बिहार के ऊबड़-खाबड़ राह के अन्हरिया चीकन सड़क अवुरी एलईडी के अंजोर से ना दूर भईल

बिहार में जवन बदलाव भईल बा ओकरा में बिजली अवुरी सड़क सबसे जादे प्रमुख बाटे।  [प्रतिकात्मक फ़ाइल फोटो]

बिहार में जवन बदलाव भईल बा ओकरा में बिजली अवुरी सड़क सबसे जादे प्रमुख बाटे। [प्रतिकात्मक फ़ाइल फोटो]

बिहार - ए शब्द के कहे-सुने वाला के मन में भाव अलग-अलग हो सकता। ए जगह के जाने वाला के मन में अलग-अलग तरह के विचार हो सकता। अलग-अलग लोग खाती एकर-एकर अलग महत्व हो सकता। लेकिन, ए सबसे अलग एगो अवुरी सच्चाई बा कि ए शब्द अवुरी ए जगह के सच्चाई भी अलग-अलग लोग खाती अलग-अलग हो सकता।

जदी आप सत्ताधारी दल के समर्थक बानी त आपके हिसाब से आज के बिहार काल्ह के बिहार से बढ़िया हालत में बा। सबकुछ ठीक बा। जदी आप सत्ताधारी दल के विरोधी बानी त आज कुछूओ ठीक नईखे, चारो ओर हाहाकार मचल बा अवुरी सरकार सुतल बिया।

ए सभके बीच असली बिहार कहाँ बा? बिहार के असली सच्चाई कईसन बिया? एक बात सही बा कि आज साँझ के घर से बहरी रहला प ओतना डर नईखे लागत जातना कि 15 साल पहिले लागत रहे। सच बा कि आज जतना बलात्कार होखता, ओतना पहिले ना होखत रहे। पहिले कबो-कबो नरसंहार होखत रहे, दर्जनों लोग के हत्या होखत रहे, आज नरसंहार नईखे होखत लेकिन पहिले से जादे लोग के हत्या हरेक सप्ताह होखता।

पहिले दिया-ललटेन के जमाना रहे, आज एलईडी लाइट के जमाना बा। किरासन तेल खाती मारा-मारी करे के परत रहे, लेकिन अब बस हर महीना बिजली के बिल भर देवे के बा। रोजगार ना पहिले रहे, ना आज बा। पहिलहू परीक्षा में नकल होखत रहे, अजूओ नकल होखता। पहिले होम सेंटर रहे, आज हरेक सेंटर 'होम' बन गइल बा। मतलब कि शिक्षा-रोजगार-स्वास्थ्य के मामला जस के तस बा।

जहां तक कानून-व्यवस्था के मामला बा त ना पहिले कानून के राज रहे, ना आज कानून के राज बा। पहिलहू मरेवाला अवुरी धराए वाला अधिकांश लोग गरीब अवुरी पिछड़ा वर्ग के रहले, अजूओ उहे लोग बाड़े। पहिलहू पुलिस ओकरे बात सुनत रहे जेकरा लगे 'सिफ़ारिश' रहे, अजूओ ओकरे सुनतिया। हो सकता कि सिफ़ारिश राखे वाला लोग बदल गईल होखस लेकिन बिना सिफ़ारिश के बिहार में सुनवाई असंभव बा।

पहिले के सत्ताधारी दल 'गरीब-गुरबा' के लड़ाई लड़त रहे, आज वाला लोग 'विकास' खाती लड़ाई लड़तारे। लेकिन विकास के मतलब खाली सड़क अवुरी बिजली से बाटे। जबकि सच्चाई बा कि सड़क अवुरी बिजली के बिहार में घरे-घरे पहुंचावे खाती राज्य सरकार से जादे अलग-अलग समय अवुरी आज के केंद्र सरकार बिया।

साल 2015 के आंकड़ा के मुताबिक बिहार में सड़क (मुख्य सड़क) के कुल लंबाई 8,848 किलोमीटर बाटे, जवना में से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र वाला राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाईवे) के लंबाई 4,595 किलोमीटर आ राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र वाला राजमार्ग (स्टेट हाईवे) के लंबाई 4,253 किलोमीटर बा। साफ बा कि बिहार के आधा से अधिका सड़क के रख-रखाव अवुरी बनावे के पूरा ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार लगे बा, जबकि स्टेट हाईवे के बनावे खाती भी केंद्र सरकार पईसा देवेले।

आज वाला 'विकास' के जदी पोस्टमार्टम कईल जाए त पाता चली कि 2010 से 2015 के बीच बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग के लंबाई करीब 1,000 किलोमीटर बढ़ गईल बा। ए पांच साल के समय में या त स्टेट हाईवे के नेशनल हाईवे में बदल दिहल बा, या स्टेट हाईवे के बगल से एगो नाया सड़क बना दिहल बा, लेकिन कतहू कवनो एकदम नया सड़क ना बनल। कुल मिलाके राज्य सरकार 1,000 किलोमीटर सड़क के रख-रखाव अवुरी बनावे के ज़िम्मेदारी से मुक्ति पा लेलस।

अयीसने सच्चाई बिजली के क्षेत्र में बाटे। आज के 'विकास' खाती लड़त सरकार अपना ओर से एको बिजली कारख़ाना नईखे लगवले। केंद्र सरकार के ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत राज्य सरकार हरेक गांव तक बिजली के खंभा अवुरी तार जरूर पहुंचा देले बिया। बिहार के लोग के चीकन सड़क अवुरी अंजोर गांव त मिलल लेकिन एकरा से जतना फायदा होखल चाहत रहे, ओकरा मुक़ाबले चुटकी भर फायदा भी ना भईल।

बिजली अवुरी सड़क के बावजूद बिहार में रोजगार काहें ना पैदा भईल? बिहार पारंपरिक तौर प नोकरी करेवाला लोग के राज्य ह। इहाँ के लोग व्यापार से जादे नोकरी कईल पसंद करेले। अयीसना में रोजगार कहाँ से पैदा होई। एकरा अलावे रोजगार ना पैदा होखे के सबसे बड़का कारण बा - बाजार। बिहार उपभोक्ता राज्य जरूर ह लेकिन इहाँ के बाज़ार के खरीदे के क्षमता बाकी बड़का राज्य के मुक़ाबले कम बा।

रोजगार खाती कल-कारख़ाना जरूरी बा। कल-कारख़ाना लागे खाती बाज़ार, बढ़िया कानून-व्यवस्था अवुरी कुशल आ कम खर्चीला श्रम पहिला जरूरत होखेला। बिहार में तीनों के अभाव बा। मजदूर त बहुत बाड़े, लेकिन ट्रेनिंग नईखे। ऊपर से अपहरण अवुरी रंगदारी त आम बात बा। ए दुनो चीज़ के चलते स्थानीय स्तर प रोजगार के फिलहाल कवनो मौका नईखे। जब रोजगार ना होई, त पईसा ना होई, पईसा ना होई त बाज़ार कहाँ से पैदा होई? मनीऑर्डर वाली अर्थव्यवस्था के सबसे बाउर पक्ष इहे होखेला कि उ बाजार के ना विकसित होखे देवे।

एगो अवुरी चीज़ बा जवना के चर्चा जरूरी बा। बिहार पहिलहू बदनाम रहे अजूओ बदनाम बा। ब्रांड 'बिहार' कबहूँ ना विकसित भईल। बहरी के लोग खाती बिहार आईएएस अवुरी भ्रष्ट नेता के कारख़ाना ह। ए छवि के सुधारे खाती ना त आज कुछ होखता, ना पहिले कुछ होखत रहे। पहिले वाला लोग जात-पात करत रहले, आज वाला लोग सीधा-सीधा धर्म के बात करतारे। पहिले अपराधी अपराध कईला के बाद सरेआम घूमत रहे, आज त पुलिस प्रशासन के धमकी देता।

कुल मिलाके के आज सड़क बढ़िया बिया आ बिजली रहतिया। गाड़ी ध्यान से चलाई अवुरी देख-सुन के सड़क पार करी। रोज दर्जन भर लोग एही सड़क प मुअतारे। बिजली से अन्हरिया के भगाई, लेकिन सावधान रही कि घर मत जरे लागे। बिहार के ऊबड़-खाबड़ राह में अन्हरिया के बरियार परत चढ़ल बा, पाता ना इ कब दूर होई।

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