भारत में निवेश के उत्साह खत्म हो चुकल बा, निवेशक 'इंतज़ार' करे के नीति अपना लेले बाड़े

क्रॉल के मुताबिक 2014 में बहुमत वाली सरकार बनला के बाद विदेशी निवेशक भारत के मामला में बहुत उत्साहित रहले अवुरी बड़े-बड़े दावा करत रहले, लेकिन लोकसभा चुनाव अवुरी विश्व के हलचल के देखत अब मिजाज बदल गईल बा।

क्रॉल के मुताबिक 2014 में बहुमत वाली सरकार बनला के बाद विदेशी निवेशक भारत के मामला में बहुत उत्साहित रहले अवुरी बड़े-बड़े दावा करत रहले, लेकिन लोकसभा चुनाव अवुरी विश्व के हलचल के देखत अब मिजाज बदल गईल बा।

आर्थिक जगत में जोखिम प्रबंधन खाती जानल जाए वाली अमेरिकी संस्था क्रॉल के कहनाम बा कि दुनिया के बड़े-बड़े निवेशक अगिला लोकसभा चुनाव अवुरी विश्व के हलचल के देखत भारत में निवेश करे से परहेज करतारे अवुरी 'देखे आ इंतज़ार' करे के नीति संगे आगे बढ़तारे।

क्रॉल के कहनाम बा कि भारत बेशक दुनिया में तेजी से बढ़त प्रमुख अर्थव्यवस्था में से एक बा कि लेकिन खराब शासन व्यवस्था, पारदर्शिता के कमी अवुरी धोखा आ घोटाला के खतरा के चलते भारत के मामला में विदेशी निवेशक के विचार बदलता।

संस्था के भारत इकाई के प्रबंध निदेशक तरुण भाटिया कहले कि पहिले सत्यम घोटाला एकमात्र केस रहे, आज ओईसन बहुत केस सोझा बाटे। उनुकर इशारा विजय माल्या, मेहुल चोकसी, नीरव मोदी समेत वित्तीय गड़बड़ी अवुरी धोखाधड़ी से जुडल मामला के ओर रहे।

मालूम रहे कि 2009 में तब के मशहूर सूचना तकनीक कंपनी सत्यम कम्प्युटर्स में वित्तीय गड़बड़ी के खुलासा भईल रहे। ए गड़बड़ी के अंजाम देवे वाला लोग ए कंपनी के मालिक रहले।

तरुण भाटिया कहले कि जदी आप दुनिया के बड़े-बड़े निवेशक से बात करब, त पाता चली कि उ लोग 'देखे आ इंतज़ार' करे के दौर में पहुँच गईल बाड़े। भारत के मामला में जवन उत्साह 12-18 महीना पहिले रहे, अब उ खतम हो चुकल बा।

ए 12 से 18 महीना के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले 69 के पार जा चुकल बा। दुनिया में महंगाई अवुरी ट्रेड वार के हलचल बा। एही समय में विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाज़ार से करीब 660 करोड़ रुपया निकाल चुकल बाड़े।

क्रॉल के मुताबिक 2014 में बहुमत वाली सरकार बनला के बाद विदेशी निवेशक भारत के मामला में बहुत उत्साहित रहले अवुरी बड़े-बड़े दावा करत रहले, लेकिन लोकसभा चुनाव अवुरी विश्व के हलचल के देखत अब मिजाज बदल गईल बा।

तरुण भाटिया कहले कि खराब शासन व्यवस्था, पारदर्शिता के कमी अवुरी धोखाधड़ी के डर जईसन कारक भारत के बारे में निवेशक के विचार बदले प मजबूर करता। उ कहले कि देश में वित्तीय रिपोर्टिंग बहुत खराब बा। पंजाब नेशनल बैंक घोटाला समेत अलग-अलग मामला से वित्तीय रिपोर्टिंग के हालत के जानकारी मिलता।

क्रॉल के ताज़ा 'ग्लोबल फ्रॉड रिपोर्ट' में कहल बा कि पछिला एक साल में भारत बहुत प्रकार के धोखाधड़ी मामला देख चुकल बा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 89 प्रतिशत व्यापारिक प्रतिष्ठान पछिला एक साल में धोखाधड़ी के सामना क चुकल बाड़े। साल 2016 में इ आंकड़ा 68 प्रतिशत रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक देश के 40 प्रतिशत व्यापारिक प्रतिष्ठान के कहनाम बा कि धोखाधड़ी के अधिकांश मामला में दोषी पार्टनर, छोटे-छोटे कर्मचारी अवुरी डीलर चाहे सप्लायर होखेला।

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