नेता, मंत्री अवुरी समर्थक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेसहारा क देले

मोदी के समर्थक, भाजपा के नेता अवुरी खुद मोदी के मंत्री अयीसन असहज हालत बनावत बाड़े कि लाख कोशिश के बावजूद मोदी चुप्प नईखन रह पावत अवुरी अपना बचाव में उतरे के परता, जेकरा चलते विपक्ष के हमला करे के मौका मिल जाता।

मोदी के समर्थक, भाजपा के नेता अवुरी खुद मोदी के मंत्री अयीसन असहज हालत बनावत बाड़े कि लाख कोशिश के बावजूद मोदी चुप्प नईखन रह पावत अवुरी अपना बचाव में उतरे के परता, जेकरा चलते विपक्ष के हमला करे के मौका मिल जाता।

नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बनले तब से लगातार उनुका क्षमता अवुरी मंशा प सवाल उठत आईल, बहुत मौका प जनता के समझावे कोशिश भईल लेकिन नतीजा कुछ ना निकलल, सभ जस-के-तस अपना काम में लागल बा।

आज फिर प्रधानमंत्री के मंशा चर्चा में बिया, सवाल उठता कि रोहित वेमुला के मौत प प्रधानमंत्री के बयान कहीं चुनावी राजनीति के हिस्सा त नईखे? कहीं अयीसन त नईखे कि उ ए मामला से छुटकारा पावे खाती फिर अंबेडकर के दुहाई देवे लगले?

मोदी के मंशा के सच्चाई त उ खुद जानस, लेकिन एक चीज़ तय बा कि प्रधानमंत्री लगातार अयीसन मुद्दा प घेरात आईल बाड़े। सबसे जादा चिंता के विषय इ बा कि प्रधानमंत्री के घेरे खाती विपक्ष के कवनो खास मेहनत नईखे करे के परत, खुद सत्ताधारी दल के लोग अयीसन हालत पैदा करतारे, जवना से निकल पावल मोदी खाती सबसे बड़ चुनौती बन जाता।

रोहित के मौत होखे चाहे असहनशीलता के मुद्दा, मोदी के सबसे जादा परेशान अपने लोग करतारे। ए लोग में कुछ त उनुका मंत्रिमंडल के हिस्सा बाड़े, जबकि कुछ भाजपा अवुरी संघ परिवार के नेता हवे। ए लोग के बयान के बाद जवन कसर रह जाता ओकर भरपाई मोदी के समर्थक करतारे।

कुल मिलाके जनता में शामिल मोदी के समर्थक, भाजपा के नेता अवुरी खुद मोदी के मंत्री अयीसन असहज हालत बनावत बाड़े कि लाख कोशिश के बावजूद मोदी चुप्प नईखन रह पावत अवुरी अपना बचाव में उतरे के परता, जेकरा चलते विपक्ष के हमला करे के मौका मिल जाता।

रोहित के मौत के बात कईल जाए त बिना कारण ए विषय के दलित-गैरदलित बनावल गईल। खुद स्मृति ईरानी दावा कईली कि रोहित दलित ना रहले। हो सकता कि रोहित दलित ना होखस, लेकिन मौत त सच्चाई बा, जवना से छुटकारा पावे खाती दलित-गैरदलित के बहस पैदा कईल कतहूँ से समझदारी नईखे हो सकत। स्मृति ईरानी के बयान ए मुद्दा के जीवन के लंबाई बढ़ा देलस, जवना के सुब्रामण्यम स्वामी के बयान अवुरी भड़का देलस।

राजनीति में हरेक मुद्दा चुनावी राजनीति के नज़र से महत्वपूर्ण होखेला, अवुरी ओकर फायदा सभ उठावेला, फिर उ आज विपक्ष में बईठल लोग होखस चाहे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। सभ बिना कारण सरकार के हरेक मुद्दा प घेरेला, घेरले बा, अवुरी घेरत रही।

जेकरा लागत होखे कि मोदी पहिला नेता हवे जीनिका के घेरल जाता त उ शहीद हेमराज के याद करे अवुरी मोदी के बयान के याद करे, मोदी अवुरी सुषमा के बयान के याद करे। का हेमराज के मुड़ी कटाए में तत्कालीन यूपीए सरकार के हाथ रहे?

शायद ना, कवनो सरकार अपना सैनिक के मुड़ी ना काटे, लेकिन तबहूँ एकरा खाती मनमोहन सिंह अवुरी कांग्रेस पार्टी के घेरल गईल, आज उहे काम कांग्रेस पार्टी समेत बाकी विपक्ष करता। हरेक मुद्दा प मोदी के घेरता अवुरी इहे राजनीति ह। कवन मुद्दा जनता के दिल में जगह बनाई एकर जानकारी केहु के नईखे एहसे हरेक राजनीति दल अवुरी राजनेता हरेक मुद्दा खाती सत्ता में बईठल लोग के ज़िम्मेवार ठरावेले।

असहनशीलता के मुद्दा उठल त सरकार के मंत्री अवुरी भाजपा-संघ के नेता फिर अपना अनापशनाप बयान से मोदी के अस्थिर कईले। हो सकता की हम चाहे आमिर खान, चाहे कारण जौहर चाहे बाकी लोग मोदी के पसंद ना करत होखस, हो सकता कि असहनशीलता के मुद्दा मनगढ़ंत होखे, झूठा होखे अवुरी खाली सरकार के बदनाम करे खाती होखे, लेकिन मोदी के समर्थक, मंत्री अवुरी नेता जवना प्रकार से पलटवार करतारे ओकरा से लागता कि देश में कुछ ना कुछ गड़बड़ त जरूर बा।

लोकतन्त्र बिना विपक्ष के खतम हो जाला, विपक्ष होखे के चाही अवुरी विपक्ष रही त कथित दुष्प्रचार तक होई, लेकिन ए कथित दुष्प्रचार से छूटकारा पावे खाती जदी पूरा सरकार एक आदमी प टुट परी त नतीजा में उ आदमी जनता के सहानुभूति पावे लागी अवुरी उ कथित दुष्प्रचार सच्चाई के रूप ले लीही।

आज हालत इ बा कि मंत्री, नेता अवुरी समर्थक प्रधानमंत्री के बचाव करे में लगातार उनुका के असहाय बनवले जातारे। छोटे-छोटे मुद्दा प अयीसन-अयीसन बात कहतारे, जवना के चलते खुद मोदी के आपन बचाव करे के परता। खुद आपन सफाई देवे के परता।

खाली विपक्ष के दोष देला से कुछ ना होई, हरेक नाकामी खाती विपक्ष के ज़िम्मेवार ठहरवला से कुछ ना होई, खुद मोदी के समर्थक समझस कि उ लोग का करतारे?

बिहार चुनाव में भाजपा के हार से पाकिस्तान में पड़ाका फाटे वाला बात त खुद अमित शाह कहले रहन, का उ मान लेले रहन कि पाकिस्तान संगे मोदी कबहूँ बातचीत ना करीहे? गिरिराज सिंह समेत कुछ जादा 'राष्ट्रवादी' लोग जब-तब अपना विरोधी लोग के पाकिस्तान भेजत अईले, का उहो लोग मान लेले रहन कि मोदी कबहूँ पाकिस्तान ना जईहे?

नतीजा सोझा बा। पाकिस्तान के ओर डेग बढ़ावल कूटनीतिक तौर प मोदी के एगो बड़ अवुरी सराहे जोग कदम रहे, लेकिन आज उनुका ए कदम के सराहेवाला केहु नईखे, जनता से लेके विपक्ष तक ए कदम खाती मोदी के निंदा करता!

आमिर खान जब असहनशीलता के मुद्दा उठवले त कुछ लोग उनुका के सिरिया अवुरी पाकिस्तान जाए के सलाह दिहले, भारी हँगामा भईल, लेकिन जादा शोर आमिर के मुफ्त सलाह देवे वाला लोग के रहे। फलां फिल्म बॉयकॉट कईल जाए, फलां फिल्म के रिलीज ना होखे देवे के – जईसन नारा तक सुनाईल। एक जने त 'दंगल' में 'मंगल' करे तक के चेता चुकल बाड़े। इ सभ काहें खाती? जदी आमिर खान के बात नईखे सहात त फिर हल्ला काहें खाती? इहे त उहो कहले रहन कि देश में अब केहु, केहु के बात नईखे सहत!

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