बिहार के सिल्क अवुरी हैंडलूम आज पहचान खाती तरसता, कारोबार के संगे-संगे पेट तक प ताला लटके लागल

पछिला कुछ समय में खादी अवुरी सिल्क जईसन हस्तकरघा प बनेवाला कपड़ा के मांग में बढ़ोतरी भईल बा। इ बढ़ोतरी प्रतिशत में त बहुत बढ़िया देखाई देता लेकिन जमीन प एकर कवनो असर नईखे लउकत।

पछिला कुछ समय में खादी अवुरी सिल्क जईसन हस्तकरघा प बनेवाला कपड़ा के मांग में बढ़ोतरी भईल बा। इ बढ़ोतरी प्रतिशत में त बहुत बढ़िया देखाई देता लेकिन जमीन प एकर कवनो असर नईखे लउकत।

एक समय विदेश में बिहार के पहचान कहाए वाला राज्य के हस्तकरघा उद्योग आज खुद अपना पहचान खाती तरसता। उत्पादन ठप्प भईल जाता अवुरी एकरा से जुडल लोग के अपना अस्तित्व के कायम राखे खाती बिहार छोड़ के भागे के पड़ता।

चुनावी मौसम में हस्तकरघा उद्योग खाती बड़े-बड़े वादा अवुरी एकरा से जुडल लोग के दुखड़ा प लोर बहावे वाला नेता चुनाव के बाद एकरा के भूला गईल बाड़े आ रुपया-पईसा के संगे-संगे शरीर से भी कमजोर हो चुकल बुनकर आज अपना परिवार के पेट भरे खाती दुआरी-दुआरी भटके लागल बाड़े।

बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर 1977 में बुनकर के समस्या के दूर करे खाती क्षेत्रीय हस्तकरघा संघ लिमिटेड बनवले रहले। एकरा में बुनकर खाती सस्ता लोन समेत बहुत प्रकार के योजना शुरू भईल।

पछिला लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहिले, 2014 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्य के बुनकर खाती क्रेडिट कार्ड, स्वास्थ्य बीमा योजना समेत बहुत प्रकार के योजना के शुरू करे के संगे-संगे बुनकर आयोग बनावे के भरोसा देले रहले। लेकिन आज बुनकर क्रेडिट कार्ड, स्वास्थ्य बीमा योजना आ बुनकर आयोग समेत बुनकर से जुडल लगभग सभ प्रमुख योजना ठंडा बस्ता के शोभा बढ़ावता।

क्षेत्रीय हस्तकरघा बुनकर संघ के पूर्व अध्यक्ष इनामुर रहमान अंसारी के मुताबिक मुख्यमंत्री अपना कहला के मुताबिक क्रेडिट कार्ड, स्वास्थ्य बीमा अवुरी बुनकर आयोग शुरू कईले आज तक बुनकर आयोग के अध्यक्ष समेत बाकी पदाधिकारी ना चुनईले। अंसारी कहले कि अकेले मधुबनी जिला में 388 बुनकर सहयोग समिति से जुडल करीब 50 हजार लोग के सोझा आज सबसे बड़ सवाल पेट भरल अवुरी गुजारा कईल बा।

मधुबनी के क्षेत्रीय हस्तकरघा बुनकर संघ के अध्यक्ष हामिद अंसारी कहले कि "मधुबनी के 234 बुनकर के हस्तकरघा शुरू करे खाती पछिला साल 20-20 हज़ार के अनुदान मिलल रहे। जबकि 'मुख्यमंत्री समेकित हस्तकरघा विकास योजना' के तहत बुनकर क्रेडिट कार्ड धारक के पांच-पांच हज़ार के अनुदान अलग से मिलल रहे। लेकिन इ सभ ऊंट के मुंह में जीरा के बरोबरी बा। एकरा से कुछ ना होई।"

ए सभके बीच साल 2016 के नवम्बर में भईल नोटबंदी अवुरी 2017 के जुलाई से लागू भईल जीएसटी से बाकी उद्योग के संगे-संगे हस्तकरघा उद्योग के विकास के आस तूर देलस। हालांकि बिहार के उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह कहले कि राज्य सरकार हस्तकरघा उद्योग अवुरी बुनकर लोग के फ़ायदा पहुंचावे खाती बहुत प्रकार के योजना चलावतिया अवुरी प्रयास करतिया।

जय कुमार सिंह कहले कि देश में बिहार पहिला राज्य बा, जहां के बुनकर के कच्चा माल उपलब्ध करावे खाती राष्ट्रीय हस्तकरघा विकास निगम सहमत भईल बा। निगम मांग के मुताबिक राज्य के बुनकर के कच्चा माल उपलब्ध कराई अवुरी ए मामला में निगम अवुरी राज्य के उद्योग विभाग के बीच समझौता पत्र (एमओयू) प हस्ताक्षर हो चुकल बा। ए समझौता के मुताबिक निगम से मिलेवाला कच्चा माल के कीमत चुकावे खाती बुनकर के 45 दिन के समय मिली।

मंत्री बतवले कि बुनकर अवुरी हस्तकरघा उद्योग के ध्यान में राखत राज्य सरकार के 'सतरंगी चादर योजना' खाती 2 करोड़ रुपया के एगो कोष बनवले बिया, जवना में से 50 लाख रुपया के अग्रिम भुगतान मजदूरी चुकावे खाती आ 1.25 करोड़ रुपया 68 इंच वाला लूम (हस्तकरघा मशीन) खरीदे खाती दिहल बा।

ओने हस्तकरघा उद्योग से जुडल लोग के कहनाम बा कि 'सरकारी योजना त बहुत बिया लेकिन एकर पूरा लाभ बुनकर तक नईखे पहुंचत जेकरा नतीजा में बुनकर के हालत दिन-प-दिन बिगड़ल जाता। बैंक के निराश करेवाला व्यवहार, पूंजी के अभाव, नयकी पीढ़ी के दोसरा रोजगार में रुचि जईसन समस्या के संगे-संगे बाज़ार में घटत मांग अवुरी बढ़त कॉम्पटिशन के चलते इ उद्योग अवुरी एकरा से जुडल लोग अब अंतिम सांस गिनतारे।'

हालांकि पछिला कुछ समय में खादी अवुरी सिल्क जईसन हस्तकरघा प बनेवाला कपड़ा के मांग में बढ़ोतरी भईल बा। इ बढ़ोतरी प्रतिशत में त बहुत बढ़िया देखाई देता लेकिन जमीन प एकर कवनो असर नईखे लउकत। केंद्र सरकार के ओर से खादी अवुरी सिल्क के बढ़ावा देवे खाती समय-समय प मेला के आयोजन होखता, लेकिन एकर लाभ सिर्फ गिनती के कुछ लोग के मिलता।

अयीसने एगो मेला में स्टॉल लगावे वाली सरोज देवी बतवली कि 'जदी सरकार के ओर से अयीसन आयोजन होखत रही त कम से कम उनुका जईसन कुछ लोग खाती बाज़ार ना मिले के परेशानी दूर हो जाई'। अलग-अलग हैंडलूम एक्स्पो (हस्तकरघा मेला) में स्टॉल लगावे अधिकांश लोग के राय बा कि ए प्रकार के मेला के आयोजन से कैमूर आ औरंगाबाद के कालीन, भागलपुर के तसर सिल्क, बिहारशरीफ के मशहूर बावनबूटी साड़ी अवुरी चादर, मधुबनी प्रिंट समेत सिल्क के साड़ी, कपड़ा, चादर, दुपट्टा अवुरी कंबल के बिक्री में बढ़ोतरी भईल बा।

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