बिहार से मिलल संजीवनी के अवुरी असरदार बनावे के तैयारी

कुछ महिना पहिले जब पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में महागठबंधन के स्वाभिमान रैली भईल रहे त कुछ-कुछ समझ में आवे लागल रहे कि लड़ाई के वर्तमान केंद्र बेशक बिहार के राजधानी होखे, लेकिन असल निशाना देश के राजधानी दिल्ली प बाटे।

शुक्रवार के एही गांधी मैदान में नीतीश कुमार पांचवा बेर बिहार के मुख्यमंत्री पद के शपथ लीहले अवुरी एकरे संगे बिहार के लड़ाई खतम हो गईल। ए लड़ाई में नीतीश कुमार के अगुवाई वाला महागठबंधन, भाजपा अवुरी मोदी के अगुवाई वाली एनडीए के रंग उड़ चुकल बा।

सीट बंटवारा, टिकट बंटवारा अवुरी अब मंत्रिपद अवुरी विभाग के बंटवारा। महागठबंधन में अभी तक सबकुछ बहुत शांति अवुरी गंभीरता से होखत आईल बा। हालांकि हर चरण में कुछ लोग नाराज़ देखाई देले लेकिन राजद, जदयू अवुरी कांग्रेस के एकजुट ताकत के सोझा इ नाराजगी बहुत हलूक देखाई देता।

शुक्रवार के जब नीतीश कुमार अपना दल-बल के संगे गांधी मैदान में शपथ लेवे पहुंचले त नज़ारा अभूतपूर्व रहे। केरल से कश्मीर तक के तमाम गैर भाजपाई नेता उहाँ मौजूद रहन।

दर्जन भर मुख्यमंत्री अवुरी पूर्व मुख्यमंत्री के मौजूदगी धीरे-धीरे ओ आहट तक के संकेत देवे लागल, जवन कि भाजपा अवुरी मोदी खातिर कतहू से शुभ नईखे हो सकत। एगो सवाल अब बेर-बेर पुछल जाता – 2019 के लोकसभा चुनाव में केकर मुक़ाबला, केकरा से होई?

विपक्ष के कोशिश बा कि उ नीतीश कुमार के बिहार से निकाल राष्ट्रीय स्तर प लेआवे।

शुक्रवार के गांधी मैदान पहुंचल राहुल गांधी समेत भाजपा विरोधी दल के अधिकतर नेता अपना मौजूदगी से साफ संकेत दे देले कि नीतीश कुमार बेशक आज बिहार के मुख्यमंत्री बनत होखस, लेकिन विपक्ष उनुका के एकरा से आगे ले गईल चाहता।

गैर भाजपाई (गैर एनडीए समझल जाए) जवन तरीका से ए समारोह में जुटले, ओकरा से साफ समझ में आवता कि विपक्ष अपना के एकजुट करे के कोशिश शुरू क देले बा।

अभी तक गठबंधन के राजनीति के बहुत गंभीरता से ना लेवेवाली कांग्रेस पार्टी खातिर इ जीत संजीवनी से कम नईखे। पार्टी अब बिहार महागठबंधन मॉडल के बाकी राज्य में लागू करे के मन बना चुकल बिया।

ए काम खातिर राहुल गांधी भीरी नीतीश कुमार बेदाग अवुरी विकासवादी छवि वाला नेता मौजूद बा। मानल जाता कि राहुल अवुरी नीतीश, भाजपा के खिलाफ एगो अयीसन गठबंधन बनावे के कोशिश करीहे जवन कि गठबंधन से अलग बिहार के महागठबंधन निहन, एक देखाई दिही।

कुल मिलाके कोशिश बा कि आवेवाला समय में देश जनता के भीरी मात्र 2 विकल्प होखे – महागठबंधन चाहे भाजपा। बिहार के जीत कांग्रेस समेत तमाम भाजपा विरोधी दल के एगो राह देखावता, जेकरा शायद केहु छोड़ल नईखे चाहत।

देरी बा त सिर्फ एक कसौटी प महागठबंधन फॉर्मूला के सही उतरे के। जदी लालू प्रसाद के राजद के 'दबंगई' वाली सरकार के मुखिया नीतीश कुमार जनादेश के आदर करत बिहार में विकास के रफ्तार अवुरी सुशासन के कायम राखतारे त अगिला एक साल में मोदी विरोधी राजनीति के उ केंद्र में होइहे अवुरी विपक्ष के महागठबंधन के बने से रोकल लगभग असंभव हो जाई।

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