बिहार में सटले, लेकिन देश भर से हट गईले

बिहार में सटले, लेकिन देश भर से हट गईले

बिहार में बेशक जदयू अवुरी भाजपा के बीच गठबंधन बाटे लेकिन इ गठबंधन लागता कि समय के जरूरत बा। जदी समय के जरूरत ना होईत त कम से कम गुजरात अवुरी झारखंड में नीतीश कुमार के राग जरूर सुनाई दिहीत। गुजरात के त अलग-अलग कारण के चलते अनदेखी कईल जा सकता, लेकिन झारखंड में अनदेखी कईल गलती होई।

अभी तक झारखंड में पैर जमावे के कोशिश करत जदयू महागठबंधन के दौर में बहुत सक्रिय रहे। बिहार के मुख्यमंत्री अवुरी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार लगातार शराबबंदी के बहाना झारखंड के दौरा करत रहले अवुरी राज्य सरकार प हमला करत रहले। लेकिन बिहार में समीकरण बदलला के बाद नीतीश के दौरा लगभग खतम हो चुकल बा।

राजनीतिक मजबूरी में नीतीश कुमार बेशक अपना के बिहार तक सीमित क लेले होखस लेकिन जदयू के प्रदेश इकाई में भारी उठापटक होखता। भाजपा एक ओर जदयू के अनदेखी करत तनिको महत्व नईखे देत त दूसरा ओर नीतीश कुमार के रुख से झारखंड जदयू के नेता परेशान बाड़े।

भाजपा संगे ना के बरोबरी तालमेल के चलते हालत अयीसन हो चुकल बा कि जदयू के कवन नेता, कब अवुरी कहाँ पार्टी के छोड़ के दोसरा पार्टी में चल जाई, इ केहु नईखे जानत। पछिला कुछ समय में बहुत नेता एही तर्ज प पार्टी के अलविदा बोल चुकल बाड़े।

ए सभके पीछा एकमात्र कारण बिहार में भाजपा संगे गठबंधन बा। महागठबंधन के दौर में जदयू अवुरी बाबूलाल मरांडी के बीच के समीकरण बहुत बढ़िया रहे। बाबूलाल मरांडी के पार्टी - झारखंड विकास मोर्चा के जदयू में विलय तक के तैयारी रहे। नीतीश कुमार खुद रांची के मोरहाबादी मैदान में बाबूलाल मरांडी के संगे रघुवर सरकार प जोरदार हमला करत रहले।

लागत रहे कि बाबूलाल मरांडी अवुरी नीतीश कुमार के आत्मा एक हो चुकल बिया। झारखंड विकास मोर्चा अवुरी जदयू के कार्यकर्ता एक संगे आंदोलन करत रहले जबकि बाबूलाल मरांडी अवुरी नीतीश कुमार एके सुर में बोलत रहले।

लेकिन, नीतीश कुमार एक दिन अपना 'अंतरात्मा' के आवाज़ प भाजपा संगे हाथ मिला लेले अवुरी तबहिए से दुनों भाई के 'आत्मा' में खटपट हो गइल। अब सबकुछ खत्म हो चुकल बा, हालांकि जदयू अभियो शराबबंदी के मांग करतिया लेकिन ओकर आवाज़ सुनाई नईखे देत।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष जलेश्वर महतो के कहनाम बा कि बिहार में जदयू अवुरी भाजपा के बीच गठबंधन भईल बा, झारखंड में पार्टी के भाजपा संगे कवनो प्रकार तालमेल नईखे। उ कहतारे कि झारखंड में भाजपा संगे गठबंधन ना करे के बहुत कारण बा। इहाँ सबकुछ उल्टा-पल्टा होखता, भ्रष्टाचार अवुरी शराबबंदी समेत दर्जन भर प्रमुख मुद्दा प भाजपा अवुरी जदयू के विचार एकदम अलग बा।

उ कहले कि जब तक राज्य में बिहार जईसन पूर्ण शराबबंदी ना लागू होई, तब तक विकास संभव नईखे। राज्य भर में जवना प्रकार के खुलेआम कानून के धज्जी उड़ावल जाता, भ्रष्टाचार जवना प्रकार से शिष्टाचार बन गइल बा, ओकर त गिनती नईखे हो सकत। इहे सभ कारण बा कि रघुवर सरकार के संगे हमनी के तालमेल नईखे हो सकत।

मालूम रहे कि झारखंड में जदयू के हालत एगो अयीसन पार्टी के बिया जवना में सिर्फ उहे लोग आवेले जवना के चुनाव के समय दोसर पार्टी टिकट ना देवेले। जवना आदमी के केहु टिकट ना देवेला उ जदयू के टिकट प चुनाव लड़ेला अवुरी चुनाव जीतला के बाद मौका देख के दोसरा दल में चल जाला।

डालटनगंज से इंदर सिंह नामधारी, छत्तरपुर के राधा कृष्ण किशोर, तमाड़ के पूर्व विधायक राजा पीटर, पांकी के स्व. मधु सिंह जईसन दिग्गज नेता के जदयू में अईला-गईला के बावजूद आज झारखंड में जदयू के कवनो जनाधार नईखे। मानल जाला कि जब कवनो बड़ चेचरा जदयू में शामिल होखेला त पार्टी ओ नेता के प्रभाव क्षेत्र में सक्रिय हो जाले, जसही उ नेता पार्टी छोड़ेला ओकरा प्रभाव क्षेत्र में जदयू के नामलेवा तक ना रह जाला।

ए सभके बावजूद झारखंड में जदयू के वर्तमान हालत बहुत चिंता के लायक बा। आज के हालत त अयीसन बा कि जदयू ना तीन में रह गइल बिया, ना तेरह में। पार्टी लगे अपना कार्यकर्ता के एकजुट करे लायक कवनो मुद्दा नईखे, सबसे बड़ बात कि कार्यकर्ता के अपना संगे जोड़ के राखे लायक कवनो कामे नईखे। ना त भाजपा के ज़ोर से विरोध क सकतिया, ना ओकरा संगे रह सकतिया।

संगे रहे के बात त तब होई जब भाजपा राखल चाही। पार्टी के हालत अईसनो नईखे कि उ भाजपा संगे मोलभाव करे पावे। जदयू के नेता अवुरी कार्यकर्ता दुविधा में बाड़े। साफ-साफ कहल जाए त समूचा पार्टी दुविधा में बिया।

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