खुद बहुत बेर 'हारे' खाती चुनाव लड़ चुकल नीतीश कुमार आपन इतिहास भुला गईल बाड़े

खुद बहुत बेर 'हारे' खाती चुनाव लड़ चुकल नीतीश कुमार आपन इतिहास भुला गईल बाड़े

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कहनाम बा कि राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के अगुवाई वाला विपक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री मीरा कुमार के 'हारे' खाती उम्मीदवार बनवले बा। नीतीश जी के बात कुछ हद तक ठीको बा। आंकड़ा अवुरी संख्या के ताकत के होखेवाला फैसला में मीरा कुमार के पलड़ा भाजपा के उम्मीदवार रामनाथ कोविन्द के सोझा कमजोर बाटे।

लेकिन, चुनाव में सबकेहु त जीत नईखे सकत। जीत त एकही आदमी के होई। बाकी लोग त हरबे करीहे। लेकिन सवाल बा कि जदी सिर्फ जीते वाला चुनाव लड़ी त 'चुनाव' शब्द के मतलब का रह जाई? चुनाव काहें खाती होई?

लोकतन्त्र में छोट-बड़ सभ पद के फैसला चुनाव से होखेला। पंचायत के मुखिया से लेके राष्ट्रपति तक के चुनाव करे के प्रक्रिया तय बा। अयीसना में हरेक पद खाती एक से जादे उम्मीदवार के रहल जरूरी बा। बेशक आप केहु के समर्थन करी, चाहे केहु के समर्थन मत करी। जदी एकही उम्मीदवार रही त चुनाव होखबे ना करी।

नीतीश जी खुद अनगिनत बेर हरेवाला चुनाव लड़ल बाड़े, हारल बाड़े, तबहूँ उ अयीसन बात कहतारे। हो सकता कि कांग्रेस चाहे राजद, चाहे दुनो के संगे उनुकर मतभेद होखे, हो सकता कि उ भाजपा संगे मेलजोल बढ़ावल चाहत होखस, हो सकता कि उनुका नज़र में मीरा कुमार के मुक़ाबले रामनाथ कोविन्द जादे काबिल होखस, लेकिन हो त इहो सकता कि आप अपना जिद्द के पूरा करे खाती अयीसन बिना मतलब के बात कहले होखी?

अनगिनत बेर 'विचारधारा के लड़ाई' के नाम खुद नीतीश कुमार 'हारे' वाला चुनाव लड़ले अवुरी अयीसन उम्मीदवार के समर्थन कईले जवना के हार तय रहे। एकरा बावजूद उ अपना राजनीतिक परेशानी के छिपावे खाती अयीसन 'आलोकतांत्रिक' बहाना कईसे बना सकेले?

नीतीश जी अपना राजनीतिक जीवन के शुरुआत करत पहिला बेर 1977 में जनता पार्टी के टिकट प बिहार विधानसभा के चुनाव लड़ले आ हार गईले। असही 1980 के विधानसभा चुनाव भी हरले।

एकरा बाद जब लालू से मतभेद के चलते नीतीश कुमार 1994 में समता पार्टी बनवले अवुरी 1995 के बिहार विधानसभा के चुनाव लड़ले लेकिन फेर हार गईले। असही 2000 के विधानसभा चुनाव में भी समता पार्टी हारल।

जदी हार के तय मानत केहु चुनावे ना लड़े त नीतीश कुमार के बतावे के चाही कि बहुमत ना होखला के बावजूद उ साल 2000 में काहें खाती बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेले रहले? उ कवना करिश्मा के कल्पना कईले रहले, जेकरा से उनुका बहुमत मिल जाईत?

असही 2007 के राष्ट्रपति के चुनाव में यूपीए के उम्मीदवार प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के सोझा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भैरो सिंह शेखावत रहले। हालत अयीसन रहे कि हार के होखेवाला फजीहत के दर भाजपा तक शेखावत के आपन अधिकृत उम्मीदवार ना बनवले रहे। लेकिन तब नीतीश कुमार शेखावत के उम्मीदवारी के समर्थन कईले, जबकि उनुकर हार तय रहे।

तब के हालत अवुरी आज के हालत में फर्क नईखे, तब कांग्रेस के अगुवाई वाली यूपीए के लगे बहुमत रहे, आज भाजपा के अगुवाई वाली एनडीए के लगे बहुतमत बा। नीतीश कुमार तब कहले रहले कि 'हरेक मुक़ाबला एगो संदेश देवेला...'।

उत्तर प्रदेश में जदयू के केहु नामलेवा नईखे। जदी जदयू केहु के उत्तर प्रदेश के कवनो चुनाव में उम्मीदवार बनाई त आज के स्थिति में ओकर जमानत जब्त भईल तय बा, अयीसना में नीतीश कुमार खुद काहें खाती उत्तर प्रदेश में प्रचार करत रहले अवुरी जब सपा-कांग्रेस गठबंधन इनिका के भाव ना दिहलस त नाराजगी भी जतवले। का नीतीश जी उत्तर प्रदेश में हारे खाती चुनाव लड़ल चाहत रहले?

खैर, उत्तर प्रदेश में त चुनाव ना लड़ले, शायद हार के तय मानत अयीसन फैसला क लेले होईहे, लेकिन दिल्ली नगर निगम के चुनाव में जदयू के कतना प्रतिशत वोट अवुरी कतना सीट मिलल? नीतीश जी खुद इहाँ जदयू के प्रचार कईले, एकरा बावजूद हरेक सीट प जदयू उम्मीदवार के जमानत जब्त भईल।

जदयू के शत प्रतिशत उम्मीदवार के जमानत जब्त होखल कवनो अचरज के बात ना रहे, इ त पहिले से तय रहे, एकरा बावजूद नीतीश कुमार उम्मीदवार उतरले अवुरी भारी संख्या में दलबल के संगे दिल्ली पहुँच के प्रचार कईले।

नीतीश जी, जब सिर्फ जीते खाती चुनाव लड़ल जाला त आप दिल्ली के नगर निगम चुनाव, निजी तौर प 1977 आ 1980 के विधानसभा चुनाव, समता पार्टी के नेता के रूप में 1995 आ 2000 के बिहार विधानसभा के चुनाव काहें लड़नी? का तब आपके आत्मा इ 'हारे' वाला फॉर्मूला ना देले रहे?

अधिकांश गैर कांग्रेसी, गैर कम्यूनिस्ट अवुरी गैर भाजपाई दल अपना के समाजवादी अवुरी लोहिया-जेपी के अनुयाई मानेला। नीतीश कुमार खुद अपना के राम मनोहर लोहिया अवुरी जयप्रकाश नारायण के नीति के समर्थक बतावेले, एकरा बावजूद उ कहतारे कि 'हारे खाती चुनाव लड़ावल जाता'।

शायद नीतीश जी लोहिया के ओ बात के भुला गईल बाड़े जवन कि उ जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े के मौका प कहले रहले। ए सीट से लोहिया के हार तय रहे, जवना के देखत कुछ लोग उनुका के अयीसन ना करे के सलाह दिहले।

नेहरू के खिलाफ चुनाव लड़े से रोके के प्रयास करेवाला लोग से लोहिया कहले रहले "हम जानतानी कि हम पत्थर से टकराए जातानी, शायद हमरा टक्कर से पत्थर ना टूटे, लेकिन जदी हमरा टक्कर से उ दरकियो गईल त हम एकरा के आपन कामयाबी मानब।"

मतलब साफ रहे, तब नेहरू लोकप्रियता के शिखर प रहले, उनुका खिलाफ चुनाव लड़े के मतलब रहे 'जमानत जब्त', लेकिन बावजूद लोहिया उनुका खिलाफ चुनाव लड़े के हिम्मत कईले। मकसद रहे, लोग में ताकतवर के सोझा खाड़ा होखे के हिम्मत पैदा कईल। कांग्रेसी विचारधारा के खिलाफ समाजवादी विचारधारा के अलख जगावल।

  • Share on:
Loading...