भोजपुरी शिरोमणि मैनावती देवी श्रीवास्तव 'मैना' मौन हो गईली

स्वर्गीय मैनावती देवी श्रीवास्तव के फ़ाइल फोटो

स्वर्गीय मैनावती देवी श्रीवास्तव के फ़ाइल फोटो

भोजपुरी लोकगीत में सामाज के उकेरे वाली लोकगायिका मैनावती देवी श्रीवास्तव के आवाज़ हमेशा-हमेशा खाती मौन हो गईल। करीब 23 दिन तक बेमार रहला के बाद मैनावती देवी गुरुवार के ए दुनिया से बिदाइ ले लिहली।

बिहार के सिवान जिला के पचरूखी में 1मई 1940 के जन्म लेवे वाली अवुरी गोरखपुर के कर्मभूमि बना के 1974 में आकाशवाणी गोरखपुर से लोकगायन के शुरूआत करेवाली मैनावती देवी श्रीवास्तव के संगे-संगे गोरखपुर आकाशवाणी के इतिहास जुडल बा। असल में मैनावती देवी अवुरी गोरखपुर आकाशवाणी के शुरुआत एकही गीत से भईल रहे।

मैनावती देवी लोकगीत के सहेजे, बढ़ावे आ प्रचार-प्रसार प बहुत ज़ोर दिहली अवुरी लोकगीत में परंपरा अवुरी संस्कार के परोसे के काम खूबी नीक से कईली। प्रयाग संगीत समिति से 'संगीत प्रभाकर' के डिग्री पावेवाली मैनावती देवी गायिका के संगे-संगे कवियत्री अवुरी लेखिका भी रहली अवुरी संगीत संयोजक के रूप में लंबा समय तक आकाशवाणी के साथे-साथे दूरदर्शन में बेशकीमती योगदान दिहाली।

आज मैनादेवी हमनी के बीच नईखी लेकिन इनिका गायिकी के विरासत के इनिकर बेटा राकेश श्रीवास्तव आगे बढ़ावतारे।

जहाँ मेढ़िये खेतवा चरि जाला
का करिहें भइया रखवाला।
जहाँ नदिये पानी पी जाई,
जहाँ पेड़वे फलवा खा जाई,
जहवाँ माली गजरा पहिरे
ऊ फूल के बाग उजरि जाला। जहाँ...
जहाँ गगन पिये बरखा पानी,
धरती निगले सोना-चानी,
जहवाँ भाई-भाई झगड़े
~ मैनावती देवी श्रीवास्तव

भोजपुरी लोक गायकी के सम्राट कहाए वाला भिखारी ठाकुर के 94वां जन्मदिवस के मौका प पहिला बेर 1981 में बिहार में मैनावती देवी के "भोजपुरी लोक साधिका" सम्मान मिलल। एकरा बाद 1994 में "अखिल भारतीय भोजपुरी परिषद, लखनऊ" के ओर से ठुमरी गायिका गिरजा देवी के हाथ से उनुका के "भोजपुरी शिरोमणि" सम्मान मिलल।

ए सभके अलावे "भोजपुरी रत्न" (2001), "भोजपूरी भूषण" (2005), "नवरत्न" (2006), "लोकनायक भिखारी ठाकुर" (2012) , "लाइफ टाइम एचिवमेन्ट अवार्ड" अवुरी "गोरखपुर गौरव" जइसन सम्मान से मैनादेवी के अलग-अलग समय प सम्मानित कईल गइल।

मैनादेवी गायकी के अलावे लेखनी में बहुत काम कईली जवना में "गांव के गीत" (भोजपुरी गीत), "श्री सरस्वती चालीसा", "श्री चित्रगुप्त चालीसा", "पपिहा सेवाती" (भोजपुरी गीत), "पुरखन के थाती" (भोजपुरी पारंपरिक गीत) नाम से प्रकाशित किताब प्रमुख बा जबकि "कचरस" (भोजपुरी गीत), "याद करे तेरी मैना", "चोर के दाढ़ी में तिनका" (कविता) अवुरी "बे घरनी घर भूत के डेरा" (कहानी) जइसन किताब अभी प्रकाशन के दौर में बा।

एतना सभ काम कईला के बावजूद दुर्भाग्य से मैनादेवी के जीवन भर कवनों राजकीय सम्मान ना मिलल तबहुँ उ भोजपुरी के सेवा में रात दिन अवुरी अंतिम सांस तक लागल रहली।

अइसन महान भोजपुरी सेवी के शत शत नमन।

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