लालू जेल त गईले लेकिन भाजपा के 'हिन्दुत्व' के काट तैयार क गईले, बुताईल आग फेर से जरा गईले

चारा घोटाला के एक मामला में सीबीआई के विशेष अदालत लालू प्रसाद यादव के साढ़े तीन साल के सजा सुनवले बिया।

चारा घोटाला के एक मामला में सीबीआई के विशेष अदालत लालू प्रसाद यादव के साढ़े तीन साल के सजा सुनवले बिया।

चारा घोटाला के एगो मामला में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेशक साढ़े तीन साल के सजा हो गईल बा, लेकिन इ घटना कम से कम भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में नईखे। लालू के जेल गईल एक त विपक्षी एकता के हवा दे गईल दूसरे भाजपा के 'कमंडल' के काट के रूप में 'मंडल' के जमीन तैयार क देलस।

लालू जब-जब अदालत में पेशी खाती रांची अईले, तब-तब उ झारखंड के प्रमुख विपक्षी दल के नेता लोग से लंबा बातचीत कईले। आमतौर प बिहार के राजनीति में अझुराईल रहे वाला लालू सुनवाई के दौरान मिलल समय के भरपूर इस्तेमाल कईले अवुरी झारखंड के तमाम विपक्षी दल के समझावे में लगभग कामयाब रहले कि 'बिना एकजुट भईले खतम हो जाएके'।

झारखंड में लालू के कदम के असर बहुत जल्दी देखाई दिही। लालू के जेल गईला के बाद डेराईल विपक्ष लगे अब एकजुट होखे के अलावे दोसर कवनो राह नईखे।

बिहार के बंटवारा के बाद से राजद बहुत तेजी से झारखंड में नीचे गईल। संयुक्त बिहार में झारखंड के इलाका से राजद के 9 विधायक रहले, 2005 में इ संख्या 7 त 2009 में पांच हो गईल। आज झारखंड में राजद के एको विधायक नईखे। ओने बिहार में राजद बहुत तेज़ी से ए बात के जनता तक, खास तौर यादव अवुरी पिछड़ा वर्ग के लोग के समझावतिया कि लालू के जेल भेजे के पीछा भाजपा के हाथ बा अवुरी ए साजिश में नीतीश कुमार शामिल बाड़े।

राजद के नेता ज़ोर-शोर से जगन्नाथ मिश्रा के रिहाई अवुरी लालू के सजा होखला के जाति से जोड़ के प्रचारित करतारे। पार्टी के नेता 'कमंडल' बनाम 'मंडल' के ओ राजनीति के ओ आग के फेर से हवा देतारे, जवन कि आज तक भाजपा के सवर्ण के पार्टी बना के रखलस। पार्टी ए मामला में कमोबेश कामयाब होखत देखाई देतिया। जदी राजनीतिक प्रतिस्थिति में कवनो बड़ बदलाव नईखे होखत बहुत जल्दी बिहार में अगड़ा बनाम पिछड़ा के राजनीति सड़क प देखाई देवे लागी।

बिहार में सत्ताधारी भाजपा अवुरी जदयू खूब बढ़िया से राजद के ए चल के समझतिया एहसे दुनो दल के नेता ए मामला में राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी के नाम बार-बार लेतारे। लेकिन, एकरा से कतना फायदा होई, कतना असर होई, इ त समय बताई। काहेंकी राजद के पूरा ध्यान 'मिश्रा' बनाम 'यादव' के लड़ाई प बा जबकि भाजपा-जदयू लालू प लागल भ्रष्टाचार के आरोप के प्रमुखता देतिया।

ओने झारखंड में स्थिति एकदम उलटा बा। बिहार के बंटवारा के बाद 15 नवंबर, 2000 के झारखंड के रूप में एगो नया राज्य के जन्म भईल रहे। लालू के पूरा ध्यान बिहार प रहे, जेकरा नतीजा में झारखंड के राजद के राजनीति में खास महत्व ना मिलल। राज्य के पूरा राजनीति स्थानीय लोग के भरोसे छोड़ दिहल गईल जेकर नतीजा इ भईल कि आज राजद सिर्फ नाम खाती रह गईल।

जहां तक राजद के रणनीति के सवाल बा, त झारखंड अवुरी बिहार खाती पार्टी के रणनीति लगभग एके जईसन बा। पार्टी राज्य में आदिवासी अवुरी पिछड़ा समाज प होखत कथित अत्याचार अवुरी सरकार के पिछड़ा-आदिवासी विरोधी नीति के मुद्दा के संगे लालू के जेल जाए के मुद्दा के जोड़ के घर-घर तक पहुंचावे के तैयारी में बिया।

बिहार होखे चाहे झारखंड, राजद के मंशा साफ बा। एक त लालू जेल गईला के जाति अवुरी वर्ग से जोड़ के सहानुभूति पैदा कईल जाए, दूसरे जनता के समझावल जाए कि भाजपा सिर्फ अगड़ा लोग के पक्ष में काम करतिया। झारखंड में पार्टी के ए मकसद में हेमंत सोरेन के झारखंड मुक्ति मोर्चा अवुरी बाबू लाल मराण्डी के झारखंड विकास मोर्चा भी प्रत्यक्ष चाहे परोक्ष तरीका से मदद करतिया।

बिहार के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे अवुरी झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी बिना लाग-लपेट के एकसूर में एके बात कहतारी - 'चारा घोटाला मामला में लालू राजनीति के शिकार भईल बाड़े अवुरी उ लोग लालू के संदेश के अपना-अपना राज्य के एक-एक घर के दरवाजा तक पहुंचिहे अवुरी सभके बतईहे कि भाजपा का कईले बिया।'

लेकिन ए सभके बीच सभसे बड़ सवाल 2019 के लोकसभा चुनाव बा। राजद विधानसभा चुनाव से पहिले 2019 के चुनाव में भाजपा के टक्कर देवे खाती जमीन त तैयार करतिया लेकिन एकरा में सबसे बड़ पेंच कांग्रेस पार्टी बिया। राष्ट्रीय स्तर प बनेवाला कवनो महागठबंधन कांग्रेस के बिना अधूरा बा अवुरी कांग्रेस कम से कम बिहार में सवर्ण मतदाता के भरोसे बिया।

बिहार में कांग्रेस के रणनीति अभी साफ नईखे लेकिन झारखंड में राजद चाहे झारखंड मुक्ति मोर्चा संगे कांग्रेस के गठबंधन करे में कवनो खास परेशानी नईखे, लेकिन असली परेशानी राजनीतिक तौर प महत्वपूर्ण बिहार में बाटे।

बिहार में जातिगत आधार वाला वोट बैंक खाती तरसत कांग्रेस पार्टी के पछिला विधानसभा चुनाव में राज्य के सवर्ण मतदाता, खास तौर प ब्राह्मण वर्ग के समर्थन मिलत लउकल। पार्टी ओ चुनाव में अयीसन-अयीसन विधानसभा क्षेत्र से भारी बहुमत के संगे जीतल जहां 25-30 साल से भाजपा जीतत रहे अवुरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ओकनी में से कुछ सीट प प्रचार करे गईल रहले। लेकिन राजद के 'मिश्रा' बनाम 'यादव' के लड़ाई कांग्रेस पार्टी खाती मुश्किल खाड़ा क सकेले।

हालांकि, बिहार के राजनीति में जदी भाजपा-जदयू 15 साल तक एक संगे राज क सकेला त राजद-कांग्रेस के तालमेल बनावे में ढेर परेशानी ना होखे के चाही। जदी जदयू के दलित-महादलित वाली राजनीति से भाजपा के सवर्ण मतदाता के कवनो खास परेशानी नईखे त राजद के 'मिश्रा' बनाम 'यादव' के राजनीति से कांग्रेस के सवर्ण मतदाता के भी खास परेशानी ना होखे के चाही।

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