कान्हा आव ना हमरी नगरिया अबकी बेर

कान्हा आव ना हमरी नगरिया अबकी बेर

माया के लेई चदरिया अबकी बेर
कान्हा आव ना हमरी नगरिया अबकी बेर॥

बन जाइब हम गाँव के ग्वालिन
देखि देखि जरिहे गांव के मालिन।
होई जा प्रेम के कहरिया अबकी बेर
कान्हा आव ना हमरी नगरिया अबकी बेर॥

बन जाइब हम गाँव के गोपी
रास तू रचिह, केहू न टोकी।
दूर तू करिदऽ अन्हरिया अबकी बेर
कान्हा आव ना हमरी नगरिया अबकी बेर॥

यसोदा के खेलिह बन के लाला
देखि देखि बिहसी ब्रज के बाला।
राधा के बनिह संवरिया अबकी बेर
कान्हा आव ना हमरी नगरिया अबकी बेर॥

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