भारतीय रेलवे 180 नाया रेल लाइन बिछावता, बिहार-बंगाल के सबसे अधिका फायदा

रेल मंत्री कहले कि बिहार में 34 नाया रेल लाइन बिछावे के काम होखता जबकि बंगाल अवुरी आंध्र प्रदेश में एकर संख्या 18-18 बाटे।

रेल मंत्री कहले कि बिहार में 34 नाया रेल लाइन बिछावे के काम होखता जबकि बंगाल अवुरी आंध्र प्रदेश में एकर संख्या 18-18 बाटे।

केंद्र के मोदी सरकार देश के हरेक कोना के रेल लाइन से जोड़े के मकसद से 180 नाया रेलवे लाइन बिछावे के काम शुरू क देले बिया। भारतीय रेलवे के ए परियोजना के सबसे जादे लाभ बिहार, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक अवुरी उत्तर प्रदेश के मिली।

बुधवार के लोकसभा में एगो सवाल के लिखित जवाब में रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन बतवले की भारतीय रेलवे देश के अलग-अलग राज्य में 180 नाया रेल लाइन बिछावे के परियोजना शुरू कईले बिया।

रेल राज्य मंत्री लोकसभा में कहले कि ए 108 नाया लाइन में से बिहार में 34, आंध्र प्रदेश में 18, पश्चिम बंगाल में 18, कर्नाटक में 16, उत्तर प्रदेश में 15 , असम आ पूर्वोत्तर क्षेत्र में 15, झारखंड में 14, महाराष्ट्र में 12, ओडिशा में 10, राजस्थान में 10, तेलंगाना में 9, छत्तीसगढ़ में 8, मध्य प्रदेश में 8, तमिलनाडु में 8, हरियाणा में 7, पंजाब में 6, गुजरात में 4, उत्तराखंड में 3, हिमाचल प्रदेश में 4, केरल में 2 आ जम्मू-कश्मीर अवुरी दिल्ली में 1 -1 परियोजना शामिल बा।

उ कहले कि नयकी रेल लाइन परियोजना के अधिकांश हिस्सा पिछड़ा आ दूर-दराज के इलाका के आर्थिक अवुरी सामाजिक जरूरत के मुताबिक बाटे। कुछ परियोजना के संबंध एक से अधिका राज्य से बाटे अवुरी एकर मकसद आर्थिक रूप से पिछड़ल इलाका के तेजी से विस्तार कईल बा।

रेल राज्य मंत्री कहले कि कुछ परियोजना के काम अभी शुरू नईखे भईल। कवनो रेल परियोजना के शुरू करे खाती केंद्र अवुरी राज्य सरकार के अलग-अलग विभाग के अनुमति के जरूरत होखेला। जमीन के जरूरत होखेला। एह सभ मामला में देरी के चलते कुछ परियोजना अभियो जमीन प नईखे उतरल।

भाजपा सांसद राजीव प्रताप रुड़ी के मढ़ौरा (सारण, बिहार) डीजल लोकोमोटिव फ़ैक्टरी से जुडल एगो सवाल के जवाब में रेल मंत्री पीयूष गोयल कहले कि रेल मंत्रालय अवुरी जीई डीजल लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) में मढ़ौरा के रेल इंजन फ़ैक्टरी बनावे के काम चलता।

रेल मंत्री कहले कि ए करार के मुताबिक सालाना 120 रेल इंजन के निर्माण क्षमता वाला एगो कारख़ाना सारण के मढ़ौरा में लगावे के बा, जवना के काम फरवरी 2019 में पूरा हो जाई। इ कारख़ाना 11 साल में भारतीय रेलवे के 1,000 रेल इंजन (4500 हॉर्स पावर क्षमता के 700 इंजन आ 6000 हॉर्स पावर क्षमता के 300 इंजन) सप्लाई करी।

उ कहले कि ए फ़ैक्टरी में बनल पहिला 250 रेल इंजन के 9 साल तक जबकि एकरा बाद के 250 रेल इंजन के 4 साल तक रखरखाव कंपनी करी। पीयूष गोयल कहले कि रेखरखाव खाती उत्तर प्रदेश के रोज़ा अवुरी गुजरात के गांधीधाम में डिपो बनावल जाई। रोज़ा डिपो के बनावे के काम पूरा हो चुकल बा जबकि गांधीधाम डिपो खाती फरवरी 2020 के लक्ष्य बाटे।

उ कहले कि रेल मंत्रालय अवुरी जीई के बीच भईल करार के मुताबिक रेल मंत्रालय के मरौढ़ा रेल इंजन कारख़ाना में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रही जबकि 74 प्रतिशत हिस्सेदारी जीई डीजल लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड के होई। रेलवे अपना हिस्सेदारी के रूप में ए परियोजना प कुल 189 करोड़ रुपया खर्च कईले बा जबकि जीई के ओर से अभी तक 540 करोड़ मरौढ़ा फ़ैक्टरी आ 155 करोड़ रौजा डिपो प खर्च हो चुकल बा।

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