'आनंद किशोर के इहो नईखे मालूम कि ऑनर्स में नामांकन खाती 45% नंबर जरूरी होखेला'

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) के अध्यक्ष आनंद किशोर।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) के अध्यक्ष आनंद किशोर।

बुधवार से बिहार में शुरू भईल स्नातक में नामांकन के ऑनलाइन प्रक्रिया केहु के पसंद नईखे आवत। एक ओर राजनेता आ छात्र ए व्यवस्था के विरोध करतारे त दोसरा ओर अब विश्वविद्यालय शिक्षक संघ एकरा विरोध में खाड़ा हो गईल। सभके एकही विचार बा कि ए व्यवस्था से छात्र के परेशानी बढ़ गईल बा।

छात्र संघ ए व्यवस्था के अवैध करार देता, त राजनेता कहतारे कि सरकार ए व्यवस्था के संगे छात्र के भविष्य से खेलवाड़ करतिया। राजद अवुरी भाजपा विधान परिषद में ए मुद्दा के उठवलस अवुरी दुनो दल बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर के तुरंत पद से हटावे के मांग कईलस।

ए मामला में पप्पू यादव कहले कि जवन आनंद किशोर मैट्रिक आ इंटर के नईखन संभाल पावत, अब उ स्नातक में दखलंदाज़ी करतारे। एकरा से बड़ दुर्भाग्य का होई। मालूम रहे कि ए व्यवस्था के खिलाफ मंगलवार के पटना विश्वविद्यालय में अलग-अलग छात्र संघ के सदस्य प्रदर्शन कईले।

ओने फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन कहलस कि बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर के स्नातक के नामांकन में दखलंदाजी विश्वविद्यालय के स्वायत्तता में कटौती बाटे। एकर बहुत भारी नकारात्मक असर पड़ी।

एसोसिएशन कहलस कि आनंद किशोर के त इहो नईखे मालूम कि ऑनर्स में नामांकन खाती कम से कम 45 प्रतिशत नंबर जरूरी होखेला, अयीसना में ए आनंद किशोर के ज़िम्मेदारी दिहल कतना सही बा?

फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो.राम जतन सिंह कहले कि पटना विश्वविद्यालय के कुलपति बतवले रहले कि उ विश्वविद्यालय के स्वायत्तता के पक्षधर हवे, अधिकारी भरोसा देले कि ए व्यवस्था से बिना कवनो कमी के मेरिट बनी, लेकिन नतीजा ज़ीरो बाटे।

उ कहले कि ए व्यवस्था में त विश्वविद्यालय के नियम के पालन तक नईखे होखत। सरकार ए व्यवस्था में पूरा तरह से फेल हो चुकल बिया। राम जतन सिंह कहले कि सरकार ए व्यवस्था के लागू करे में करोड़ों रुपया खर्च कईलस, लेकिन छात्र तबहूँ परेशान बाड़े।

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