जीएसटी बिल जदी अभी पास हो जाए त का होई

जीएसटी बिल के मकसद आर्थिक विकास दर के बढ़ावल बा। एकर सीधा मकसद कवनो समान प केंद्रीय अवुरी राज्य स्तर के अलग-अलग टैक्स के जगह एक राष्ट्रीय बिक्री कर लगावल बा।

जीएसटी बिल के मकसद आर्थिक विकास दर के बढ़ावल बा। एकर सीधा मकसद कवनो समान प केंद्रीय अवुरी राज्य स्तर के अलग-अलग टैक्स के जगह एक राष्ट्रीय बिक्री कर लगावल बा।

संसद के मानसून सत्र शुरू हो गईल। सरकार के कोशिश बा कि पछिला मानसून सत्र नीहन अबकियों बेर कांग्रेस के अगुवाई में शोर-गुल के भेट मत चढ़ जाए।

देश के सबसे बड़ टैक्स सुधार मानल जाए वाला 'वस्तु एवं सेवा कर विधेयक' के लोकसभा पहिलही पारित क चुकल बिया।

जीएसटी बिल के मकसद आर्थिक विकास दर के बढ़ावल बा। एकर सीधा मकसद कवनो समान प केंद्रीय अवुरी राज्य स्तर के अलग-अलग टैक्स के जगह एक राष्ट्रीय बिक्री कर लगावल बा।

बिक्री कर के ए ढांचा (जीएसटी) के मूल रूप से साल 2011 में कांग्रेस के अगुवाई वाली यूपीए सरकार पेश कईले रहे। तब एकरा खिलाफ आज के केंद्र सरकार चलावे वाली भाजपा रहे।

बड़ा अचरज के बात बा कि एक समय ए बिल के विरोध करेवाली पार्टी आज एकरा के कवनो कीमत प पास करावल चाहतिया। हालांकि, कांग्रेस एह बिल के विरोध में नईखे, उ अलग-अलग मौका प साफ क चुकल बिया कि जदी मोदी सरकार ए बिल के पेश करी त पार्टी ओकरा के पास करावे में पूरा सहयोग करी, बशर्ते सरकार ओकरा आपत्ति के महत्व देवे।

लोकसभा में पहिलही पारित हो चुकल 'वस्तु एवं सेवा कर विधेयक' के दुनों सदन में पारित होखल जरूरी बा। संगही, ए बिल के लागू होखे से पहिले, देश के कम से कम आधा राज्य के विधानसभा से मंजूरी हासिल कईल तक जरूरी बा।

बदलाव
चूंकि जीएसटी लागू होखे से टैक्स चोरी कम हो जाई अवुरी टैक्स के उगाही बढ़ जायी, जवना के चलते देश के विकास दर 1 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक बढ़ जाई। चुकी एकर ढांचा पारदर्शी बा एहसे टैक्स दर में जारी कमी-बेसी दूर हो जाई, जेकरा चलते टैक्स से जुडल विवाद कम हो जाई।

जीएसटी के लागू हो गईला के बाद कई प्रकार के टैक्स कानून अवुरी नियम से मुक्ति मिल जाई, संगही सब कुछ ऑनलाइन होखे से एकरा के जामा कईल आसान हो जाई।

वर्तमान में लागेवाला बिक्री कर (वैट), सेवा कर, उत्पाद शुल्क समेत अलग-अलग प्रकार के टैक्स के हटा के जीएसटी लागू कईल जाई जेकरा से कवनो उत्पाद प एक दर से पूरा देश में टैक्स लागी। अयीसन भईल त देश के कवनो कोना में कवनो चीज़ के दाम लगभग एक बराबर हो जाई।

ए कर प्रणाली के लागू होखला के बाद चुंगी, केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी), अवुरी वैट निहन सभ टैक्स खत्म हो जाई।

चिंता
जीएसटी के लागू होखे से पहिले देश के लगभग सभ राज्य सरकार चिंता में बिया। सबसे बड़का सवाल बा कि जब राज्य के ओर से लागे वाला सभ टैक्स खतम हो जाई, त ओकरा भीरी राज्य के चलावे खाती पईसा काहां से आई?

एकरो से बड़ सवाल बा कि जवन नुकसान होई ओकर भरपाई काहाँ से होई? एगो अवुरी सवाल बा कि कवना फॉर्मूला से केंद्र सरकार ए टैक्स के उगाही में से राज्य के हिस्सा दिही?

राज्य के चिंता बा कि टैक्स प से ओकर नियंत्रण एकदम खतम हो जाई, राज्य अपना मन से कवनो चीज़ प टैक्स घटावे अवुरी बढ़ावे ना पईहे। राज्य सरकार के मांग बा कि, केंद्र सरकार ए सभ सवाल के जवाब देवे, संगही राज्य के भरोसा देवे कि ओकरा एक-एक पईसा खातिर केंद्र सरकार के सोझा हाथ ना पसारे के परी।

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