बिहार-यूपी में गठबंधन के जीत अगिला लोकसभा चुनाव के दिशा-दशा बदल देलस

बिहार-यूपी में गठबंधन के जीत अगिला लोकसभा चुनाव के दिशा-दशा बदल देलस

पछिला कुछ समय में देश के अलग-अलग राज्य में भईल उपचुनाव में विरोधी खेमा जवना प्रकार से एकजुट होके एक दूसरा के सहयोग कईलस अवुरी एक दूसरा के जीत के जश्न मनवलस, ओकरा से अगिला लोकसभा चुनाव के दिशा-दशा में भारी बदलाव हो सकता।

गुजरात के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बढ़त, राजस्थान अवुरी मध्य प्रदेश के उपचुनाव में कांग्रेस के एकतरफा जीत के बाद बिहार अवुरी उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में गठबंधन के जीत से विपक्ष में भारी उत्साह बा अवुरी इहे उत्साह भाजपा विरोधी खेमा के एक मंच प आवे खाती बढ़ावा देता। हालाँकि एह बीच पूर्वोत्तर के त्रिपुरा में भाजपा के भारी बहुमत मिलल लेकिन एकरा से विरोधी खेमा प कवनो खास असर नईखे देखाई देत।

एक ओर भाजपा अतिविश्वास के शिकार होखत देखाई देतिया त दोसरा ओर विपक्ष में भाजपा के जायज-नाजायज नीति से भारी घबराहट देखाई देता। भाजपा जवना प्रकार से गोवा, मणिपुर के बाद मेघालय में सबसे बड़का दल होखला के बावजूद कांग्रेस के सरकार बनावे से रोकलस, ओकरा से भय के माहौल भी बनता, जवन कि विपक्ष के एकजुट होखे खाती मजबूर भी करता।

भाजपा के जोड़-तोड़ वाली राजनीति से सबसे जादे परेशानी समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जईसन क्षेत्रीय दल के होखता अवुरी एकरे नतीजा बा कि राजद जहां बिहार में कांग्रेस के संगे भाजपा के खिलाफ बहुत मजबूत लड़ाई लड़तिया अवुरी हरेक मोर्चा प हरावे के तैयारी करतिया, उहें सपा-बसपा के गठबंधन गोरखपुर अवुरी फूलपुर उपचुनाव में भाजपा के झंडा उखाड़त अपना मंसूबा के बता चुकल बा।

बिहार के अररिया आ उत्तर प्रदेश के गोरखपुर अवुरी फूलपुर में जवना प्रकार से एकजुट एनडीए के राजद-कांग्रेस अवुरी सपा-बसपा गठबंधन हरवलस ओकरा से पूरा देश में एगो संदेश गईल कि 'जदी भाजपा के हरावे के होखे त एकजुट भईल जरूरी बा'। हालाँकि अभी लोकसभा चुनाव में कुछ समय बाकी बा अवुरी आज के राजनीति में सबेरे-सांझ में बड़े-बड़े बदलाव हो जाता, एहसे अगिला लोकसभा चुनाव के दिशा अवुरी दशा के ठीक-ठीक कल्पना आज नईखे हो सकत।

लेकिन, एक चीज़ तय बा कि भाजपा अगिला चुनाव में दोबारा बहुमत पावे के पुरजोर कोशिश जरूर करी, लेकिन इ सभ 2014 जतना आसान नईखे होखेवाला। तब कांग्रेस सत्ता में रहे अवुरी पूरा देश में ओकरा खिलाफ लहर रहे। आज भाजपा सत्ता में बिया अवुरी कांग्रेस भी अब 2014 के मुकाबले जादे चुस्त अवुरी आक्रामक देखाई देतिया। तब सपा-बसपा अलग-अलग, एक दूसरा के खिलाफ चुनाव लड़त रहे, अब संभव बा कि एकजुट आ एक संगे चुनाव लड़ी। बिहार में तब जदयू एगो तीसरा दल रहे, आज फेर उ भाजपा के संगे एनडीए के हिस्सा बा।

पछिला लोकसभा चुनाव में बिहार अवुरी उत्तर प्रदेश से 103 सीट जीते वाली भाजपा (एनडीए) खाती ए संख्या के 2019 के लोकसभा में दोहरावल आसान नईखे। जदी उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा आ कांग्रेस के बीच गठबंधन रहता अवुरी तीनो एकजुट होके चुनाव लड़ता त भाजपा के बहुत कड़ा चुनौती मिली। ओने बिहार में नीतीश कुमार अपना चमक-दमक के गंवावत देखाई देतारे, अयीसना में बिहार में राजद-कांग्रेस (+) से मुकाबला करे में भाजपा-जदयू (+) के परेशानी हो सकता।

दुनो राज्य में एक संगे भईल उपचुनाव के नतीजा साफ़ बतावता कि दुनो राज्य के मुख्यमंत्री प जनता अब पहीले के मुकाबले कम भरोसा करतिया। नीतीश अवुरी योगी के भारी भरकम प्रचार के बावजूद एनडीए के उम्मीदवार दुनो राज्य में हार गईले। हिंदुत्व के मुद्दा हिन्दू से जादे अल्पसंख्यक समुदाय प असर करता अवुरी उ विपक्षी दल के ओर गोलबंद भईल जातारे। इहाँ याद राखे के बा कि दुनो राज्य में अल्पसंख्यक मतदाता के संख्या कुल आबादी के 15 प्रतिशत से जादे बाटे।

अगिला कुछ महीना में कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश अवुरी छत्तीसगढ़ में विधानसभा के चुनाव होखेवाला बा। कर्नाटक के छोड़ बाकी तीन राज्य में भाजपा के सरकार बिया अवुरी ए तीनो राज्य में फ़िलहाल सत्ता विरोधी लहर देखाई देता। सबसे ख़ास बात बा कि ए चारो राज्य में भाजपा अवुरी कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बा।

जदी ए चारो में से दु से तीन राज्य में भी कांग्रेस जीतल त आज जवना चीज़ के कल्पना कईल जाता, उ राजनीति जमीन प देखाई देवे लागि अवुरी तब भाजपा खाती आज के मुकाबले जादे मजबूत विपक्ष के सामना करे के पड़ी।

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