नीतीश कुमार खाती बाउर संकेत, जदयू में बगावत के बयार, श्याम रजक दलित के हक छीने के आरोप लगवले

नीतीश कुमार खाती बाउर संकेत, जदयू में बगावत के बयार, श्याम रजक दलित के हक छीने के आरोप लगवले

नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़ के भाजपा संगे हाथ मिलावल महंगा पर सकता। एक ओर भाजपा संगे जदयू के तालमेल बिगड़त देखाई देता, त दोसरा ओर जदयू के भीतरी एगो बड़ बवाल इंतज़ार करता।

हालांकि दूर से देखला प लागता कि नीतीश कुमार बहुत बढ़िया हालत में बाड़े, लेकिन अब जबकि महागठबंधन के टूटला करीब 3 महीना हो चुकल बा त साफ संकेत मिलता कि जदयू के भीतरी एगो ज्वालामुखी उबाल मारता, जवन कि कबहूँ फाट जाई।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी लोग में गिनाए वाला श्याम रजक आरक्षण अवुरी पिछड़ा वर्ग के मुद्दा के उठावत इशारा-इशारा में नीतीश कुमार आरक्षण खतम करे के अभियान प चुप्पी साधे के आरोप लगवले। रजक कहले कि पिछड़ल समाज के मुख्यधारा में ले आवे के जवन सपना भीमराव आंबेडकर अवुरी महात्मा गाँधी देखले, उ आज़ादी के सात दशक बीतला के बादो पूरा नईखे भईल।

उ कहले कि भूख के शांत करे खाती कूड़ा के ढ़ेर में से लोग के अनाज बीनत देख बहुत दुख होखता। इशारा-इशारा में भाजपा अवुरी नीतीश सरकार प हमला करत रजक कहले कि जेकरा प पिछड़ा अवुरी गरीब के भलाई खाती नीति बनावे के जिम्मेवारी बा, जेकरा प ए नीति के लागू करे के जिम्मेवारी बा, असल में ओकरा नियत में खोट बाटे।

रजक कहले कि आज जवन लोग सत्ता में बाड़े ओ लोग के जिम्मेवारी बा कि मुख्यधारा से किनारा हो चुकल लोग के उ लोग मुख्यधारा में ले आवस। लेकिन सत्ताधारी लोग त हमनीए (पिछड़ा वर्ग) के अधिकार छीने में लागल बाड़े। आरक्षण के खतम कईल चाहतारे।

बिना नीतीश कुमार के नाम लिहले, उनुका प आरक्षण खतम करे में सहयोग करे के आरोप लगावत रजक कहले, "सबसे बड़ दुख त ए बात के बा कि जवन लोग आरक्षण सबसे बरियार पक्षधर रहले, उहो लोग आज एकरा से मुंह मोड़ लेले बाड़े।" उ कहले कि अब जबकि बाकी लोग मुंह मोड़ लेले बाड़े त जरूरी हो गइल बा गांव के पगडंडी से होखत, ब्लॉक, जिला अवुरी राज्य स्तर प एकरा खाती लड़ाई लड़ल जाए।

मालूम रहे कि महागठबंधन से पहिले जब बिहार में एनडीए के सरकार के रहे त श्याम रजक के तूती बोलत रहे। रजक के नीतीश कुमार के करीबी लोग में गिनल जाला। महागठबंधन के दौर में जब-जब राजद के कवनो नेता नीतीश कुमार के खिलाफ कुछ बोलले, श्याम रजक आगे बढ़के ओकर जवाब देले, लेकिन वर्तमान हालत में लागता कि उ अपना पार्टी अवुरी पार्टी के नेतृत्व से खुश नईखन।

बिहार के राजनीति में मानल जाला कि नीतीश कुमार के जदयू के कवनो जातिगत आधार नईखे। हालांकि दलित अवुरी पिछड़ा के अधिकांश मतदाता नीतीश कुमार के नीति से खुश रहले लेकिन पछिला दु-अढ़ाई साल के बीच जवन-जवन घटना जदयू में भईल ओकरा से आशंका बा कि दलित-पिछड़ा वर्ग कहीं जदयू से दूर मत हो जाए।

पछिला दु-अढ़ाई साल में जदयू के छोड़े वाला लोग में अधिकांश नाम दलित वर्ग के नेता के बाटे। जीतनराम मांझी, रमई राम, सकुनी चौधरी समेत दर्जन भर नेता ए समय में नीतीश कुमार के साथ छोड़ चुकल बाड़े। ए लोग के अलावे आज जवन दलित नेता जदयू में बाड़े, उहो लोग अपना अनदेखी के चलते नाराज़ देखाई देतारे।

जहां तक आरक्षण के मुद्दा बा, एक ओर बिहार विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी मोर्चा खोलले बाड़े त दोसरा ओर श्याम रजक के नाम सुनाई देवे लागल। दुनो नेता फिलहाल नीतीश कुमार के नाम त नईखन लेत लेकिन आरक्षण के मुद्दा प भाजपा प हमला करत नीतीश कुमार कठघरा में जरूर खाड़ा करतारे।

दुनो नेता कहतारे कि आरक्षण खतम करे के प्रयास होखता। अब जबकि नीतीश कुमार के सरकार भाजपा के मदद से चलतिया त ए दावा के सीधा मतलब होखता कि नीतीश कुमार आरक्षण के खतम करे में या त सहयोग करतारे, या ए कार्रवाई के रोके खाती कवनो प्रयास नईखन करत।

ए सभसे जवन संकेत मिलता उ कुल मिलाके नीतीश कुमार अवुरी जदयू के राजनीति खाती शुभ नईखे। काहेंकी चुनाव के दौरान अवुरी चुनाव के बाद खुद नीतीश कुमार आरक्षण के मुद्दा प भाजपा के जोरदार विरोध करत आईल बाड़े अवुरी भाजपा प आरक्षण खतम करे के साजिश रचे के आरोप लगावत आईल बाड़े।

बिहार के राजनीति के जानकार बतावतारे कि जईसे-जईसे समय बीतत जाई, ओइसे-ओइसे जदयू के भीतरी जवन ज्वालामुखी उबलता, ओकर लावा बहरी आवत जाई। भाजपा के कट्टर हिन्दुत्व वाली नीति के चलते जदयू के अधिकांश नेता माने लागल बाड़े कि अगिला चुनाव में ओ लोग के भारी परेशानी होखेवाला बा। एक ओर अल्पसंख्यक समुदाय दूर होखत देखाई देता त दोसरा ओर आरक्षण के मामला गरमाए से पिछड़ा वर्ग भी दूर हो जाई।

अयीसना में सवाल सिर्फ अतने बा, का जदयू के ज्वालामुखी फाटी? जदी फाटी त कहिया फाटी?

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