'माई बिसरी, बाबू बिसरी, पंचकोशवा के लिट्टी-चोखा कबहूँ ना बिसरी'

'माई बिसरी, बाबू बिसरी, पंचकोशवा के लिट्टी-चोखा कबहूँ ना बिसरी'

आज अगहन के पंचमी ह। आज बिहार अवुरी उत्तर प्रदेश के कुछ जिला में पंचकोश के लिट्टी-चोखा खाए के रेवाज बा। आज बिहार के भोजपुर, रोहतास, बक्सर, कैमूर अवुरी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, बलिया के अधिकांश घर में लिट्टी-चोखा बनेला अवुरी लोग बहुत चाव से एकर स्वाद लेवेले।

लेकिन जवन लिट्टी बक्सर के चरित्रवन में लागेला ओकर खास महत्व बा। आज के दिन के अपना गांव से पांच कोश दूर लिट्टी लगावे के अवुरी खाए के परंपरा रहल बा। नदी के किनारा बसल अधिकांश गांव के लोग नदी के पार क के दियारा में लिट्टी लगावेले, लेकिन जहां नदी नईखे उहाँ के लोग बक्सर के चरित्रवन में लिट्टी लगावे पहुँच जाले।

चुकी चरित्रवन अवुरी बक्सर के सीधा संबंध भगवान राम से बाटे, एहसे आज चरित्रवन के पंचकोशी लिट्टी-चोखा के खास महत्व बा। करीब 17-18 लाख के आबादी वाला बक्सर जिला अवुरी आसपास के सभ जिला के बहुत अधिकारी, कर्मचारी अवुरी लोग एक संगे चरित्रवन पहुंचेले अवुरी लिट्टी-चोखा के आनंद लेवेले।

मानल जाला कि त्रेता युग में भगवान श्री राम अवुरी लक्ष्मण शिक्षा खाती बक्सर (सिद्धाश्रम) आईल रहले अवुरी पांच ऋषि से आशीर्वाद लेले रहले, जवना के अंतिम पड़ाव चरित्रवन में विश्वामित्र मुनी के आश्रम रहे।

मानल जाला कि जवना दिन भगवान श्री राम अवुरी लक्ष्मण चरित्रवन पहुंचल रहले ओ दिन अगहन के पंचमी रहे अवुरी महर्षि विश्वामित्र ओ लोग के लिट्टी- चोखा खियवले रहले। याद रहे कि भगवान श्री राम के हाथे तड़का के वध भी चरित्रवन में भईल रहे।

charitravan on panchkoshi litti chokha

एही सभ मान्यता के चलते अगहन के पंचमी के दिन ए क्षेत्र में लिट्टी-चोखा खाईल जाला अवुरी ओकरा में बक्सर के चरित्रवन के लिट्टी चोखा के खास महत्व बाटे। अगहन के पंचमी तिथि के चरित्रवन के कोना-कोना लोग अवुरी लिट्टी लगावे खाती बोझल गोइंठा के आड़ा से भर जाला। आसमान आड़ा से निकलत धुआँ से करिया हो जाला।

पंचकोश के लिट्टी-चोखा के महिमा अतने से समझ लिही कि ए इलाका में एगो कहाउत बा -'माई बिसरी, बाबू बिसरी, पंचकोशवा के लिट्टी-चोखा कबहूँ ना बिसरी'। इहे कारण बा कि पंचकोश के लिट्टी अजूओ चाउमीन-बर्गर आ पिज्जा प भारी परतिया अवुरी ए गौरवशाली परंपरा के कायम रखले बिया।

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