सांवर रंग के महिला कवनो बात के जादे दिन तक याद राखेली: रिपोर्ट

सांवर रंग के महिला कवनो बात के जादे दिन तक याद राखेली: रिपोर्ट

कवनो बात चाहे घटना के याद राखे के मामला में सांवर वर्ण, माने सांवर एशियाई महिला अपना देह के रंग प गुमान क सकतारी। करीब 25 लाख लोग प कईल एगो अध्ययन के बाद विशेषज्ञ दावा कईले कि गोर (यूरोपीय) महिला-पुरुष के मुकाबले एशियाई महिला में डिमेंशिया (भूलाए के बेमारी) के खतरा कम होखेला।

ए अध्‍ययन के नतीजा में बतावल गईल कि सांवर लोग में डिमेंशिया होखे के खतरा दुनिया के बाकी लोग के मुकाबले कम बाटे। हालांकि इ अपना प्रकार के पहिला अध्ययन बा, जवना के नतीजा के सीधा संबंध इंसान के देह के रंग से बाटे।

करीब 8 साल तक चलल अध्‍ययन के बाद 'यूनीवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन' के विशेषज्ञ ए नतीजा प पहुंचले कि एकरा खाती अलग-अलग रंग के लोग के खूबी आ कमी खाती ओ लोग के डीएनए अवुरी पर्यावरण, दुनों जिम्‍मेवार हो सकता।

अध्‍ययन के दौरान विशेषज्ञ देखले कि डिमेंशिया के मामला में बाकी लोग के मुक़ाबले एशियाई महिला में 18 प्रतिशत जबकि एशियाई पुरुष में 12 प्रतिशत कम खतरा रहे। शोधकर्ता ए अध्‍ययन के आधार प दावा कईले कि सांवर महिला आ पुरुष के मुक़ाबले गोर महिला आ पुरुष में डिमेंशिया के बेमारी होखे के खतरा अधिका बा।

रंग के आधार प भईल ए पहिला अध्‍ययन में शोधकर्ता के टीम के अगुवाई डॉक्‍टर क्लॉडिया कूपर कईली। कूपर बतवली कि अध्ययन में शामिल 25,11,681 लोग में से 66,000 लोग डिमेंशिया के बेमारी से पीड़ित रहले।

क्‍लीनिकल एपिडेमियोलॉजी नाम के जर्नल में प्रकाशित ए अध्ययन में अलग-अलग नस्ल के लोग के तुलना पहिले से घोषित नतीजा से कईल गईल। क्लॉडिया कूपर कहली कि लक्षण के गोर वर्ग के लोग के मुकाबले सांवर लोग में भूलाए के बेमारी होखे के संभवना ना के बराबर रहे।

विशेषज्ञ ए अध्ययन के नतीजा से चिंतित बाड़े। ओ लोग के सोझा सवाल बा कि कवनो खास वर्ण समूह में ए बेमारी के खतरा अधिका काहे बा?

डिमेंशिया मात्र एक बेमारी ना ह, इ कई तरह के मानसिक बेमारी अवुरी कमी के झुंड ह। हालांकि एकरा खाती शौक्षिक, आर्थिक, धूम्रपान, व्‍यायाम अवुरी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य जइसन कारण जिम्‍मेवार हो सकेला।

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