हमहीं रहीं शेर आ बनलो रहब शेर

हमहीं रहीं शेर आ बनलो रहब शेर

हमहीं रहीं शेर आ बनलो रहब शेर,
मुसवो से लडे़ में हम भले हो जाईं ढे़र।

आजु के राज राग में सभ कुछ बानी,
नैतिकता के ठेहा प भले होईं लथेर।

हमही कहब-धरब हमही कुल्हि बताईब,
तोहरा जतना बुझे के बा बुझत रह अनेर।

लुट के धइले बानी भरले बानी कोठिला,
हमरा से कंगाल ना केहु बुझत रहे कुबेर।

संविधान त हमरा से हरदम करे चिरौरी,
केहु मरे केहु कुंहुंके हमरा एकर नइखे फेर।

मन में आई उहे करब का केहु कुछ करी,
तूँ कतनो सतकर्मी होइब सुनी ना केहु टेर।

पांच बरीस प मुंह देखाईं देख हमार रूप,
जोड़ले बानी हाथ जितब अबकियो बेर।

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