेक इन इंडिया' के तहत कवनो नीति तक के नईखे तय कईले। साधारण तौर प होखेवाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) के 'मेक इन इंडिया' के तहत जबरन प्रचार कईल जाता।

विदेश के जादातर निवेशक अजूओ कहतारे कि भारत में व्यापार करे लायक स्थिति नईखे। लालफ़ीताशाही, संसाधन के कमी, लचर कानून, असपष्ट नीति जईसन कमी के चलते भारत के स्थिति जस के तस बा।

स्वतंत्रता दिवस प प्रधानमंत्री के भाषण आमतौर प देश के भविष्य के बारे में बतावे खातिर होखेला। सरकार ए दिन अपना भावी योजना के जनता के सोझा राखेले, लेकिन आज मोदी जी ए सभके छोड़ खाली अपना सरकार के सफलता के गिनवईले।

मोदी जी के भाषण के सुनला के बाद लागल कि उ अजूओ कवनो चुनावी रैली के संबोधित करत रहन। इशारा-इशारा में कांग्रेस प हमला, 30 साल में मिले वाला 3 लाख करोड़ रुपया (कोयल खान के लाईसेंस/रॉयल्टी), 17 करोड़ बैंक खाता, स्कूल में बनल शौचालय जईसन सभ मुद्दा के भरमार रहे।

ना रहे त सिर्फ भविष्य के योजना, नाकामी प अफसोस, वादा अवुरी सच्चाई के फर्क।

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