अमेरिका में जदी केहु यूपी-बिहार के भेटा जाए, त अईसन व्यवहार करी जईसे कबो भोजपुरी सुनलही ना होखे

अमेरिका में जदी केहु यूपी-बिहार के भेटा जाए, त अईसन व्यवहार करी जईसे कबो भोजपुरी सुनलही ना होखे

सोचनी की भोजपुरी में लिखीं। भोजपुरी हमार पहला बोली ना ह, लेकिन, छोटे प से सुनत बानी। जब छोट रहनी तब भोजपुरी से एतना लगाव ना रहे , लेकिन बोले के अवुरी समझे के कोशिश करत रहनी। कब अंग्रेजी अवुरी हिंदी, भोजपुरी प हावी हो गईल, पते न चलल।

नयका पीढ़ी के भोजपुरी बुझा जाए उहे बहुत बा। बहुत लोग के त लाजो लागेला। ए में लोग के गलती नइखे, भोजपुरी संगे हमेशा सौतेला व्यवहार भईल। भोजपुरी लिखे तक हमनी के हिंदी (देवनागरी) में सिखनी।

एकरा से पहिले की हम भुला जाईं, रउआ सभे के बता दी की हमार भोजपुरी तनिका मिक्स बा। बाबूजी पूर्वांचल से बाड़ें, त माँ भोजपुर से, बाकी बिहार के इंफ्लुएंस (influence/असर) बा।

केहु नोटिस कईलस की ना... बीच बीच में हम एक दू गो अंग्रेजी के शब्द यूज़ (use) करतानी। बिहारी लोग भोजपुरी बोले में आ हिंदी बोले में, दुन्नो में अंग्रेजी के एक दुगो वर्ड यूज़ करेला। कबो सब्ज़ी खरीदे जाईं, सभ केहु "एक लंबर (number) के सब्ज़ी" मांगेला।

देखीं, फिर हम टॉपिक से डिग्रेस (digress/भटक गईल) हो गईनी, लेकिन इहो ज़रूरी होखेला। तबे त आदमी सुनल सुनाईल, ऐने -ओने के कहानी सुनावेला।

जब हम अमेरिका अईनी त लागल की "चलऽ, अंग्रेजी आवेला, मैनेज (manage) हो जाई "। लेकिन का बतायीं, जब रउआ अमेरिका में रोड प चलम, त अंग्रेजी से ढ़ेर दूसर भाषा सुनाई दी। स्पेनिश, रूसी, फ्रेंच, अवुरी राम जाने कवन कवन भाषा।

हमरो जोश चढ़ल अवुरी स्पेनिश सीखे लगनी। राम जी के कृपा से थोड़ा बहुत समझ लेवेनी अवुरी बोल भी सकीले। लेकिन हमार अनुभव बा कि कबो-कबो, स्पेनिश सुने में भोजपुरी जईसन लागेला।

हम भोजपुरी भजन सुने अवुरी भोजपुरी चैनल देखे शुरू कईनी। एहीजा, अमेरिका में जदी केहु यूपी-बिहार के मिल जाए, त अईसे देखावेला, जईसे कबो भोजपुरी सुनलही ना होखे। जदी ओ समय, ओ आदमी के घर (गांव) से फ़ोन आ जाए, त तुरंते रउआ समझ जाईब कि ए आदमी के पहिले के भाषा भोजपुरी बा।

एनीवे (anyway/ख़ैर)... नीमन नीमन बात करे के चाहीं।

हमरा जब जब इंडिया आवे के मौका मिलल, तब-तब हमरा सबसे जादे इंटरेस्ट (interest/रुचि) जादे-से-जादे लोग से बात करे में रहे। घर के लोग से, बहरी के लोग से। केहु भोजपुरी बोले त हमहुँ भोजपुरी में बतिया लेत रहनी। तब हम सोचनी, की काहें ना भोजपुरी में लिख के देखीं!

हमार दादी बोलत रही कि कभी-कभी त बात करे के मन करेला। ओहीतरे, कबो-कबो त लिखे के मन करेला। लेकिन ओकरो खाती सोचे के पड़ेला। चलीं, तनी चिंतन मनन कईल जाए।

भोजपुरी भाषा के फ्युचर (future/भविष्य) कईसन लागता? हमनी के कईसे भोजपुरी के बचा के रख सकेनी? अईसने बहुत सवाल बा।

पहिला बात कि कवनो चीज़ के ज़ोर-जबरदस्ती से करे से फायदा नईखे। दूसर, जब तक रिटर्न वैल्यू (return value) न देखाई दिही, तब तक काहें खाती केहु भोजपुरी प टाइम खर्च करी?

संस्कृत, पाली के हाल त सभ केहु देख चुकल बा। हाँ, जदी भोजपुरी के यूपीएससी (UPSC/संघ लोक सेवा आयोग) से जोड़ दिहल जाए, त हो सकेला। लोग भोजपुरी में रूचि लिहे अवुरी यूपीएससी के तैयारी के खाती पढ़ीहे। अब एकर इ मतलब नइखे कि सरकार बिहार अवुरी उत्तर प्रदेश में भोजपुरी भाषा के स्कूल में अनिवार्य बना देवे। अयीसन करे से पूरा पीढ़ी सफर (suffer/ कष्ट भोगल) करी।

एक काम जवन कि हमनी के क सकेनी। उ बा, भोजपुरी के बारे में लोग के जागरूक करे के। लोक गीत, इ मामला में बहुते नीक रही। दुगो फायदा होइ : पहिला कि आज के पीढ़ी अवुरी आवे वाला पीढ़ी हमनी के लोक गीत, बियाह के गीत अवुरी पूजा पाठ के गीत जानी। दूसर, कवनो चीज़ के याद करे खाती गीत संगीत अच्छा माध्यम होखेला।

आज के हालत में जसहीं भोजपुरी गीत के बात होखेला, लोग के बुझाला कि कवनो अश्लील चीज़ के बारे में बात होखे लागल बा। हमनी के इ सोच के अवुरी नजरिया के बदले पड़ी। इ सभ तबहिए पॉसिबल (possible/संभव) बा, जब लोग अच्छा कंटेंट (सार्थक/सुघड़/बढ़िया) वाला गीत के लिखीहे अवुरी प्रचार प्रसार करीहे।

एकनी के अलावे भी बहुत तरीका बा भोजपुरी के प्रचार -प्रसार करेके, लेकिन ओकनी प चर्चा फेर कबहूँ कईल जाई।

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