बेटी-पतोह, एके बेवहार एगो के गुन त दुसरका के दोस

सास के अपना बेटी अवुरी पतोह के प्रति सोच में फर्क के जानल मुश्किल नईखे. [प्रतिकात्मक फोटो]

सास के अपना बेटी अवुरी पतोह के प्रति सोच में फर्क के जानल मुश्किल नईखे. [प्रतिकात्मक फोटो]

गाँव से छोटका चाचा क फोन आइल की 'आकाश बचवा नोएडा में फ्लैट किनले बाड़े आ एतवार के गृहप्रवेश बाटे। ए गृहवास (गृहप्रवेश) में हमनियो के नेवता मिलल बाटे, तू ओईजे बाड त न्योता क अईह।' हमरा सहमती जतवला के बाद फोन रखा गइल। हम गांव से मिलल पता पर नोएडा पहुंच गईनी।

नोएडा में गावं घर के ढेर लोग से मिले के मौका मिलल। पवलगी-चिरौंजी के बाद आकाश बैठका में ले अइले, उहाँ हमके धनेसर काका लउकले। उनुकर हमरा पर विशेष सनेह रहे, काहे की उनकर लइका तरुण हमार संघतिया रहले। ए संबंध के चलते बचपने से काका-काकी से विशेस लगाव रहे।

धनेसर काका के नज़र जब हमरा पर पडल त कहलन "का हो बबुआ, तू त गुलर के फुल हो गईल, गाहे बगाहे लउके ल"। अपना नोकरी के मजबूरी बताके कसहूँ उनकर मुहं बंद करवनी। पूछनी, "का हो काका, बुढौती कइसे कटता?"

जवाब मिलल, "अरे का पुछले देले बबुआ? बेटी दमाद बीच-बीच में देखत-भालत रहेल"। फेर हम पूछनी कि "बेटा पतोह?" त कहलन की ओहनी के बारे में त पूछबे मत कर? हमेशा अपना बेमार सास-ससुर के देख भाल करे ससुराल जाते रहेला।

एही तरे काकी से पूछनी कि 'का हाल बा काकी घर परिवार के? काकी, सुनली की पतोहिया बड़ा गुनगर आइल बिया!' काकी कहनी, "हाँ बबुआ, बहुते गुनगर हिय। भतार के अंगूरी पर नचवले रहेले। आ हमार लइका त मउगा निकल गइल, बिना अपना मेहरारु से पुछले कुछ करबे ना करेला।"

बेटी दामाद के बारे में पुछला उ काकी कहनी कि "किस्मत बढ़ीआं रहुवे की दामाद नीक भेटा गइल, हमरा बेटी के बहुत मानेला। ओकरा बीना उ एको क्षण ना रहेला। ओकरा से बिना पुछले कवनो काम ना करेला। बेटी हमार ससुराल में मलकाइन बन के रहतिया। "

इ सब सुनला के बाद हम आपन रास्ता धइनी। जानत रहनी के काकी से एकरा बारे में बात कइला से कवनो फायदा नइखे। घर-फोड़वा के उपाधि जरुर मिल जाई। बाकिर सोंची, एके तरह के बेवहार खातीर एक आदमी के नीमन, आ दुसरका के बाउर कइसे कहल जा सकेला?

एके तरह के बेवहार खातिर बेटा के शिकायत आ दामाद के बड़ाई त रउरो सभे सुनलही होखब। जवना चीज़ के बेटी के गुन बतावल जाला, उहे गुन जदी पतोहिया में होखे त उ ओकर दोस बन जाला।

तीखर (कड़ा) घाम होखे त माटी के समान बनावे वाला कोहार खातिर बड़ा सुनर रही, लेकिन उहे घाम खेती करे वाला किसान आ बाग-बगइचा सींचे वाला माली खातीर परेशानी के कारण बन जाला।

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तारकेश्वर राय
ग्राम + पोस्ट : सोनहरियाँ, भुवालचक्क
गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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