फेर जुलाई आइल, फेर नीतीश बाबू के राजनीतिक सावन आइल, का फेर अंतरात्मा के आवाज़ सुनाई

नीतीश कुमार के पछिला साल जुलाई महीना में 'अंतरात्मा' के आवाज़ प महागठबंधन छोड़ देले रहले।

नीतीश कुमार के पछिला साल जुलाई महीना में 'अंतरात्मा' के आवाज़ प महागठबंधन छोड़ देले रहले।

सावन के महीना आवे में बेशक अभी 20-25 दिन के देरी होखे, लेकिन बिहार के राजनीतिक सावन के महीना शुरू हो गईल बा। पछिला साल एही महीना में नीतीश कुमार के अंतरात्मा अचानक जागल रहे अवुरी लालू संगे गठबंधन खतम करत भाजपा संगे सरकार बनावे के फैसला क लेले रहे।

करीब 11 महीना से सुतल नीतीश कुमार के अंतरात्मा अवुरी स्वाभिमान फेर जाग गईल बा। नतीजा साफ देखाई देता। बिहार के विशेष राज्य के दर्जा देवे के मांग रह-रह के ज़ोर मारे लागतिया। एनडीए के चेहरा बने अवुरी भाजपा के मुक़ाबले जादे सीट प चुनाव लड़ के 'बड़ भाई' कहाए के मन करता।

अंतरात्मा के आवाज़ प सुशासन बाबू भाजपा से दोस्ती त क लेले, लेकिन बहुत जल्दीए कसमसाए शुरू क देले। जंगलराज अवुरी भ्रष्टाचार के दुहाई देके राजद संगे गठबंधन खतम करेवाला सुशासन बाबू के अंतरात्मा ए 11 महीना में सृजन घोटाला, शौचालय घोटाला, धान घोटाला समेत दर्जन भर मामला प ना जागल।

मुजफ्फरपुर अवुरी मोतीहारी के बालिका गृह में दर्जनों नाबालिग लईकिन संगे 'गंदा काम' भईल, सैकड़ों लोग के बेदर्दी से हत्या भईल, सैकड़ों लोग संगे लूटपाट भईल, सैकड़ों लईकी-औरत के बलात्कार भईल, दंगा भईल, बिहार में भीड़तंत्र हावी होखत गईल लेकिन नीतीश बाबू के अंतरात्मा ना जागल।

लेकिन, अब अयीसन नईखे। अब अंतरात्मा जाग गईल बिया अवुरी बिहार के चिंता में व्यस्त बिया! बिहार के विकास अवुरी बिहारी के भलाई के नाम प भाजपा संगे गठबंधन करेवाला नीतीश बाबू के कहनाम बा कि 'विशेष राज्य के दर्जा प बिहार के हक बा'।

बिहार के विशेष राज्य के दर्जा के अलावे जदयू के कहनाम बा कि 2014 के चुनाव में भाजपा बेशक बिहार के 22 लोकसभा सीट प जीतल होखे, लेकिन सीट बंटवारा में फॉर्मूला 2009 के चली। एनडीए के चेहरा नीतीश कुमार होईहे अवुरी भाजपा के माने के पड़ी कि जदयू 'बड़ भाई' ह।

दुनो मांग के सीधा संबंध अंतरात्मा से बाटे। नीतीश बाबू के अंतरात्मा बढ़िया से जानतिया कि आज 2009 वाली हालत नईखे। भाजपा पहिले के मुक़ाबले जादे मजबूत बिया जबकि नीतीश बाबू के राजनीतिक कद में 2012 से लेके आज तक लगातार गिरावट आवता।

अंतरात्मा जानतिया कि जदी अभी सीट बंटवारा के फैसला ना भईल त लोकसभा चुनाव के घोषणा होखला के बाद भाजपा के सोझा खाड़ा भईल तक मुश्किल हो जाई।

याद रहे कि 2009 के लोकसभा चुनाव में जदयू राज्य के 40 सीट में से 25 सीट प उम्मीदवार उतरले रहे जबकि भाजपा के हिस्सा में 15 सीट आइल रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव जदयू अवुरी भाजपा अलग-अलग लड़ल रहे। भाजपा संगे तब रालोसपा अवुरी लोजपा रहे। तीनों दल के राज्य के 40 लोकसभा सीट में से 31 प जीत मिलल रहे।

अब जबकि एनडीए में भाजपा अवुरी रामविलास पासवान आ उपेंद्र कुशवाहा के संगे नीतीश कुमार शामिल बाड़े त जदयू के कहनाम बा कि 'पार्टी भाजपा संगे गठबंधन कईले बिया, रालोसपा अवुरी लोजपा से ओकर कवनो गठबंधन नईखे। बाकी दुनो दल भाजपा के सहयोगी हवे, एहसे ए दुनो के चिंता भाजपा करे।'

नीतीश कुमार के ओर से ए मामला में कुछ फॉर्मूला सुझावल बा। पहिला फॉर्मूला बा कि लोजपा अवुरी रालोसपा के सीट दिहला के बाद बिहार के 40 सीट में से जतना सीट बाचे, ओकरा के जदयू अवुरी भाजपा आपस में बराबर-बराबर बांट लेवे। उदाहरण से समझी - लोजपा के 6 आ रालोसपा के 3 सीट देला के बाद बाचल 31 में से जदयू 16 सीट आ भाजपा 15 सीट प चुनाव लड़े।

दुसरका फॉर्मूला बा कि जदयू 21 सीट आ भाजपा 19 सीट प आपन-आपन उम्मीदवार उतारे। जहां तक रालोसपा अवुरी लोजपा के सवाल बा, त ए दुनो दल के भाजपा अपना कोटा से सीट देवे खाती आज़ाद बिया, जदयू के ए दुनो दल से कवनो मतलब नईखे।

जदयू के सुझावल ए दुनो फॉर्मूला के संगे नीतीश कुमार के खास लोग में गिनाए वाला राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह आ बिहार सरकार के मंत्री ललन सिंह दिल्ली में भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव से मुलाक़ात कईले। खबर बा कि भाजपा ए दुनो फॉर्मूला के पूरा तरह के खारिज क देले बिया अवुरी साफ क देले बिया कि पार्टी आपन जीतल एको सीट ना छोड़ी।

भाजपा के कहनाम बा कि उ नीतीश कुमार के जादे सीट देवे खाती पासवान अवुरी कुशवाहा के नईखे छोड़ सकत। भाजपा के फैसला के बाद नीतीश कुमार अब खुद 6 जुलाई के दिल्ली में अरुण जेटली से मुलाक़ात करीहे। नीतीश बाबू के बेचैनी के अतने से समझल जा सकता कि उ अमित शाह संगे 12 जुलाई के होखे वाली मुलाक़ात से पहिले सीट बंटवारा के मामला के सझुरा लिहल चहतारे।

एही सभ के देखत आशा बा कि नीतीश कुमार के अंतरात्मा जल्दीए एगो बड़ फैसला करी। एक त जुलाई के महीना चलता, दूसरे नीतीश बाबू के तबीयत जब-तब बिगड़ जाता। नीतीश बाबू के तबीयत अवुरी जुलाई महीना के बिहार के राजनीति से खास लगाव बा।

जदी अंतरात्मा के ठेस पहुंचल, स्वाभिमान प चोट लागल त सावन से पहिले राजनीतिक फुहार से बिहार में बाढ़ आ सकता। हालांकि तुलसीदास जी लिखले बानी -

बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति।
बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥

मतलब कि "ऐने-ओने तीन दिन बीत गईल, लेकिन जिद्दी समुंदर निहोरा के ना मनलस। तब राम जी क्रोध में बोलले - बिना डर के प्रेम ना होखेला।" ओईसे नीतीश बाबू 6 जुलाई से 9 जुलाई तक, चार दिन दिल्ली में रहेवाला बाड़े। ए चार दिन में केकरा-केकरा से भेट करीहे, कवन-कवन फैसला करीहे एकरा प सभके नज़र होई।

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