पप्पू यादव, ओवैसी अवुरी मुलायम सिंह निहन 'वोट कटुआ' काहाँ बाड़े?

जईसे-जईसे चुनावी पारा चढ़त गईल, ओईसे- ओईसे साफ होखत गईल ए चुनाव में पप्पू यादव, ओवैसी, मुलायम सिंह, अवुरी तारीक अनवर के भूमिका निर्दलीय निहन रहेवाला बा।

जईसे-जईसे चुनावी पारा चढ़त गईल, ओईसे- ओईसे साफ होखत गईल ए चुनाव में पप्पू यादव, ओवैसी, मुलायम सिंह, अवुरी तारीक अनवर के भूमिका निर्दलीय निहन रहेवाला बा।

बिहार विधानसभा चुनाव के तैयारी के बीच जब राजद से पप्पू यादव के निकालल गईल अवुरी उ अलग पार्टी बनावे के घोषणा कईले त लागल कि उ लालू प्रसाद यादव के अपना राजनीतिक जीवन के सबसे बड़ भूल क देले बाड़े।

एकरा बाद अचानक असद्दुदीन ओवैसी घोषणा कईले कि उ बिहार के मुसलमान बहुल सीमांचल के 24 सीट प आपन उम्मीदवार खाड़ा करीहे। अब त पक्का रहे कि लालू के किला में पप्पू यादव अवुरी नीतीश के किला में ओवैसी के चलते बरियार टूट-फुट होई।

ए सभके अलावे मुलायम सिंह लालू-नीतीश प चोट करत महागठबंधन छोड़ले, त तारीक अनवर के एनसीपी अपना 'सम्मान' के रक्षा करत महागठबंधन से राह अलग कईलस।

ए सभ घटना के बाद तमाम राजनीतिक विश्लेषक भाजपा के जीत के झण्डा गाड़त, वोट के आंकड़ा तक देवे लगले। कहाए लागल कि, चार गो अलग-अलग लोग एक संगे लालू-नीतीश के वोट बैंक के लीले खातिर तैयार बाड़े। पांच-पाँच प्रतिशत वोट कटी त लालू-नीतीश के 20% वोट के नुकसान हो जाई।

आधा चुनाव खतम हो चुकल बा, लेकिन इ पांच-पांच प्रतिशत वोट वाला लोग काहाँ बाड़े? कुछ समय पहिले जवन लोग बिहार के राजनीति के उलट-पुलट देले रहन, चुनाव के घोषणा होखते काहाँ गायब हो गईले?

जईसे-जईसे चुनावी पारा चढ़त गईल, ओईसे- ओईसे साफ होखत गईल ए चुनाव में पप्पू यादव, ओवैसी, मुलायम सिंह, अवुरी तारीक अनवर के भूमिका निर्दलीय निहन रहेवाला बा। अयीसन काहें भईल?

पहिला अवुरी शायद सबसे बड़ कारण बा – मतदाता तक पहुँच बनावे में नाकामी। पप्पू यादव अवुरी असदुद्दीन ओवैसी समेत तमाम 'वोट कटुआ' लोग जनता के इ समझावे में नाकाम रहले कि, 'राज्य में भाजपा अवुरी नीतीश कुमार के अलावे अवुरी केहु सरकार बना सकेला।'

पप्पू यादव, ओवैसी, मुलायम सिंह, तारीक अनवर के संगे जदी जीतन राम मांझी रहीते, त संभव रहे कि चुनावी पानी में तनिका कम चाहे तनिका बेसी उबाल जरूर आईत। पहिले चर्चा तक रहे कि पप्पू यादव अवुरी मांझी एक संगे चुनाव लड़ीहे। लेकिन, मांझी बहुत चालाकी से एनडीए के हाथ धईले अवुरी पप्पू से पिंड छोड़ा लेले।

फिर खबर आईल कि पप्पू यादव अवुरी ओवैसी में तालमेल हो सकता। लेकिन उहो जल्दीए खतम हो गईल। ओवैसी 24 सीट के घोषणा क मात्र पांच-छव जगह से उम्मीदवार उतरले।

ए सभ घटना से जनता ए लोग के हालत के बहुत निमन से समझ गईल, समझ गईल कि इ लोग खाली वोट काटे खातिर मैदान में बाड़े। एकरा बाद के कारण में रणनीति के अभाव गिनल जा सकेला। ए लोग के भीरी रणनीति के साफ अभाव देखाई देलस। ए चारो लोग में से ओवैसी के छोड़ बाकी सब लोग के निशाना प नीतीश कुमार अवुरी लालू प्रसाद रहले, जबकि कवनो जने एको प्रभावी शब्द नरेंद्र मोदी अवुरी भाजपा के खिलाफ ना बोलले।

एकरा से एकदम साफ संदेश जनता में गईल। जनता मान लेलस कि, ए लोग के पूरा खेल भाजपा के इशारा प होखता।

अभी तक जवन साख ए लोग के बाचल रहे, ओकरा के महागठबंधन अवुरी एनडीए के एकतरफा प्रचार ध्वस्त क देलस। दुनो पक्ष एक दूसरा (सिर्फ) के खिलाफ अयीसन धुआंधार बयानबाजी अवुरी अभियान शुरू कईलस कि मतदाता के कान तक ए लोग के आवाज़ पहुंचे के गुंजाईश तक ना रह गईल।

नतीजा देखाई देता। जवन लोग खूब हो-हल्ला अवुरी मीडिया कवरेज के संगे चुनाव मैदान में कुदल रहन, आज उहे लोग सबसे पहिले किनारा हो गईल बाड़े। मैदान में अब सिर्फ उहे बाचल बा, जे चुनाव जीते खातिर लड़ता, ना कि वोट काटे खातिर।

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