भारतीय मुद्रा के रोचक यात्रा, गाय अवुरी गहना से सिक्का तक के सफर

चीन अवुरी मध्य पूर्व के संगे भारत दुनिया में सबसे पहिले सिक्का जारी करेवाला देश रहे।

चीन अवुरी मध्य पूर्व के संगे भारत दुनिया में सबसे पहिले सिक्का जारी करेवाला देश रहे।

सिक्का, अयीसन चीज़ जवन कि ढ़ेर रहे त लोग परेशान होखे लागेले, ना रहे त बनत काम बिगड़ सकता। ए सिक्का के इतिहास बहुत रोचक बा। भारत में सिक्का के इतिहास के बतावत प्रसिद्ध विद्वान प्रशांत कुलकर्णी कहले कि पहिले कवनो समान के लेन-देन खाती समान के अदला-बदली होखत रहे, बाद में समान के जगह सिक्का ले लेलस।

पटना के बिहार संग्रहालय में आयोजित 'भारतीय मुद्रा की यात्रा' प्रदर्शनी समारोह के तहत शुक्रवार के प्रशांत कुलकर्णी मुद्रा से पहिले अवुरी बाद के स्थिति के जानकारी अपना भाषण में देले।

कुलकर्णी कहले कि वैदिक काल में राजा से उर्वसी पूछली कि का एक इंद्र के बदला 10 हजार गाय मिली? ऋगवेद के ए प्रसंग के मुताबिक तब इंद्र के एक मूर्ति के कीमत 10 हजार गाय रहे।

सिक्का के रोचक इतिहास के बतावत प्रशांत कुलकर्णी।

ए मौका प उ मुद्रा से पहिले के व्यापार के बारे में भी बतवले। उ कहले कि सिक्का के चलन से पहिले मेसोपोटामिया समेत बाकी जगह के लोग समान के खरीदे खाती कनबाली (ईयर रिंग) के इस्‍तेमाल करत रहले। कनबाली के अलावे अवुरी बहुत प्रकार के गहना अवुरी समान रहे जेकरा बदला समान के खरीद होखत रहे।

मालूम रहे कि चीन अवुरी मध्य पूर्व के संगे भारत दुनिया में सबसे पहिले सिक्का जारी करेवाला देश रहे। पहिला भारतीय सिक्का ईसा पूर्व 6वां शताब्दी में भारत के महाजन अवुरी रजवाड़ा जारी जारी कईले रहले। सिक्का जारी करेवाला में गंधर, कुंटाला, कुरु, पंचल, संभावित, सुरसेना आ सौराष्ट्र के क्षेत्र प्रमुख रहे।

चन्द्रगुप्त मौर्य पहिला सम्राट रहले जवन कि अयीसन सिक्का जारी कईले, जवना कि राजसी मानक के तहत रहे। एकरा से पहिले के सिक्का के वजन त एक जईसन रहत रहे लेकिन ओकनी के आकार अलग-अलग रहे।

मौर्य के शासन के दौरान उनुकर प्रधानमंत्री रहल चाणक्य अपना अर्थशास्त्र में अलग-अलग प्रकार के सिक्का के चर्चा कईले बाड़े, जवना के मुताबिक चाँदी के बनल सिक्का के 'रुपयारूपा', सोना के बनल सिक्का के 'स्वर्णरूपा', तांबा के बनल सिक्का के 'ताम्ररूपा' अवुरी सीसारूपा प्रमुख रहे।

कुषाण वंश के शासन के दौरान पहिला सिक्का प सिर के चित्र (head potrait) उकेरे के चलन शुरू भईल। ए चलन अगिला आठ सदी तक रहल। कुषाण वंश के शासन के दौरान जारी भईल सिक्का आदिवासी आ वंशवादी रजवाड़ा के अयीसन सिक्का जारी करे खाती प्रेरित कईलस।

बिहार संग्रहालय (म्‍यूजियम) में बोलत प्रशांत कुलकर्णी सिक्का के इतिहास बतावला के बाद कहले कि हम ब्रिटिश म्‍यूजियम देखले बानी, लेकिन बिहार म्‍यूजियम अद्भुत बा। यहां उ सबकुछ होखता जवन कि ब्रिटिश म्‍यूजियम में होखेला। यहां के स्तर के प्रदर्शनी सिर्फ यूरोप में देखे के मिलेला।

कुलकर्णी कहले कि बिहार में ए तरह के चीज देख के गर्व महसूस होखता अवुरी एकरा खाती हम इहाँ के सरकार के बधाई दिहल चाहतानी।

  • Share on:
Loading...