बिहार चुनाव | एनडीए अवुरी महागठबंधन के रणनीति के क्षमता अवुरी कमजोरी

एक ओर अकेले नरेंद्र मोदी बाड़े त दोसरा ओर बिहार के दु गो महारथी बाड़े। दुनो पक्ष एक दूसरा प बढ़त बनावे खातिर तमाम प्रकार के तरीका अपनावता, बयानबाजी करता।

एक ओर अकेले नरेंद्र मोदी बाड़े त दोसरा ओर बिहार के दु गो महारथी बाड़े। दुनो पक्ष एक दूसरा प बढ़त बनावे खातिर तमाम प्रकार के तरीका अपनावता, बयानबाजी करता।

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन अवुरी एनडीए के बीच जंग जारी बा, दुनो पक्ष एक दूसरा प बढ़त बनावे खातिर तमाम प्रकार के तरीका अपनावता, बयानबाजी करता। झूठ के सच अवुरी सच के झूठ बनावल, बतावल जाता।

एक ओर अकेले नरेंद्र मोदी बाड़े त दोसरा ओर बिहार के दु गो महारथी बाड़े। हालांकि मोदी के संगे तीन गो अवुरी महारथी बाड़े, लेकिन एगो लोग के कद ओ दुनो जईसन नईखे। एहसे फिलहाल ए तीनो लोग के महारथी के सूची से बहरे राखल जाए।

दुनो पक्ष होत सबेर से लेके सुतली रात तक एक दूसरा प हमला करत रहता। केहु सवाल खाड़ा करता त केहु जवाब देता। सोश्ल मीडिया के मैदान में लागता कि दुनो खेमा के समर्थक कटवाबझ (बाज़ के लड़ाई) कईले बाड़े। केहु एगो फोटो लेके आवता, त केहु एगो विडियो, सब जने एक दूसरा के नीचा दिखावे अवुरी 'भंडाफोड़' करे में लागल बाड़े। लेकिन जमीनी हकीकत का बा? उहाँ कवन रणनीति प काम होखता?

एकरा खातिर सबसे त दुनो पक्ष के नेता लोगन के नाम अवुरी कमी-बेसी के चर्चा जरूरी बा। एनडीए के पूरा ताकत के दु तिहाई अकेले नरेंद्र मोदी बाड़े। नरेंद्र मोदी के चुनाव से हटा दिहल जाए त भाजपा अवुरी जीतनराम मांझी में ढेर फर्क ना रह जाई। डर बा कि कहीं जीतनराम मांझी बीस मत परे लागस।

बिहार में एनडीए के अगुवाई करेवाली भाजपा संगे दिक्कत बा कि ओकरा भीरी अयीसन कवनो नेता नईखन जेकरा में जनता से वोट ले लेवे के क्षमता होखे। रैली अवुरी सभा में भीड़ कईसे जुटेले इ सभ केहु जानता। मोदी के देखे खातिर, सुने खातिर भीड़ त जुटता लेकिन उ जवन बात कहतारे, जेकरा खातिर कहतारे, ओकरा बुझातो बा कि ना इ पाता करे के होई। पाता का करे के बा उ जल्दीए पाता चल जाई।

अब तनिका महागठबंधन प ध्यान दिहल जाए। इहाँ लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार निहन बिहार के प्रभावी नाम के संगे सोनिया गांधी अवुरी राहुल गांधी निहन नेता बाड़े। चुकी सोनिया-राहुल-कांग्रेस के बिहार में ढ़ेर लम्हर भूमिका नईखे, एहसे महागठबंधन ए लोग के भरोसे नईखे रहल चाहत।

महागठबंधन के अगुवाई एक ओर से लालू करतारे त दोसरा ओर से नीतीश कुमार बाड़े। लालू अपना अंदाज़ के अकेला नेता हवे। उनुका भाषण में देसीपन, अल्हड़पन, उदण्डता, बागीपन अवुरी आक्रमण निहन सभ भाव रहेला। उ अपना भाषण से ठंढा पानी के खउला सकेले त जरत आग के बूता देवे तक के क्षमता राखेले।

दोसरा ओर बाड़े नीतीश कुमार, जवन मर्यादा से बहरी निकलल पसंद ना करस, जोख-गिन के शब्द निकालेले अवुरी जागरूक वर्ग के समझ में आवे लायक भाषा बोलेले।

लालू त चुकी राजद में स्वर्ण वर्ग के लगभग ना के बराबर टिकट देले बाड़े एहसे उनुका से स्वर्ण वोट के आशा कईल तनिका ज्यादती होई। बिहार के सबसे दबंग मानल जाएवाला स्वर्ण, भूमिहार के राजद से पूरा तरीका से सफाया करेवाला लालू खुलेआम स्वर्ण वर्ग के खिलाफ जहर उगिलत बाड़े, जेकरा चलते नीतीश के 3 से 4 प्रतिशत तक वोट के नुकसान हो सकता, हालांकि एकर भरपाई यादव वोट से हो जाई।

नीतीश के एगो खास वर्ग के मतदाता के ओर ढ़ेर झुकाव परेशानी पैदा क सकत रहे, लेकिन आज के स्थिति में जब ए लोग के भीरी वीके सिंह अवुरी मोहन भागवत के ब्रह्मास्त्र निहन बयान बा त ढ़ेर नुकसान के गुंजाइश नईखे।

रणनीति के बात कईल जाए त भाजपा अवुरी एनडीए से कई मौका प बड़े-बड़े चूक भईल बा, जवना में से सबसे बड़ चूक प्रधानमंत्री के बहुत जादा रैली बाटे। लगातार एक महिना से बिहार में रैली करेवाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लालू के बिनल जाल में अझुरा गईले जेकरा चलते उ जातिवाद अवुरी गौमांस निहन मुद्दा प बोले शुरू क देले। प्रधानमंत्री ए मुद्दा के उठाके अपना विरोधी लोग के सही साबित क देले। ध्यान रहे कि, मोदी के विरोधी लगातार दावा करतारे कि मोदी अभी तक कुछ नईखन कईले, इनिका भीरी बोले खातिर कुछूओ नईखे।

एकरा संगे भाजपा एगो अवुरी गलती कईलस। लालू-नीतीश के कवनो सभा के अभी तक टीवी प सीधा प्रसारण नईखे भईल, जबकि मोदी के हरेक रैली के तमाम टीवी चैनल सीधा प्रसारण कईलस। ए प्रसारण से मोदी के जातिवादी अवुरी गौमांस वाला टिप्पणी ओकरो भीरी पहुँच गईल, जवन कि आमतौर प रैली के भाषण के ना सुने पावेला।

भाजपा के कोशिश धर्म के आधार प गोलबंदी के रहल होई लेकिन स्वर्ण वर्ग एकरा चलते बिदकल देखाई देता। कुछ लोग कहतारे कि, जब मोदी खुद जातिवाद अवुरी धर्म के आधार प वोट मांगिहे त लालू-नीतीश अवुरी इनिका में फर्क कवन रह जाई? हालांकि, एकर नतीजा प कवन असर परी इ कहल तनिका मुश्किल बा।

इहाँ एगो अवुरी बात जवन कम लोग जानत होइहे, मोदी के रैली के सीधा प्रसारण के तमाम व्यवस्था जईसे कैमरा, ओबी वैन अवुरी सैटलाइट लिंक निहन वयवस्था खुद भाजपा करेले अवुरी टीवी चैनल के रैली देखावे के बदला समय के हिसाब से पईसा मिलेला।

महागठबंधन के रणनीति बा कि लालू से यादव-मुसलमान बहुल इलाका में सभा करावल जाए जबकि नीतीश उहाँ सभा करस, जहां महादलित, दलित, अति पिछड़ा अवुरी सामान्य वर्ग के मतदाता के संख्या जादा बा। संगही, दुनो नेता राज्य के 243 विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक-एक सभ जरूर करस।

चुकी लालू के मतदाता अवुरी श्रोता अलग किस्म के बा, नीतीश के अलग बा, कांग्रेस के अलग बा, एहसे एक संगे एक सभा में सभ नेता के जुटावे के योजना तक नईखे। उम्मीदवार चाहे राजद, जदयू भा कांग्रेस के होखे, दुनो नेता ओकरा खातिर कम से कम एक-एक बेर प्रचार जरूर करीहे। लेकिन अलग-अलग। ए रणनीति से दुनो नेता के अपना-अपना मतदाता के ओ उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करे खातिर तैयार कईल आसान हो जाई।

ए सभ रणनीति के बावजूद इहाँ दु प्रकार के पेंच बा। मुसलमान मतदाता के पसंद वाला तीनों दल एक संगे बा, त ओकरा कवनो उलझन नईखे, लेकिन यादव मतदाता का लालू के कहला प नीतीश के उम्मीदवार के वोट करीहे? हमार अंदाज़ा गलती हो सकेला, लेकीन फिलहाल मामला पक्ष में देखाई देता। दूसरा पेंच बा कथित 'जंगलराज' के डर। नीतीश के लालू से हाथ मिला लेवे से कुछ लोग के नज़र में 1990 से 2005 के बीच के कुछ दृश्य नाचे लागल बा। हालांकि एकरा में जादा संख्या ओ वर्ग के मतदाता बा जवन की पारंपरिक तौर प भाजपा के वोट देवेले।

अब अंत में जदी महागठबंधन अवुरी एनडीए के रणनीति के तुलना कईल जाए त पाता चली कि एक ओर एनडीए सिर्फ मोदी के सहारे बा, त दोसरा ओर लालू-नीतीश निहन बराबर के लोकप्रिय नेता बाड़े। मोदी के पार्टी के वोट बैंक सिर्फ स्वर्ण मतदाता के मानल जाला, जबकि दूसरा खेमा में स्वर्ण के छोड़ बाकी सभ वर्ग प कमबेसी पकड़ बा। संगही, लालू-नीतीश उहाँ के जनमानस के भाषा बोलतारे, त मोदी के भाषा में तनिका शहरी पूट बा।

मोदी के कोशिश पिछड़ा वर्ग के मतदाता के लोभावे के बा, त लालू-नीतीश के कोशिश ए लोग के एकजुट कईल बा।

मोदी बड़े-बड़े रैली करतारे त लालू-नीतीश छोटे-छोटे, 5 हज़ार से 10 हज़ार लोग के जुटान के संबोधित करतारे। मोदी जनधन योजना, कौशल विकास अवुरी रोजगार के नाम लेतारे, त ओने से दलित हत्या, आरक्षण अवुरी दाल के दाम निहन मुद्दा उठावल जाता।

एहसे ओनईस-बीस के फेरा में परे से निमन बा कि नतीजा के इंतज़ार कईल जाए, या अपना मन से पुछल जाए कि केकरा बात के असर आपके दिल-दिमाग प परता, कवन मुद्दा आपके खातिर जादा जरूरी अवुरी तात्कालिक बाटे।

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