कब-कब स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबंध ना बनावे के चाही अवुरी काहें

कब-कब स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबंध ना बनावे के चाही अवुरी काहें

स्त्री-पुरुष के बीच के आकर्षण ए सृष्टि के एगो अटल सच्चाई ह। सृष्टि के रचना एह आकर्षण अवुरी मिलन प निर्भर बा, एहसे इ कहल ठीक होई कि स्त्री-पुरुष के संगम जदी सामाजिक, धार्मिक अवुरी पारिवारिक मान्यता के मुताबिक होखे त एकरा से जादा पवित्र शायद अवुरी कुछूओ ना होई।

जवन लोग धर्म के जानेले अवुरी ओकर पालन करेले, उ लोग मानेले कि बिना बियाह के स्त्री-पुरुष के मिलन ठीक ना होखे। हमनी के समाज स्त्री अवुरी पुरुष के बीच शारीरिक संबंध के तब मान्यता देवेला, जबकि ओ लोग के आपस में बियाह भईल होखे, ना त ए प्रकार के संबंध के नाजायज मानल जाला।

ओइसे त बियाह के बाद स्त्री-पुरुष के बीच संबंध पूरा तरीका से शुभ अवुरी सामाजिक मान्यता के मुताबिक होखेला, लेकिन ब्रह्मवैवर्त पुराण (वेदमार्ग के दसवाँ पुराण, जवना में भगवान श्रीकृष्ण के लीला, श्रीराधा के गोलोक लीला अवुरी अवतार लीला के वर्णन बा) के मुताबिक कुछ अयीसन दिन बा जवना दिन पति-पत्नी के बीच कवनों रूप में शारीरिक संबंध ना बने के चाही।

पुराण के मुताबिक, अमावस्या के रात पति-पत्नी के एक दूसरा के संगे शारीरिक संबंध ना बनावे के चाही। ए प्रकार के संबंध बियहूता जीवन प बाउर असर करेला। एकरा अलावे पूर्णिमा के रात में पति-पति के आसन एक दूसरा से अलग रहे के चाही।

संक्रांति के समय पति-पत्नी के नजदीक आवल ठीक ना होखे। एह समय में एक दूसरा के भीरी आईल बाउर हो सकता।

जदी तिथि के बात कईल जाए, त चतुर्थी अवुरी अष्टमी तिथि के पति-पत्नी के एक दूसरा से दूर रहे के चाही। पुराण के मुताबिक रविवार के दिन पति-पत्नी के एक दूसरा से दूर रहे के चाही। शारीरिक संबंध खातिर इ दिन ठीक ना होखे।

श्राद्ध भा पितृपक्ष में पति-पत्नी के संबंध बनावे के बारे में त भूलाईयो के ना सोचे के चाही। जवना दिन स्त्री भा पुरुष व्रत/उपवास कईले होखस, ओह दिन कवनों कीमत प शारीरिक संबंध बनावल ठीक ना मानल जाए।

नवरात्रि में स्त्री-पुरुष के बीच शारीरिक संबंध बनावल उचित नईखे। याद रहे मूल हिन्दू विचारधारा एगो धर्म ना बालुक जिनगी जिए के एगो तरीका ह। सफल जिनगी अवुरी खुशी के पावे खातिर बहुत जरूर बा हिन्दू परंपरा के अनुसार काम कईल जाए।

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