भोजपुरी गीत-संगीत के अंजोरिया-अन्हरिया, अश्लील-सलिल के बहस, के दोषी अवुरी के महान

आज के दौर में भोजपुरी के चर्चित गायक के रूप में अरविंद अकेला 'कल्लू जी', खेसारी लाल यादव, कल्पना पटवारी, दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' अवुरी पवन सिंह के नाम लिहल जाता।

आज के दौर में भोजपुरी के चर्चित गायक के रूप में अरविंद अकेला 'कल्लू जी', खेसारी लाल यादव, कल्पना पटवारी, दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' अवुरी पवन सिंह के नाम लिहल जाता।

भोजपुरी गीत-संगीत आ सिनेमा प अश्लीलता के लागत आरोप के बीच खेसारी लाल यादव अपना एगो बयान से भारी बवाल खाड़ा क देले। अश्लील गाना गावे के आरोप प खेसारी कहले, "जदी पवन सिंह, खेसारी लाल यादव अवुरी दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' के हटा दिहल जाए त भोजपुरी में का बाचता?"

भाई जी, मुर्गा नाहियों बोले त बिहान हो जाला, ए बात के काहें भूला गईनी? हालांकि अश्लील का ह, ए सवाल के जवाब मुश्किल बा। लेकिन जब बहुत लोग कवनो चीज़ के अश्लील कहस त मान लिहल जाला कि उ अश्लील बाटे।

भोजपुरी के दर्जन भर गायक, गीतकार अश्लीलता के खिलाफ लड़ाई शुरू करे के घोषणा क चुकल बाड़े। कुछ जागरूक लोग भी ए लड़ाई के मैदान में हाथ-पैर आजमावतारे। लेकिन, लड़ाई त दूर के बात कतहू सुगबुगाहट तक नईखे होखत।

खैर, मुद्दा बा अश्लीलता। एकर शुरुआत कब भईल, केकरा से भईल अवुरी काहें भईल के जवाब मत खोजी, ना त जेकरे नाम लेब ओकरे संगे इ शब्द सट के रह जाई। जवन गीत आज आपके सलिल लागत होखे, हो सकता कि उ अपना समय के हिसाब से अश्लील होखे!

एगो गीत हमरा बहुत निक लागेला, गायक के नाम आप लोग खुद खोज लेब। आज से करीब 20 साल पहिले के गावल ए गीत के बोल बा 'दियवा बूता दी हमरा लाज लागता ए पिया …'। ए गीत में पाता ना दिया जरला प कवना चीज़ से लाज लागत रहे, सोचे के विषय बा। असही, आज के एगो गीत बा 'दिया बूता के पिया जाने का-का किया…'। सोचत रही कि कवन गीत अश्लील बा, कवन गीत सलिल बा।

अश्लील अवुरी सलिल में सिर्फ भाव-भंगिमा के फर्क होखेला। गावे के तरीका शब्द के भाव बदल देवेला। जदी गावे के तरीका से शब्द के भाव बदलता, त आज के गायक निमनका भाव के काहें नईखन सिखत?

कारण बा, भोजपुरी गीत-संगीत के बाज़ार। बाज़ार में सभ केहु अपना दोकान के स्थापित कईल चाहता। केहु 5 प्रतिशत के डिस्काउंट देता, त केहु 50 प्रतिशत के। ग्राहक समान के क्वालिटी नईखे देखत, डिस्काउंट प ज़ोर देता। लेकिन, गायक कवना चीज़ के डिस्काउंट देता? गायक कला के डिस्काउंट देता, शब्द के डिस्काउंट देता आ चमक-धमक वाला चीज़ परोसता।

भोजपुरी गायकी के शुरुआत मंदिर, मठिया में हरिकीर्तन गावे से होखत रहे, जवन कि आगे चल के रामायण, महाभारत अवुरी ऐतिहासिक-पौराणिक घटना तक पहुंचत रहे। भोजपुरी के पुरनका गायक मरे तक इहे गावत रहले। पईसा के बहुत महत्व ना रहे, ज्ञान अवुरी कला के सम्मान होखत रहे। एही चलते ओ लोग के 'व्यास' कहल जात रहे। व्यास शब्द वेद व्यास से आवेला, जवन कि महाभारत के रचईता रहले।

भिखारी ठाकुर के गावल एगो गीत याद परेला, 'आरा हिले, बलिया हिले, छपरा हिलेला... '। ए गीत के एगो पौराणिक घटना के संदर्भ में गावल रहे। हालांकि अधिकांश लोग खाती इ सौंदर्य रस के गीत बाटे।

हमनी के पुरनिया पौराणिक अवुरी धार्मिक घटना के बतावे खाती लयदारी नाम के एगो गीत के प्रकार के जन्म देले रहले। लयदारी असल में 'चटक' शब्द में घटना के बयान करे के तरीका रहे। भिखारी ठाकुर के गीत एही श्रेणी में रहे।

धीरे-धीरे समय बदलत गइल अवुरी कैसेट के जमाना आ गइल। कैसेट के दौर में प्रसंग प लयदारी हावी हो गइल अवुरी अब बिना मतलब, बिना ओर-छोर, ज़बरदस्ती के लयदारी ठुंसाए लागल। ए दौर के एगो चर्चित गीत रहे 'खाई भतरा के कमाई त लजाई काहें…'। शिव विवाह के प्रसंग में बिना कारण ए गीत के ठूंसल रहे।

असही एगो अवुरी गीत आइल रहे, 'पूरा ना करीहे दूध जरूरत पानी के, पानी से ना बूझी आग जवानी के …'। वीर रस से सराबोर महाभारत के एगो प्रसंग में ए गीत के ठूंसल रहे।

कैसेट के दौर से पहिले सुगम संगीत, जेकरा के हमनी के लोकगीत कहेनी, ओकर दौर शुरू भईल। अधिकांश लोग एकरा के पूर्वी के नाम से जानेले। पूर्वी में खासियत रहे कि एकर समूचा गीत पूरब, खास तौर प कलकाता कमाए गइल पति के याद में, ओकरा के भेजल संदेश में, ओकरा आवे के आस में रचल रहे।

मतलब दौर बदल चुकल रहे। मंदिर, मठिया अवुरी खरिहानी से निकल के भोजपुरी संगीत अब स्टेज के चीज़ बन गइल रहे। लय अवुरी ताल के महत्व बढ़ गईल रहे। रामायण, महाभारत अवुरी पुराण के रटे के जरूरत ना रहे। एही दौर में नाच बदलत रहे। काल्ह तक कोठा अवुरी कुछ लोग तक पहुँच राखेवाली कला अब सार्वजनिक हो चुकल रहे।

इ उ दौर रहे जब भोजपुरी गीत-संगीत में पुरुष कलाकार के मुक़ाबला महिला कलाकार से शुरू भईल। बाज़ार बसत रहे, दोकान छनात रहे अवुरी दोकानदार एकरा दूसरा से आगे निकले के कोशिश करत रहले। लेकिन कॉम्पटिशन सुस्त चाल से आगे बढ़त रहे। अब 'व्यास' के संगे-संगे 'रानी' के भरमार रहे।

एही बीच कैसेट आ गइल। भोजपुरी के गायक के बियाह शादी के अलावे कमाए के मौका मिल गइल। कमाई खाती सबसे जादे जरूरी रहे - कैसेट के बिक्री। जेकर कैसेट ढ़ेर बेचाई, ओ गायक के कंपनी ढ़ेर पईसा दिही। शुरू भईल 'चटक' गीत गावे के दौर।

लेकिन सभ केहु के 'चटक' खाना बनावे ना आवे, अधिकांश लोग 'चटक' बनावे के फेरा में तरकारी के नाश क देवेला, काहेंकी खाली मसाला ठूंसला से तरकारी चटक बन जाईत त सब केहु बड़का रसोईया हो जाई। इहे हाल हमनी के भोजपुरी गीत-संगीत संगे भईल। गायक-गीतकार एतना मसाला ठूँसे लगले कि धीरे-धीरे खाना बेस्वाद हो गइल।

एहिजे हमनियों से गलती भईल। हमनी के हाथी कान पूड़ी छोड़ के पोलाव प लोभा गईनी। पांत में बईठल भूला गईनी आ अपने से निकाल-निकाल के जवन-जवन निक लागल खा गइनी। तनिकों ध्यान ना देनी कि बाद में जे आई, से का खाई?

आज के दौर कैसेट अवुरी स्टेज से आगे बढ़ के फिल्मी पर्दा तक पहुँच गइल बा। हरेक गायक के सपना फिल्मी पर्दा तक पहुंचे के रहता। ए रोग से केहु नईखे बाचल, हो सकता आप अपना प्रिय गायक के ए रहन के ना देखले होई, लेकिन उहो नईखन बाचल।

अयीसना में केहु एक चाहे चार आदमी के अश्लीलता खाती दोषी बतावल उचित नईखे। जरूरत बा कि अभियो सहेजल जाए, संवारल जाए। सजावे-संवारे खाती छूए के परेला, भीरी जाए के परेला। पुल बनावे खाती नदी में उतरे के परेला, किनारा बईठला से दरियाव के गहराई ना पाता चले।

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