रउआ त जवानी के परमीट हो गईनी

रउआ त जवानी के परमीट हो गईनी

भोजपुर में एगो सतर बरीस के उमीर वाला आदमी के देखनी ,जेकरा सोझा पचीस बरीस के नवही के जवानी आ उत्साह कम लागत रहे। भगवान के बनावल एह रचना के वर्णन करत गीत के भाव -

हीट हो गईनी ए बाबा हीट हो गईनी,
रउआ त जवानी के परमीट हो गईनी।

साठा में रउआ बनल बानी पाठा,
महि दीहनी आजुओ ले नवही के माठा,
रउरा त मउरईलो प मीठ हो गईनी,
रउआ त जवानी के परमीट हो गईनी।

अबहीं ले फानतानी खेत पांच काठा,
बडुए ना हाथवा में लमहर लाठा,
रउरा के देखि के हम सीठ हो गईनी,
रउआ त जवानी के परमीट हो गईनी।

अबहीं ले रउरा हुमाचा मारतानी,
लागतरुए पीहीना भोजपुर के पानी,
नवही के सीखे खातीर गीत हो गईनी
रउरा त जवानी के परमीट हो गईनी।

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