गोभी के फूल जी के जंजाल बनल, ना ग्रहाक बाड़े, ना भाव बा, किसान खड़ा फसल के ट्रैक्टर से कचटे लगले

गोभी के फूल जी के जंजाल बनल, ना ग्रहाक बाड़े, ना भाव बा, किसान खड़ा फसल के ट्रैक्टर से कचटे लगले

बिहार में सब्जी, खास तौर प फूल गोभी के खेती के भरोसे भविष्य के सपना देखेवाला किसान अबकी साल बेहाल हो चुकल बाड़े। हालत अयीसन हो गईल बा कि खरीदार के कमी के चलते लोग पूरा तरीका से विकसित फसल के ट्रैक्टर के तरे कचरे लागल बाड़े।

गोभी के बढ़िया कीमत मिले के आशा में बेटा के स्कूल फीस, बेटी के बियाह अवुरी मकान बनावे के सपना देखेवाला किसान आज निराश बाड़े अवुरी अब ओ लोग के सोझा सवाल बा कि 'ए गोभी के का कईल जाए?’

गेहु बोवे के मौसम बीतल जाता अवुरी गोभी बिया की बेचात नईखे। ग्राहक त मिलत नईखन एहसे, एहसे केहु लागल खेत में ट्रैक्टर चलावता, त केहु मुफ्त में सड़क प खाड़ा होके बांटता। कोशिश बा कि कसहूँ खेत खाली हो जाए अवुरी आगे के फसल लगावल जाए।

ओईसे त इ हालत बिहार के लगभग हरेक जिला के बा लेकिन सबसे जादे भयानक हालत मुजफ्फरपुर ज़िला में देखे के मिलता। इहाँ के बाज़ार में गोभी के दाम 150 से 200 रुपया क्विंटल के बाटे, जबकि लागत करीब 600 से 800 रुपया क्विंटल के बीच बा।

मुजफ्फरपुर के सहायक निदेशक (उद्यान) राधेश्याम के मुताबिक अबकी साल जिला में गोभी के बम्पर फसल भईल बा लेकिन बाजार के काबू में राखल उनुका विभाग के हाथ में नईखे। हालांकि उ मनले कि भाव कम होखे से किसान के भारी नुकसान होई अवुरी ए मामला में शिकायत भी मिलता, लेकिन उनुकर विभाग ए मामला में कवनो मदद करे के हालत में नईखे।

बतावल जाता कि ए साल मुजफ्फरपुर जिला में करीब साढ़े पांच हजार हेक्टेयर में गोभी के खेती भईल बा। हालांकि बाढ़ से तनिका नुकसान जरूर भईल लेकिन बाढ़ के बाद जब मौसम खुलल त गोभी के फसल के बहुत फायदा भईल अवुरी नतीजा में बढ़िया पैदावार भईल।

बजार से जुडल लोग के मुताबिक शुरुआत में गोभी के बढ़िया कीमत मिलत रहे, जवना से खुश होके स्थानीय किसान मांग से जादे मात्रा में गोभी बाज़ार में पहुंचावे शुरू क देले।अर्थशास्त्र के नियम के मुताबिक मांग से जादे आपूर्ति होई त ओकर सीधा असर कीमत प पड़ी। इहाँ भी उहे भईल। किसान ताबड़तोड़ गोभी के बाज़ार में ढेले शुरू कईले त एक समय अयीसन आइल कि गोभी के कीमत 100 रुपया प्रति क्विंटल तक पहुँच गईल। हालांकि फिलहाल एकर भाव 150 से 200 रुपया प्रति क्विंटल के बीच बा।

गोभी के खेती करेवाला किसान के मुताबिक एक एकड़ में हाइब्रिड गोभी के फसल लगावे में करीब 70 हजार रुपया के लागत आवेला। जदी फसल बढ़िया भईल त एक एकड़ में 120 क्विंटल तक हाइब्रिड गोभी होई। ए हिसाब से एक क्विंटल गोभी के लागत करीब 600 रुपया बाटे।

असही, देशी गोभी के लागत करीब 50 हज़ार रुपया प्रति एकड़ बा, जवन कि सब ठीक रहला प करीब 80 क्विंटल के पैदावार दिही। ए दर से 1 क्विंटल देशी गोभी प करीब 625 रुपया के लागत आई। इहाँ याद राखे के बा कि इ लागत सिर्फ खेती से जुडल बा। कटाई अवुरी बाज़ार तक पहुंचावे के लागत एकरा में शामिल नईखे।

कुछ प्रमुख फसल के प्रति एकड़ लागत
फ़सलखेतरोपाई-बोवाईनिराईकिटनाशकखादमजदूरीकटाई-ढोवाईकुल
टमाटर600070001000012000800013000500061000
मिर्च60007000100001200060005000-46000
बैंगन600070001000010000700010000-50000
भिंडी6000120005600500060006000-40600
गोभी600010000100001200085005000-51500
गोभी600010000100001200085005000-51500
लौकी600080008000800070005000-42000
खीरा600080007000900070006000500048000
हल्दी6000100008000800080005000-45,000
धनिया600060006000600040004000-32000
केला60008000800010000100006000800056000
लागत रुपया में प्रति एकड़

जदी लागत के गोभी के एक फूल के समझे के होखे त जान लिही कि एक एकड़ में करीब 12 से 15 हज़ार गोभी के फूल के पैदावार होखेला। अयीसना में एक गोभी प करीब 5 रुपया के लागत बाटे। खुदरा बाज़ार में जदी गोभी के एक फूल 10 रुपया से कम में मिलता त समझ लिही कि किसान के बरियार घाटा लागता। काहेंकी जवन फूल आप 10 रुपया में खरीदेनी, ओ फूल के बदला किसान के 5 रुपया के करीब मिलेला।

मुजफ्फरपुर के मंडी में गोभी बेचे आईल एगो किसान बतवले कि उ 28 हज़ार रुपया किलो के दर से गोभी के बीआ खरीदले रहले अवुरी पांच बिगहा (करीब 3 एकड़) में खेती कईले रहले। उ कहले कि तीन बिगहा के गोभी त उनुकर ठीक-ठाक भाव प बेचा गईल लेकिन अबहियों दु बिगहा में गोभी के फसल लागल बा अवुरी उ जस के तस बा।

किसान लोग के मुताबिक आज के बाज़ार भाव में गोभी के कटाई अवुरी बाज़ार तक पहुंचावे के खर्चा भी भारी पड़ता। अधिकांश किसान गेंहू के बोवाई खाती कसहूँ खेत खाली करावल चाहतारे। एहीसे केहु गोभी से भरल खेत में ट्रैक्टर चलावता, त केहु मुफ्त में बाँट के कसहूँ खेत खाली करावे के फेरा में लागल बा।

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