बुझल चूल्हा के उपला प आग मिलल बा

बुझल चूल्हा के उपला प आग मिलल बा

हमरा मनवाँ के मांगल मुराद मिलल बा
दिल के गमला में हमरा गुलाब खिलल बा ।

हमरा धड़कन के जेतना सवाल रहन सन
ओह सवालन के सुन्दर जबाब मिलल बा ।

हमरा नयनन के दरपन में चाँद आ बसल
हमरा होंठन के सरगम शराब मिलल बा ।

मन के बंजर बधार में बहार आ गइल
भरल फगुआ से सोगहग किताब मिलल बा ।

जेठ जिनिगी में सावन के फूल खिल गइल
बुझल चूल्हा के उपला प आग मिलल बा ।

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