महतारी के दूध बच्चा खाती अमृत होखेला, त स्तनपान करावे में लाज काहें

महतारी के दूध बच्चा खाती अमृत होखेला, त स्तनपान करावे में लाज काहें

महतारी के कोख से निकल के दुनिया में आवे वाला हरेक बच्चा खाती ओकरा महतारी के दुख से बढ़के कुछ ना होखेला। महतारी के दूध के "अमृत" अवुरी "वरदान" मानल जाला। विज्ञान अवुरी शास्त्र में महतारी के दूध के महिमा के खूब ज़ोर-शोर से बतावल बा।

बच्चा जब भूखाईल होखेला त महतारी समय अवुरी जगह के संकोच छोड़े देवेले अवुरी ओकरा के स्तनपान करावेले। इ सामान्य प्रक्रिया होखेला। हजारों साल से असही होखत आवता अवुरी हजारों साल तक असही होई। महतारी अपना संतान के दूध पिआवे से पहिले इ ना देखी कि उ ट्रेन में बिया, कि बस में बिया।

लेकिन आज समाज के कुछ कथित रक्षक एकरो में रुकावट खाड़ा करे लागल बाड़े। आज बहुत अयीसन महिला बाड़ी जवन कि सार्वजनिक जगह प अपना संतान के स्तनपान करावे में संकोच करेली चाहे उनुका लाज लागेला। एकरा पीछा हमनी के समाज के ढोंग अवुरी गंदा सोच बाटे।

हमनी के समाज स्तनपान के त बहुत बढ़िया मानेला लेकिन समाज के कुछ कथित रक्षक एकरा में "टर्म एंड कंडिशन" लगावे शुरू क देले बाड़े। लागता कि बच्चा के आहार भी बैंक के लोन बन गईल बा।

कुछ दिन पहिले एगो मलयालम पत्रिका के शीर्षक प एगो मॉडल के फोटो छपल। फोटो में मॉडल एगो बच्चा के स्तनपान करावत लऊकतारी। फोटो के संगे लिखल रहे - "महतारी केरल से कहतारी - हम स्तनपान करावल चाहतानी, निहारल बंद करी।" लेकिन "समाज के रक्षक" एगो वकील के इ फोटो अश्लील लागल अवुरी तुरंत कोर्ट पहुँच गईले।

बहुत महिला अवुरी पुरुष ए मामला में वकील के विरोध कईले अवुरी एकरा के बिना मतलब के कहले, लेकिन वकील बाबू कहले कि "फोटो में जवन महिला स्तनपान करावत लऊकतिया ओकर बिआह नईखे भईल।"

समाज के रक्षक बनके कोर्ट में अर्जी लगावे वाला वकील बाबू के एतना बात ना बुझाईल कि फोटो में मॉडल के माँग में सेनूर बा, गरदन से मंगलसूत्र लटकल बा, गोदी में बच्चा बा अवुरी उ स्तनपान करावतिया। अयीसना में अश्लीलता कहाँ से आ गईल? असहूँ कवना किताब में लिखल बा कि जदी कुँवार लईकी बच्चा के जन्म दिही त स्तनपान ना कराई?

हमरा जानकारी में कवनो समाज महतारी के अपना बच्चा के दूध पीआवे से ना रोके। महतारी चाहे शादीशुदा होखे, कुँवार होखे, चाहे विधवा होखे। कुँवार चाहे विधवा महिला के महतारी बनला प विवाद हो सकता, लेकिन महतारी बनला के बाद से संतान के दूध पीआवे से रोकल कानून अपराध के अलावे पाप होखेला।

लेकिन हमनी के समाज के इहे सच्चाई बा। आज कुछ लोग के स्तनपान करावत महिला के देखे में "आनंद" आवेला त कुछ लोग के इ प्रक्रिया "अश्लील" लागेला। जबकि लगभग सभ लोग एक समय ए प्रक्रिया से होके आगे बढ़ल बा।

अयीसन काहें? जदी दूध पीआवल अश्लीलता बा त नदी में से नहा के गमछा लपेट के बहरी निकलल कहाँ से मर्यादा बन गईल? जवाब जरूरी नईखे, सोच बदलल जरूरी बा। स्तनपान करावल कतहू से अश्लील नईखे, इ प्राकृतिक प्रक्रिया ह अवुरी एकरा में रुकावट डाले वाला लोग प्रकृति के दोषी बाड़े।

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