उ घर घर ना ह जवना प कवनों छानी ना होखे

उ घर घर ना ह जवना प कवनों छानी ना होखे

उ घर घर ना ह जवना प कवनों छानी[1] ना होखे
उ नयन कइसन जवना में कवनों पानी ना होखे ।

दाम्पत्य के देवाला निकले में इचिको देर ना लागे
त्याग-समर्पन के राही जदि दुनों परानी[2] ना होखे ।

दिल के अइसन सिंघासन के का मतलब हरेश्वर
जवना प बइठल कवनों रानी-महरानी ना होखे ।

ओह जिनिगिया के कीमत दू कौड़ी के रहि जाला
जवना में चानी[3] काटे के कवनों कहानी ना होखे ।

अब चलीं सभे चलीं जा एगो नया नगर बसाईं जा
जहाँ खाली प्यार मोहब्बत होखे शैतानी ना होखे ।

[1] छानी ~ छप्पर
[2] परानी ~ प्राणी
[3] चानी ~ चांदी

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