चलीं बैजु के धाम

चलीं बैजु के धाम

सावन में नाया कांवर कीन दीं पिया,
चलीं बैजु के धाम,
जीनीगी के पुरा होई हर अरमान,
चलीं बैजु के धाम।

सावन में रउरा साथे देवघर जाईब,
गेंठिया जोडा़ के साथे जलवा चढा़ईब,
चलहीं में एहीजा रउरा करीं मति शाम,
चलीं बैजु के धाम,
जीनीगी के---------हर अरमान।

बडी़ भाग सालभर प आवेला ई दिनवा,
भोला के कीरीपा बरीसे सावन के महिनवा,
चुनरी हम नाया पेन्हबि फेंकबि पुरान,
चलीं बैजु के धाम,
जीनीगी के ---------हर अरमान ।

जेकरा प फेरि देले भोला नजरिया ,
दुखवा ना जाय कबो ओकरा दुअरिया,
जलवा चढा़वते पुरा होई हर काम,
चल बैजु के धाम,
जीनीगी के पुरा होई हर अरमान,
चल बैजु के धाम।

सावन में नाया कांवर कीन दीं पिया,
चलीं बैजु के धाम,
जीनीगी के पुरा होई हर अरमान,
चलीं बैजु के धाम।

गौरी के दुलहा जी हईं बडी़ दानी,
अपने रहेले सुनी टुटही पलानी,
भक्तन के एके टेर प कई देले काम,
चलीं बैजु के धाम,
जीनीगी के---------हर अरमान।

पुडी़ कचौडी़ प ना कबहुं लोभाले,
भांगे धतुर प ई झुमि झुमि जाले,
भक्ति में शक्ति बा लागे कवन दाम,
चलीं बैजु के धाम,
जीनीगी के--------हर अरमान।

देवाधि देव महादेव ई कहाले,
तीनो ही लोक में ना असहीं पुजाले,
कईले देवेन्दर अब चले के पलान,
चलीं बैजु के धाम,
जीनीगी के पुरा होई हर अरमान,
चलीं बैजु के धाम।

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देवेन्द्र कुमार राय
ग्राम: जमुआँव, पीरो,
भोजपुर, बिहार
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