बिहार सरकार के आदेश के चलते कुम्हार के आवां बुताईल, हाईकोर्ट सरकारी दर से बिक्री प रोक लगवलस

बिहार सरकार के आदेश के चलते कुम्हार के आवां बुताईल, हाईकोर्ट सरकारी दर से बिक्री प रोक लगवलस

पटना हाईकोर्ट से ओर से बिहार लघु खनिज नियमावली, 2017 लागल अंतरिम रोक के चलते बिहार में बालू, गिट्टी अवुरी माटी के बरियार संकट खाड़ा हो गईल बा। पटना हाईकोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद बिहार के खान एवं भूतत्व विभाग बालू, गिट्टी अवुरी माटी के खरीद-बिक्री अवुरी निबंधन प पूरा तरीका से रोक लगा देले बा।

सोमवार के ए मामला से जुडल एगो अवुरी याचिका के सुनवाई करत न्यायधीश अजय कुमार त्रिपाठी आ न्यायधीश राजीव रंजन प्रसाद के खंडपीठ अपना आदेश में सरकारी दर प लाइसेंसधारी के माध्यम से बालू, गिट्टी अवुरी माटी के खरीद बिक्री के आदेश प रोक लगा देलस। एकरा से पहिले पटना हाईकोर्ट लघु खनिज नियमावली 2017 प रोक लगवले रहे।

ये दुनो आदेश के बाद घर, मकान, सड़क समेत बाकी सभ निर्माण के काम पूरा तरीका से ठप्प हो चुकल बा। हालत त अयीसन हो गईल बा कि अब कुम्हार के आवां (माटी के बर्तन पकावे खाती जरावल जाए वाली आग) तक बुताए लागल बा अवुरी चाक के रफ्तार थम गईल बा।

एक समय सामाजिक जीवन में प्रमुख भूमिका निभावे वाली कुम्हार जाति के लोग के जीवन माटी के कटाई अवुरी उठाव से जुडल बिहार सरकार के आदेश के चलते खुद चाक प घुमे लागल बा। माटी के अपना अंगुरी से धन के देवी लक्ष्मी, ज्ञान के देवी सरस्वती अवुरी सिद्धि दाता श्री गणेश के रूप देवे से लेके, बर्तन बनावे में माहिर ए वर्ग के लोग प ना त सरस्वती के कृपा बा, ना लक्ष्मी के। एह बीच माटी के उठाव प लागल रोक ए लोग के जीवन के आवां में झोंक देले बा।

भोजपुर के मुख्यालय आरा से सटल गांगी इलाका के निवासी किशोर पंडित कहले कि पहिले उ चुक्कड़ से लेके मूर्ति तक बनावत रहले, एकरा खाती बैलगाड़ी अवुरी ट्रैक्टर प माटी आवत रहे, लेकिन सरकार के ओर से माटी के कटाई, ढ़ोवाई खाती लाइसेंस होखल जरूरी बना दिहल गईल। सिर्फ लाइसेंस के जरूरी कईला के चलते माटी महंगा हो गईल अवुरी कारोबार बंद होखे के कगार प पहुंचल गईल।

सोमवार के जारी आदेश के बारे में अनजान किशोर कहले कि माटी के महंगा होखला के चलते पहिलही हमनी के कारोबार बंद होखे के कगार प रहे, अब जदी रोक लाग गईल बा त मान लिही कि हमनी के कारोबार बंद हो जाई अवुरी मजबूरी में बाल-बच्चा के चाक नचावल छोड़ के मजदूरी करे के पड़ी।

रामकिशुन पंडित, गजेंद्र पंडित अवुरी किशोर पंडित जईसन कुम्हार जाति से जुडल सभ लोग के कहनाम बा कि उ लोग पहिले माटी का बर्तन, चुक्कड़, सुराही, गगरी, मेटा समेत बहुत चीज़ बनावत रहले। पलास्टिक के बनल कप ओ लोग से चुक्कड़ के कारोबार छिनलस त समय के संगे सुराही अवुरी गगरी के काम लगभग खतम हो गईल। मेटा, चुक्कड़ समेत माटी के बर्तन के इस्तेमाल अब सिर्फ बियाह-शादी, क्रिया-क्रम अवुरी पुजा-पाठ में रह गईल बा।

उ लोग कहले कि गांव-जवार में होखेवाला भोज में पहिले पानी-चाय खाती चुक्कड़ के इस्तेमाल होखत रहे, लेकिन अब ओकर जगह प्लास्टिक के गिलास लेलस, गगरी-सुराही के बिक्री नाममात्र के रह गईल बा, अयीसना में मुफ्त मे मिलेवाली माटी खाती जदी भारी कीमत चुकावे के पड़ी त हमनी के मजबूरी में मजदूरी करे के पड़ी ।

ओने बिहार के खान एवं भूतत्व विभाग के विशेष सचिव अरुण प्रकाश कहले कि सरकार कोर्ट के आदेश पूरा सम्मान करी अवुरी ओकरा मुताबिक सरकारी दर प बालू-गिट्टी के बिक्री प रोक लगा दिहल जाई। सरकारी दर के मुताबिक बालू के उठाव प प्रति 100 क्यूबिक फीट प 900 रुपया बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड के दिहल जरूरी रहे। अब सरकार ए रकम के वसूली ना करी।

हालांकि अरुण प्रकाश दावा कईले कि राज्य में बालू अवुरी गिट्टी के बहुत स्टॉक बा अवुरी जे केहु ऑर्डर करी ओकरा के 100 क्यूबिक फीट बालू (लाल अवुरी पीला) 2,400 रुपया में दिहल जाई। ए दर के हिसाब से एक ट्रक (6 पहिया वाली 1612/13 एलपी) प लोड़ तीन फीट बालू के कीमत करीब 7,200 रुपया होई, जवना में भाड़ा, लोडिंग अवुरी अनलोडिंग अलग से देवे के होई। कुल मिलाके उठाव के जगह से 50 किलोमीटर दूर तीन फीट बालू के कीमत 10 से 12 हज़ार रुपया के बीच हो जाई।

असही गिट्टी के बारे में अरुण प्रकाश बतवले कि 3/4 इंच अवुरी 5/8 इंच गिट्टी 6,750 रुपया प्रति 100 क्यूबिक फीट के दर से उपलब्ध बाटे। जदी एकरा के ट्रक के हिसाब के जोडल जाए त 6 पहिया वाली 1612/13 एलपी ट्रक प लोड तीन फीट गिट्टी के कीमत 20,250 रुपया होई जबकि भाड़ा, लोडिंग, अनलोडिंग के खर्च अलग से देवे होई।

जहां तक माटी के सवाल बा, त ए बारे में अरुण प्रकाश कुछ ना कहले। उ ना बतवले कि माटी के बिक्री खाती सरकार कवन इंतजाम कईले बिया।

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