बिहार में गरीब बाप के बेटी 'बियाह' के नाम प परदेश में बेचाए प मजबूर

बिहार में गरीब बाप के बेटी 'बियाह' के नाम प परदेश में बेचाए प मजबूर

गरीबी में बेटी के बियाह आज एगो बड़ समस्या बन गईल बा। सबेरे-सांझ के भोजन खाती तरसत परिवार खाती बेटी के बियाह कईल पहाड़ बन गईल बा। हालत अयीसन हो चुकल बा कि बेटी के बियाह के उमर निकलल जाता लेकिन बाप लगे एतना पईसा नईखे कि उ ओकरा खाती एगो वर खोजे।

बिहार में अयीसने परिवार के फायदा उठावत कुछ लोग गरीब बाप से उ काम करवा देतारे, जवना के उ कल्पना तक नईखे कईले। कुछ लोग अयीसन परिवार के बेटी के परदेश में पईसा वाला दूल्हा से बियाह करावे के लालच देतारे त कुछ लोग सीधा-सीधा बेटी के खरीद-बिक्री के प्रपंच रच देतारे।

अपना गरीबी से मजबूर बाप अयीसन लोग के कहला-सुनला में आके अपना बेटी के ओ लोग के हवाले क देता अवुरी जब सच्चाई सोझा आवता त ओकरा लगे माथा पीटे के अलावे दोसर कवनो उपाय नईखे बाचत।

बिहार के अलग-अलग इलाका में बहुत अयीसन लोग सक्रिय बाड़े जवन कि गरीब परिवार के बेटी खरीद के, चाहे लालच देके परदेश में ले आवतारे अवुरी ओकनी के बेच देतारे। बहुत बेर अयीसन करेवाला एजेंट समाज चाहे परिवार के कवनो सदस्य के चलते रंगे हाथ धरईले, लेकिन एकरा बावजूद बिहार के गरीब परिवार के बेटी के उत्तर प्रदेश अवुरी हरियाणा समेत देश के अलग-अलग हिस्सा में बेचे के इ कारोबार खूब फलत-फुलत देखाई देता।

मानव तस्करी के श्रेणी में आवे वाला इ अपराध अब एगो नाया रूप ध लेले बा। पहिले ए प्रकार के काम करेवाला एजेंट सीधा-सीधा खरीद-बिक्री के प्रस्ताव राखत रहले, अब एकरा के 'बियाह' बतावल जाता। हालांकि ए प्रकार के कामकाज कानून के नज़र मे अपराध बा, अवुरी बहुत लोग ए अपराध खाती जेल भी हो चुकल बा। लेकिन सच्चाई इहो बा कि अयीसन बहुत कम मामला पुलिस तक पहुंचेला।

ए धंधा के करीब से जानेवाला लोग के मुताबिक लईकी के परिवार अवुरी ओकरा के खरीदे वाला परिवार के बीच एजेंट एकमात्र कड़ी होखेला। एजेंट परदेश के मिलल 'ऑर्डर' के मुताबिक अपना प्रभाव क्षेत्र में गरीब परिवार सुंदर-सुंदर अवुरी 20 से 20 साल तक उमर वाली लईकिन के पहचान करेला अवुरी फेर ए लईकिन के परिवार के सोझा ओ लोग के 'बेटी के बियाह बढ़िया घर में' करावे के प्रस्ताव देवेला।

एकरा संगही एजेंट के ओर से 'बियाह के खर्च' के रूप में एगो बढ़िया रकम के प्रस्ताव भी दिहल जाला। ए प्रस्ताव के अधिकांश ओईसन परिवार अपनावेला जवना खाती बेटी के बियाह के संगे-संगे आपन पेट भरल भी पहाड़ हो चुकल बा। प्रस्ताव कबूल होखला के बाद एजेंट बियाह के नाम प एगो छोट-मोट रस्म करावेला अवुरी फेर गरीब बाप के बेटी एगो अमीर लेकिन अधेड़ आदमी के संगे बिदा हो जाले।

बेटी के बिदाई उ समय होखेला जब परिवार अपना बेटी के अंतिम बेर देखेला, फेर सालों-साल तक बेटी चाहे ओकर कवनो खबर ओकरा परिवार तक ना पहुंचे।

हालांकि सरकार ए प्रकार के कुरीति के बंद करे खाती बहुत प्रयास करतिया। बहुत प्रकार के कानून बनावल गईल अवुरी लईकिन के आत्मनिर्भर बनावे के बहुत प्रयास होखता, लेकिन सच्चाई बा कि ए सभ प्रयास के फायदा सिर्फ ओ परिवार तक पहुंचता, जवन कि सक्षम बा। समझे के बात बा कि जवना परिवार के लईकी स्कूल के मुंहे नईखे देखले ओकरा कवन फर्क पड़ता कि सरकार ओकरा खाती का करतिया।

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